By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: कबीले में चुनाव-16: प्रतिशोध की सियासत वाले अग्नि परीक्षा के पात्र नहीं हो सकते
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Blog Live > कबीले में चुनाव-16: प्रतिशोध की सियासत वाले अग्नि परीक्षा के पात्र नहीं हो सकते
Blog LiveFeatured

कबीले में चुनाव-16: प्रतिशोध की सियासत वाले अग्नि परीक्षा के पात्र नहीं हो सकते

Rajesh Pandey
Last updated: November 16, 2021 12:42 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
Share
SHARE
  • राजेश पांडेय

सियासी,सियासी हो चुका हिरन इस बार फिर हांफता हुआ खरगोश के पास पहुंचा। आते ही बोला, खरगोश जी, खरगोश जी…।

खरगोश ने कहा, भाई पहले ढंग से सांसें ले लो। आराम से बैठो और फिर पूछो, क्या चाहते हो।

हिरन ने पूछा, यह बताओ…अग्नि परीक्षा क्या होती है। परीक्षा का मतलब तो मैं जानता हूं। जब शेर हम हिरनों के पीछे दौड़ लगाते हैं तो हम परीक्षा दे रहे होते हैं। थोड़ा सा ढीला पड़ने का मतलब है शेर का शिकार हो जाना। मैं सही कह रहा हूं न।

अभी खरगोश कुछ बोल पाता हिरन फिर बोला, अग्नि का मतलब तो आग से होता है न। आग तो वही होती है न, जो हमारे जंगल को हर वर्ष गर्मियों में नुकसान पहुंचाती है। जंगल के जीवों का बड़ा अहित करती है आग। इस आग से बच गए तो ठीक नहीं तो…क्या कर सकते हैं। हम जंगल के जीव तो हर वर्ष अग्नि परीक्षा देते हैं। यह कहते ही हिरन की आंखें नम हो जाती हैं, वो उदास हो जाता है।

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-1ः सत्ता, सियासत और बगावत

Contents
सियासी,सियासी हो चुका हिरन इस बार फिर हांफता हुआ खरगोश के पास पहुंचा। आते ही बोला, खरगोश जी, खरगोश जी…।खरगोश ने कहा, भाई पहले ढंग से सांसें ले लो। आराम से बैठो और फिर पूछो, क्या चाहते हो।हिरन ने पूछा, यह बताओ…अग्नि परीक्षा क्या होती है। परीक्षा का मतलब तो मैं जानता हूं। जब शेर हम हिरनों के पीछे दौड़ लगाते हैं तो हम परीक्षा दे रहे होते हैं। थोड़ा सा ढीला पड़ने का मतलब है शेर का शिकार हो जाना। मैं सही कह रहा हूं न।अभी खरगोश कुछ बोल पाता हिरन फिर बोला, अग्नि का मतलब तो आग से होता है न। आग तो वही होती है न, जो हमारे जंगल को हर वर्ष गर्मियों में नुकसान पहुंचाती है। जंगल के जीवों का बड़ा अहित करती है आग। इस आग से बच गए तो ठीक नहीं तो…क्या कर सकते हैं। हम जंगल के जीव तो हर वर्ष अग्नि परीक्षा देते हैं। यह कहते ही हिरन की आंखें नम हो जाती हैं, वो उदास हो जाता है।खरगोश ने पूछा, तुम अग्नि परीक्षा का अर्थ क्यों पूछ रहे हो।हिरन ने कहा, मैं सियासत में अग्नि परीक्षा के मायने जानना चाहता हूं।खरगोश ने पूछा, पर तुम सियासी लोगों और सियासत की अग्नि परीक्षा के बारे में क्यों जानना चाहते हो। क्या कोई सियासी घटना हुई है, जिसमें किसी सियासी शख्सियत को इस दौर से गुजरना पड़ रहा है। पर, जहां तक मुझे मालूम है, कबीले की सियासत में कोई अग्नि परीक्षा का सामना नहीं कर रहा।हिरन बोला, मैंने सुना है, बड़े महाराज को उनके ही गुट में घेर लिया गया है। कबीले में चुनाव के बाद यदि उनका गुट विजय प्राप्त करता है तो उनको राज गद्दी तक पहुंचने के लिए जिस परीक्षा को देना होगा, उसकी तुलना अग्नि परीक्षा से की जा रही है।खरगोश ने कहा, फुंकनी यंत्र ही कुछ समझाएगा, वही बड़े महाराज के मौन को मन लगाकर समझता है।फुंकनी यंत्र, क्या तुम हमारा वार्तालाप सुन रहे हो। क्या तुम्हारे पास कबीले की सियासत का भूत, भविष्य और वर्तमान है। क्या यहां कभी अग्नि परीक्षा हुई थी, क्या कभी किसी को इस दौर से गुजरना होगा, क्या वर्तमान में ऐसा हो रहा है, खरगोश ने पूछा।फुंकनी यंत्र बोला, अग्नि परीक्षा का अर्थ अग्नि में कूदना या उसमें फंसना नहीं, बल्कि उस पर पार पाना है। अतीत में अग्नि परीक्षा देने वाले सफलता को प्राप्त हुए, क्योंकि वो अग्नि की तरह पावन, राग द्वेष से रहित थे। इसलिए उनको सदियां बीतने पर भी सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है। उनको जन्म जन्मांतर स्मरण किया जाता रहेगा।जहां तक तुम कबीले की राज गद्दी की अभिलाषा में लिप्त, आत्मकेंद्रित, तरह-तरह के प्रपंचों वाले प्रतिशोधियों की बात करते हो, तो इनमें से कोई भी अग्नि परीक्षा देने का पात्रता नहीं रखता। ये इसलिए भी पात्र नहीं हैं, क्योंकि इसमें ये सफलता के परिणाम को प्राप्त नहीं हो सकते। अग्नि परीक्षा ने सफलता को महत्व दिया है।फुंकनी यंत्र बोला, मैं यह नहीं कहता, इनका किसी तपिश से संबंध नहीं है। इनको हमेशा झुलसे हुए अंगारों की तलाश रहती है। ये चिंगारियों को तब तक हवा देते हैं,जब तक कि उसमें किसी को झुलसाने, तपाने या जलाने की ताकत नहीं आ जाती। इस अनिष्ट में झुलसने वाले विरोधी हो या फिर इनकी बैसाखियां ही क्यों न हों।खरगोश बोला, ये प्रतिशोधी कैसे हो सकते हैं, प्रतिशोध तो अतीत की घटनाओं से संबंध रखता है। कबीले की सियासत में अतीत से लेकर वर्तमान तक बहुत सारी घटनाएं हुई हैं। सियासत में दुश्मनी दोस्ती और दोस्ती दुश्मनी में बदलती रही है। यहां कल तक जो साथी थे, आज विरोधी हो गए हैं। जो विरोधी थे, वो साथी हो गए।संबंधों में परस्पर बदलाव से बहुत सारी बातों के अर्थ भी बदल गए हैं। क्या प्रतिशोध की भावना स्नेह और सहयोग में नहीं बदली होगी।फुंकनी यंत्र ने कहा, घटनाएं सदियों पुरानी हों या फिर कुछ वर्ष पहले की, इनमें प्रतिशोध राख में छिपे अंगारे की तरह होता है। यहां राख को खाक समझने वाले अंगारे की तपिश का अंदाजा नहीं लगा पाते। यही नासमझी उनको झुलसाती है, सताती है। यह सियासत है, यहां राख और खाक में मौजूद हर तत्व को समझने की आवश्यकता है।फुंकनी यंत्र ने कहा, क्या तुमने शकुनि का नाम सुना है।खरगोश ने कहा, नहीं… मैं नहीं जानता उनको। क्या यह कबीले की सियासत में कोई नया नाम है।फुंकनी यंत्र बोला, नहीं… इस नाम का तो नहीं पर इनके जैसे काम करने वालों की यहां कमी नहीं है। शकुनि का मतलब छल, प्रपंच, षड्यंत्र, प्रतिशोध है।हिरन बोला, बातों में उलझाओ मत। साफ-साफ समझाओ।फुंकनी यंत्र ने कहा, तुम जैसे भोले जीव सियासत में इसलिए भी नहीं आते, क्योंकि वो उलझ जाते हैं। थोड़ा दिमाग तो लगाना पड़ेगा। प्रतिशोध और सियासत में इसलिए भी कोई खास अंतर नहीं है, क्योंकि ये दोनों ही दिमाग से काम लेने पर जोर देते हैं। यहां क्रिया, प्रतिक्रिया या निर्णय… हृदय एवं भावना के वशीभूत नहीं होते। प्रतिशोध के लिए दुश्मनी आवश्यक नहीं है, यह दोस्त बनकर भी लिया जा सकता है।प्रतिशोध के वशीभूत शकुनि अपनी बहन गांधारी के पुत्र दुर्योधन व कौरवों के साथ दिखता तो है, पर वास्तव में उनके साथ नहीं होता। वह तो हितैषी बनकर हस्तिनापुर को तबाही की ओर ले जाता है। यह सियासत है, जो प्रपंच और षड्यंत्र के बिना पूरी नहीं होती।हिरन ने कहा, बड़े महाराज के ही गुट के देव इंद्र महाराज ने घोषणा कर दी कि यह आवश्यक नहीं कि विजय मिलने पर बड़े महाराज को ही गद्दी सौंपी जाए। क्या इसका अर्थ यह समझूं, कि कर्म करने वाले को फल का अधिकार नहीं होना चाहिए।अपने गुट को विजय दिलाने के लिए दिनरात परिश्रम करने वाले, पहाड़ से मैदान, मैदान से पहाड़ दौड़ने वाले, देवताओं के दरबार में बार-बार मत्था टेकने वाले, गुणी महाराज और उनके वजीरों से हमेशा घिरे रहने का कष्ट झेलने वाले, विरोधियों को भयभीत करने वाले बड़े महाराज को क्या मीठे फल चखने का भी अधिकार नहीं है।खरगोश बोला, उनके गुट के लिए फल मीठे होंगे या कड़ुवे या फीके… यह अभी नहीं कहा जा सकता। किसको क्या फल खिलाने हैं, प्रजा ही निर्णय लेगी। पर, बड़े महाराज का सम्मान तो बनता है।फुंकनी यंत्र ने कहा, किसको सम्मान मिलना चाहिए, किसको राज गद्दी पर बैठाना चाहिए… इसकी सलाह हम क्यों दें। उनके गुट वाले जाने, वो ही बेहतर जानेंगे।हिरन बोला, देव इंद्र महाराज के बोल पर बड़े महाराज मौन क्यों हैं।फुंकनी यंत्र ने कहा, वो जानते हैं मौन में शक्ति होती है। शक्ति का प्रयोग समय पर ही करना चाहिए। वैसे उनका मौन बहुत कुछ कहता है। वो शक्ति बटोर रहे हैं, ताकि सही समय पर सही उत्तर दिया जा सके।अभी तक के लिए इतना ही… कल मिलते हैं।खऱगोश और हिरन भी काफी दिमागी कसरत कर चुके हैं। उनको थोड़ा आराम चाहिए, इसलिए वो अपने ठिकानों के लिए एक दूसरे से विदा लेते हैं।

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-2ः भट्टी पर खाली बर्तन चढ़ाकर छोंक लगा रहे बड़े महाराज

यह भी पढ़ें-  कबीले में चुनाव-3ः बड़बोले महाराज ने बगावत नहीं, सियासत की है

खरगोश ने पूछा, तुम अग्नि परीक्षा का अर्थ क्यों पूछ रहे हो।

हिरन ने कहा, मैं सियासत में अग्नि परीक्षा के मायने जानना चाहता हूं।

खरगोश ने पूछा, पर तुम सियासी लोगों और सियासत की अग्नि परीक्षा के बारे में क्यों जानना चाहते हो। क्या कोई सियासी घटना हुई है, जिसमें किसी सियासी शख्सियत को इस दौर से गुजरना पड़ रहा है। पर, जहां तक मुझे मालूम है, कबीले की सियासत में कोई अग्नि परीक्षा का सामना नहीं कर रहा।

हिरन बोला, मैंने सुना है, बड़े महाराज को उनके ही गुट में घेर लिया गया है। कबीले में चुनाव के बाद यदि उनका गुट विजय प्राप्त करता है तो उनको राज गद्दी तक पहुंचने के लिए जिस परीक्षा को देना होगा, उसकी तुलना अग्नि परीक्षा से की जा रही है।

खरगोश ने कहा, फुंकनी यंत्र ही कुछ समझाएगा, वही बड़े महाराज के मौन को मन लगाकर समझता है।

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-4ः बड़े महाराज की भट्टी पर पानी फेंक गए बड़कू महाराज

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-5ः देवता के यहां भी सियासत कर आए अक्कड़ महाराज

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-6: गुणी महाराज के सियासी गुण दिखने लगे

फुंकनी यंत्र, क्या तुम हमारा वार्तालाप सुन रहे हो। क्या तुम्हारे पास कबीले की सियासत का भूत, भविष्य और वर्तमान है। क्या यहां कभी अग्नि परीक्षा हुई थी, क्या कभी किसी को इस दौर से गुजरना होगा, क्या वर्तमान में ऐसा हो रहा है, खरगोश ने पूछा।

फुंकनी यंत्र बोला, अग्नि परीक्षा का अर्थ अग्नि में कूदना या उसमें फंसना नहीं, बल्कि उस पर पार पाना है। अतीत में अग्नि परीक्षा देने वाले सफलता को प्राप्त हुए, क्योंकि वो अग्नि की तरह पावन, राग द्वेष से रहित थे। इसलिए उनको सदियां बीतने पर भी सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है। उनको जन्म जन्मांतर स्मरण किया जाता रहेगा।

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-7: मौन उपवास में भी जोर- जोर से बोल रहा है बड़े महाराज का मन

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव -8: सियासत में सब दिखावा, दिखावे से प्रभावित करने के प्रयास

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव -9: सवाल पर सवाल की सियासत

जहां तक तुम कबीले की राज गद्दी की अभिलाषा में लिप्त, आत्मकेंद्रित, तरह-तरह के प्रपंचों वाले प्रतिशोधियों की बात करते हो, तो इनमें से कोई भी अग्नि परीक्षा देने का पात्रता नहीं रखता। ये इसलिए भी पात्र नहीं हैं, क्योंकि इसमें ये सफलता के परिणाम को प्राप्त नहीं हो सकते। अग्नि परीक्षा ने सफलता को महत्व दिया है।

फुंकनी यंत्र बोला, मैं यह नहीं कहता, इनका किसी तपिश से संबंध नहीं है। इनको हमेशा झुलसे हुए अंगारों की तलाश रहती है। ये चिंगारियों को तब तक हवा देते हैं,जब तक कि उसमें किसी को झुलसाने, तपाने या जलाने की ताकत नहीं आ जाती। इस अनिष्ट में झुलसने वाले विरोधी हो या फिर इनकी बैसाखियां ही क्यों न हों।

यह भी पढ़ें-  कबीले में चुनाव-10ः बड़े महाराज की दो कदम आगे, एक कदम पीछे की सियासत

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-11: पहाड़ में राज दरबार के सियासी वादे का सच क्या है

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-12ः खुद के लिए मांगी मन्नतों को भूल रहे बड़े महाराज

खरगोश बोला, ये प्रतिशोधी कैसे हो सकते हैं, प्रतिशोध तो अतीत की घटनाओं से संबंध रखता है। कबीले की सियासत में अतीत से लेकर वर्तमान तक बहुत सारी घटनाएं हुई हैं। सियासत में दुश्मनी दोस्ती और दोस्ती दुश्मनी में बदलती रही है। यहां कल तक जो साथी थे, आज विरोधी हो गए हैं। जो विरोधी थे, वो साथी हो गए।

संबंधों में परस्पर बदलाव से बहुत सारी बातों के अर्थ भी बदल गए हैं। क्या प्रतिशोध की भावना स्नेह और सहयोग में नहीं बदली होगी।

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-13: बड़े महाराज ने इतना आशीर्वाद बांट दिया कि गुट ही बंटने लगा

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-14ः धुआं उगल रही है गीले कोयले से गरमाई सियासत

यह भी पढ़ें- कबीले में चुनाव-15ः न तो यहां कोई अभिमन्यु है और न ही चक्रव्यूह तो फिर शोर क्यों

फुंकनी यंत्र ने कहा, घटनाएं सदियों पुरानी हों या फिर कुछ वर्ष पहले की, इनमें प्रतिशोध राख में छिपे अंगारे की तरह होता है। यहां राख को खाक समझने वाले अंगारे की तपिश का अंदाजा नहीं लगा पाते। यही नासमझी उनको झुलसाती है, सताती है। यह सियासत है, यहां राख और खाक में मौजूद हर तत्व को समझने की आवश्यकता है।

फुंकनी यंत्र ने कहा, क्या तुमने शकुनि का नाम सुना है।

खरगोश ने कहा, नहीं… मैं नहीं जानता उनको। क्या यह कबीले की सियासत में कोई नया नाम है।

फुंकनी यंत्र बोला, नहीं… इस नाम का तो नहीं पर इनके जैसे काम करने वालों की यहां कमी नहीं है। शकुनि का मतलब छल, प्रपंच, षड्यंत्र, प्रतिशोध है।

हिरन बोला, बातों में उलझाओ मत। साफ-साफ समझाओ।

फुंकनी यंत्र ने कहा, तुम जैसे भोले जीव सियासत में इसलिए भी नहीं आते, क्योंकि वो उलझ जाते हैं। थोड़ा दिमाग तो लगाना पड़ेगा। प्रतिशोध और सियासत में इसलिए भी कोई खास अंतर नहीं है, क्योंकि ये दोनों ही दिमाग से काम लेने पर जोर देते हैं। यहां क्रिया, प्रतिक्रिया या निर्णय… हृदय एवं भावना के वशीभूत नहीं होते। प्रतिशोध के लिए दुश्मनी आवश्यक नहीं है, यह दोस्त बनकर भी लिया जा सकता है।

प्रतिशोध के वशीभूत शकुनि अपनी बहन गांधारी के पुत्र दुर्योधन व कौरवों के साथ दिखता तो है, पर वास्तव में उनके साथ नहीं होता। वह तो हितैषी बनकर हस्तिनापुर को तबाही की ओर ले जाता है। यह सियासत है, जो प्रपंच और षड्यंत्र के बिना पूरी नहीं होती।

हिरन ने कहा, बड़े महाराज के ही गुट के देव इंद्र महाराज ने घोषणा कर दी कि यह आवश्यक नहीं कि विजय मिलने पर बड़े महाराज को ही गद्दी सौंपी जाए। क्या इसका अर्थ यह समझूं, कि कर्म करने वाले को फल का अधिकार नहीं होना चाहिए।

अपने गुट को विजय दिलाने के लिए दिनरात परिश्रम करने वाले, पहाड़ से मैदान, मैदान से पहाड़ दौड़ने वाले, देवताओं के दरबार में बार-बार मत्था टेकने वाले, गुणी महाराज और उनके वजीरों से हमेशा घिरे रहने का कष्ट झेलने वाले, विरोधियों को भयभीत करने वाले बड़े महाराज को क्या मीठे फल चखने का भी अधिकार नहीं है।

खरगोश बोला, उनके गुट के लिए फल मीठे होंगे या कड़ुवे या फीके… यह अभी नहीं कहा जा सकता। किसको क्या फल खिलाने हैं, प्रजा ही निर्णय लेगी। पर, बड़े महाराज का सम्मान तो बनता है।

फुंकनी यंत्र ने कहा, किसको सम्मान मिलना चाहिए, किसको राज गद्दी पर बैठाना चाहिए… इसकी सलाह हम क्यों दें। उनके गुट वाले जाने, वो ही बेहतर जानेंगे।

हिरन बोला, देव इंद्र महाराज के बोल पर बड़े महाराज मौन क्यों हैं।

फुंकनी यंत्र ने कहा, वो जानते हैं मौन में शक्ति होती है। शक्ति का प्रयोग समय पर ही करना चाहिए। वैसे उनका मौन बहुत कुछ कहता है। वो शक्ति बटोर रहे हैं, ताकि सही समय पर सही उत्तर दिया जा सके।

अभी तक के लिए इतना ही… कल मिलते हैं।

खऱगोश और हिरन भी काफी दिमागी कसरत कर चुके हैं। उनको थोड़ा आराम चाहिए, इसलिए वो अपने ठिकानों के लिए एक दूसरे से विदा लेते हैं।

*यह कहानी काल्पनिक है। इसका किसी से कोई संबंध नहीं है।

You Might Also Like

हरीश रावत बोले, एग्जिट पोल पर शंका नहीं कर रहा, पर जनता परिवर्तन के पक्ष में
कभी झूठ नहीं बोलने वाले की परीक्षा
जब बैर तोड़ने के लिए भरी दोपहरी में करते थे पदयात्रा
राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ विजेताओं को भी सीधी भर्ती के पदों पर मिलेगा चार प्रतिशत आरक्षण
द्वितीय विश्व युद्ध तक जाती हैं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की जड़ें
TAGGED:Election in JungleJungle JourneyJungle NamaJungle storyJungle talePolitics in Jungle
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article सवाड़ चमोली में सैन्यधाम निर्माण के लिए शहीद सम्मान यात्रा शुरू
Next Article Video- बातें स्वरोजगार की: मुर्गी पालन में कमाल कर दिया बीटेक पास उत्तराखंड के इस युवा ने
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?