राजेश पांडेय हितेश नेगी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स में पोस्टग्रेजुएट हैं। कृषि और पशुपालन को आर्थिकी का प्रमुख स्रोत मानने वाले हितेश कहते हैं, किसान और गाय का चोली दामन…
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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।
राजेश पांडेय खरगोश फुंकनी यंत्र के साथ मैदान में पहुंचा और हिरन को देखते हुए बोला, बालक महाराज की नींद टूट गई और बड़े महाराज को घेरने के लिए बिछाए…
Read More »राजेश पांडेय खरगोश की तबीयत थोड़ी नासाज है। वो बार-बार उल्टी कर रहा है। बहुत परेशान और बेचैन लग रहा है। हिरन ने पूछा, दोस्त क्या, कुछ उल्टा सीधा खा…
Read More »राजेश पांडेय ”उत्तराखंड में डेयरी फार्मिंग की बहुत संभावनाएं हैं। हमने कोविड-19 के दौरान विदेश से वापस लौटे 20 युवाओं को डेयरी सेक्टर में काम शुरू करने में सहयोग किया।…
Read More »राजेश पांडेय खरगोश और हिरन की यह मुलाकात कुछ अलग तरह की है। वो अब एक जगह खड़े होकर बातें नहीं कर रहे हैं, वो चलते हुए सियासत के हाल…
Read More »राजेश पांडेय उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्र में कृषि जोत छोटी व बिखरी होने के कारण खेतीबाड़ी बहुत चुनौतीपूर्ण है। आजीविका का प्रमुख विकल्प कृषि है, इसलिए कम जमीन पर खेती…
Read More »राजेश पांडेय सियासी,सियासी हो चुका हिरन इस बार फिर हांफता हुआ खरगोश के पास पहुंचा। आते ही बोला, खरगोश जी, खरगोश जी…। खरगोश ने कहा, भाई पहले ढंग से सांसें…
Read More »राजेश पांडेय हिरन लंबी लंबी छलांगें लगाता हुआ खरगोश की तरफ आ रहा है। पहले कभी खरगोश ने हिरन को इतनी तेजी से अपने पास आता हुआ नहीं देखा था।…
Read More »राजेश पांडेय आज बहुत गर्मी हो रही है, घास चरने में व्यस्त खरगोश ने हिरन से कहा। हिरन बोला, सर्दियों के मौसम में तुम्हें गर्मी लग रही है। तुम्हें तो…
Read More »राजेश पांडेय खरगोश ने फुंकनी यंत्र को मैदान में रखा और घास चरते हुए काफी आगे निकल गया। कुछ देर बाद हिरन भी उसके पास पहुंच गया। हिरन ने कहा, दोस्त…
Read More »राजेश पांडेय मैदान की हरी घास चरने का आनंद उठा रहे खरगोश ने हिरन से कहा, बहुत दिन से हम सियासत पर नजर रख रहे हैं। इससे हमें क्या फायदा…
Read More »राजेश पांडेय आज बुधवार, तारीख 10 नवंबर, 2021 की दोपहर सौंग नदी के किनारे पूजा पंडालों कीे सजावट जोरों पर थी। मुझे बताया गया कि शाम करीब साढ़े तीन बजे…
Read More »राजेश पांडेय सौंगनदी के किनारे बसी केशवपुरी में छठ पूजा के लिए रेत, मिट्टी, पत्थरों से घाट बनाए जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक अपने-अपने घाटों की सजावट…
Read More »राजेश पांडेय खरगोश और हिरन मैदान में बैठे धूप सेंक रहे हैं। हिरन ने पूछा, दोस्त क्या तुम पहाड़ों की सैर पर चलोगे। खरगोश ने कहा, मुझे तो पहाड़ बहुत…
Read More »राजेश पांडेय कबीले के चुनाव पर पूरी नजर रखने वाले खरगोश और हिरन भी थोड़ा सा सियासी हो गए। सुबह-सुबह घास से भरे मैदान में खरगोश हिरन का इंतजार कर…
Read More »खरगोश अपने फुंकनी यंत्र के साथ घास के हरे मैदान में कभी इधर तो कभी उधर उछलकूद कर रहा था। लगता है खरगोश बेचैन है। वो बड़ी बेसब्री से हिरन…
Read More »राजेश पांडेय हिरन और खरगोश की आठवें दिन की मुलाकात में खरगोश ने फुंकनी यंत्र से कहा, आज तुम कुछ नहीं बोल रहे। फुंकनी यंत्र ने कहा, आज मैं बोलूंगा…
Read More »राजेश पांडेय सातवें दिन खरगोश और हिरन की मुलाकात हुई। पर, काफी कोशिश के बाद भी फुंकनी यंत्र ने, न तो कोई चलचित्र दिखाया और न ही कोई ध्वनि निकाली।…
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