AIIMS Rishikesh Study: सोशल मीडिया की चमक के पीछे गहराता मानसिक संकट

Rajesh Pandey
छात्रों के साथ एक सेशन में डॉ. संतोष। फाइल फोटो

AIIMS Rishikesh Study: ऋषिकेश, 21 मार्च. 2026ः प्रतिस्पर्धा, असुरक्षा की भावना और सोशल मीडिया के दबाव से युवा गहरे मानसिक संकट के दौर में नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि मेडिकल इंजीनियरिंग जैसे शीर्ष संस्थानों में अध्ययनरत छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि अब जरूरत है कि युवाओं की सफलता को केवल अंकों और उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से भी आंका जाए।

यह जानकारी एम्स ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल के शोध में सामने आई है। सोशल आउटरीच सेल के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संतोष के नेतृत्व में युवा जोश कार्यक्रम के अंतर्गत सात हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को जागरूकता अभियान से जोड़ा जा चुका है।

AIIMS Rishikesh Study: डॉ. संतोष ने बताया कि सोशल मीडिया युवाओं में मानसिक संकट संबंधी चिंताओं को और अधिक व्यापक बना रहा है। आभासी दुनिया में सफलता की चमक-दमक और आपसी तुलना की दौड़ ने युवाओं के भीतर हीनभावना, असुरक्षा और तनाव को जन्म दिया है।

वहीं, मानसिक दबाव से निपटने के प्रभावी तरीकों (कोपिंग मैकेनिज्म) की कमी इस स्थिति को और गंभीर बना रही है। डॉ. संतोष ने बताया कि जब भी वह किसी शिविर या अन्य कार्यक्रम में जाते हैं तो वहां अधिकतर युवा करियर की चिंता, पारिवारिक अपेक्षाएं, प्रेम प्रसंग आदि के चलते मानसिक तनाव या अवसाद में मिले।

AIIMS Rishikesh Study: डॉ. संतोष ने बताया की युवाओं के बीच शोध में स्पष्ट हुआ है कि देश के विश्वविद्यालय के छात्रों में अवसाद की दर 25 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

वहीं केंद्र सरकार के आंकड़ों (युवा मंत्रालय) के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के बीच आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम जैसे शीर्ष संस्थानों में 60 छात्रों ने आत्महत्या की। एम्स और अन्य मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों व रेजिडेंट्स के बीच यह आंकड़ा 120 तक पहुंच गया है।

डॉ. संतोष कहते हैं,  जब तक शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक अपेक्षाएं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता में संतुलन नहीं बनाया जाएगा, तब तक यह संकट और गहराता जाएगा।

युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य: एक नजर में (आंकड़े 2018-2023)

श्रेणी / संस्थानप्रमुख आंकड़े (डेटा)मुख्य विवरण
विश्वविद्यालय के छात्र25%देश के विश्वविद्यालयों में अवसाद (Depression) की दर।
शीर्ष तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थान (IIT, NIT, IIM)60 छात्रवर्ष 2018 से 2023 के बीच हुई आत्महत्याएं।
मेडिकल संस्थान (AIIMS एवं अन्य मेडिकल कॉलेज)120 डॉक्टर्स व रेजिडेंट्सकार्य के दबाव और तनाव के चलते जान गंवाने वालों का आंकड़ा।
प्रमुख कारणप्रतिस्पर्धा, असुरक्षा, सोशल मीडिया का दबाव, और पारिवारिक अपेक्षाएं।

25 मार्च को एम्स में जुटेंगे प्रदेश भर के मेडिकल छात्र

एम्स में युवा जोश पहल के तहत ‘नेशनल यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन SEBI and AMFI के संयुक्त संयोजन से किया जाएगा। 25 मार्च को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के मेडिकल छात्र शामिल होंगे। डॉ. संतोष ने बताया कि एम्स के सोशल आउटरीच सेल की ओर से आयोजित इस एकदिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में बढ़ती मानसिक और वित्तीय चुनौतियों का समाधान तलाशना है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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