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Video- केशवपुरी में छठ पूजाः आस्था, उल्लास और परंपरा के साथ ईश्वर का आभार

सौंगनदी के किनारे बसी केशवपुरी में छठ पूजा के लिए रेत, मिट्टी, पत्थरों से घाट बनाए जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक अपने-अपने घाटों की सजावट कर रहे हैं। बहुत रौनक है, चहल-पहल है। नदी को पार करने के लिए फट्टियों को जोड़कर पुल बना दिया गया है। दूर-दूर तक अस्थाई घाट दिखाई दे रहे हैं, जो छठ माता की पूजा के लिए बनाए जा रहे हैं। इन घाटों पर व्रती महिलाएं सूर्यदेव को अर्घ्य देंगी।

”छठ मैया सबका भला करती हैं, पूजा अर्चना और उनके व्रत से घर-परिवार में खुशहाली आती है। जीवन दीर्घायु होता है। जितना संभव हो सकता है, माता के समक्ष अर्पित करते हैं। ईख, अनार, सेब, केला, पपीता, चकोतरा, हल्दी, पत्तियों सहित अदरक सहित जितने भी प्रकार के फल, सब्जियां, पकवान…, जो भी संभव हो सकें, पूजा में शामिल करते हैं” कला देवी कहती हैं।

कला देवी ने केशवपुरी चौक पर सब्जियों एवं फलों की ठेली लगाई है। उन्होंने भी छठ पूजा का व्रत रखा है। पूजा का महत्व बताते हुए वो बहुत प्रसन्न हैं।

केशवपुरी बस्ती में पहुंचा और अपने मित्र विकास, जो कक्षा 9 के छात्र हैं, को फोन किया। मैंने उनसे पूछा कहा हो। उन्होंने बताया, मैं सौंग नदी पर हूं, घाट बना रहा हूं। आप भी आ जाओ। कुछ देर में केशवपुरी पहुंच गया।

केशवपुरी का चौक फलों और सब्जियों की ठेलियों से भरा है। ईख की दुकान लगी है। सभी बहुत उत्साह में हैं। मुझे रोज की तरह वहां बच्चे बहुत कम दिखाई दिए। दोपहर का समय है। बच्चे यहीं कहीं होंगे। मेरी मुलाकात विकास के भाई करण से हुई।

हम केशवपुरी की तंग गलियों से होते हुए सौंगनदी की ओर बढ़ रहे हैं। गली में चूना छिड़काव किया गया है। रास्ते में डीजे पर गाने सुनाई दे रहे हैं। यहां पूरा महसूस हो रहा है कि महोत्सव की तैयारियों जोरों पर हैं। गली में जानने वाले बच्चे मिल गए। उन्होंने मुझसे कहा, नदी में घाट बना रहे हैं, चलो आपको दिखाते हैं।

बस्ती की गलियां खत्म होते ही सौंग नदी किनारे पहुंच जाते हैं। वहां मेरे मुंह से अनायास ही निकला, वाह…। यहां तो मेला लगा है। खाने पीने के स्टॉल लगे हैं। जगह-जगह पंडाल सजे हैं। बच्चे नदी में गोते लगा रहे हैं। नदी के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पूजा के लिए घाट बनाए जा रहे हैं।

सौंग नदी के किनारे पुष्पेंद्र कुमार ने पटाखों की दुकान सजाई है। उन्हें उम्मीद है कि शाम तक सारे पटाखे बिक जाएंगे। यहां जमकर आतिशबाजी होगी। आप यहीं रुकोगे तो आतिशबाजी का शानदार नजारा देखोगे।

हम लकड़ियों की फट्टियों का अस्थाई पुल पार करके दूसरे किनारे पर पहुंच गए। इस पुल पर खड़े होकर छोटे बच्चे नदी में कूद लगा रहे थे। बच्चे फुल मस्ती में हैं और अपने -अपने घाटों पर भी ध्यान दे रहे हैं।

पिंकी, अनीशा, नेहा, मनीषा, समीर, संजीत, विकास, पवन ये सभी बच्चे घाटों पर लिपाई कर रहे हैं।वो चाहते हैं कि उनके घाट सबसे सुंदर दिखे। घाटों को चमकीली पन्नियों से, गुब्बारों, बंदनबार से सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

बताया गया कि सभी लोगों ने थोड़े-थोड़े पैसे इकट्ठे करके डीजे का इंतजाम किया है। पुल भी सभी ने मिलकर बनाया है। वैसे तो दिवाली के छह दिन मनाए जाने वाले छठ पर्व की देश दुनिया में धूम रहती है, पर केशवपुरी में सभी के साथ पर्व में शामिल होना, मुझे गौरवान्वित करता है।

वरिष्ठ पत्रकार गौरव मिश्रा बताते हैं कि भगवान सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए व्रती महिलाएं उन्हें अर्घ्य देती हैं। आज शाम को अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। कल सुबह उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य प्रदान करके महिलाएं उपवास को पूरा करेंगे। महिलाएं निर्जला रहकर व्रत करती हैं।

”यह समताभाव एवं समरसता का पर्व है। इस पर्व के आर्थिक एवं सामाजिक पक्ष भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार इन दिनों सूर्य की ऊर्जा में क्षय होता है। सामान्य भाषा में कहें तो ये दिन सूर्य पर संकट जैसे हैं। ऐसे समय में सूर्य की पूजा अर्चना, उनको अर्घ्य प्रदान करने का अर्थ है, जीवन प्रदान करने के लिए उनका आभार व्यक्त करना तथा उनके साथ खड़े होना है।” गौरव मिश्रा कहते हैं।

केशवपुरी में घरों को सजाया गया है। घरों में पकवान बनाए जा रहे हैं। अनिल साहनी घर पर बांस को छीलकर आकर्षक टोकरी बना रहे हैं। इस टोकरी में प्रसाद, फल एवं पकवान घाट पर ले जाकर पूजा करेंगे।

घर में पकवान बना रहीं धर्मशीला ने छठ पूजा का व्रत रखा है। अपनी बहन रिंकू देवी के साथ घर पर पकवान बना रही हैं। बताती हैं कि घर परिवार की सुख शांति की कामना के लिए छठ माता की पूजा की जाती है। पूजा के लिए पकवान में खीर, ठेकुआ, चावल के लडुआ बनाए जा रहे हैं।

ठेकुआ में गेहूं का आटा, घी, सूखे नारियल का बूरा, गुड़, इलायची, वनस्पति तेल, मेवे- छुआरा, मुनक्का आदि प्रयोग किए जाते हैं। रिंकू देवी बताती हैं कि कल मंगलवार को उपवास शुरू किया था। आज भी उपवास है, कल सुबह अर्घ्य देकर उपवास पूरा होगा।  यह निर्जला उपवास है।

लक्ष्मी साहनी घर में पकवान बनाने में मदद करते हैं। बताते हैं कि छठ पूजा की तैयारियों में परिवार को सहयोग करते हैं। छठ पूजा पर विवाहित पुरुष भी उपवास रखते हैं।

केशवपुरी निवासी ललिता देवी कहती हैं कि परिवार की खुशहाली, सुख शांति के लिए उपवास रखा है। घर में पकवान बनता है, जितना जुटता है उतना करते हैं।

… जारी

 

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Working Experience –25 Years of experience in Mass Media and content writing in Hindi.     Literary work- Two books in Hindi. One of them is Jungle mei Tak Dhinaa Dhin, which is a compilation  of 18 stories based on wildlife. Another one is Zindagi ka Tak Dhinaa Dhin. This book is with 7 Stories. These Stories presents the Human lifestyle and the entire system, where we live. Both books are copyright from copyright office Government of India. I am also working on the other two books and short stories. Blog writing and real-time coverage is my passion.    Initiative- Initiate a storytelling platform Tak Dhinaa Dhin. We are working in slums and Government schools. Our aim is to motivate children to write stories. We believe that imagination is must to reach near reality. We are motivating children on our digital platform also. Dugdugi is an other initiative for Creative Kids and Youth. Conducting a pathshaala for Slum's Children. Qualification- B.Sc. (Physics, Chemistry, Math), Bachlor of Journalism and LLB  Core competence- Content writing, Reporting and Editing.

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