कुछ दिन पहले मैंने एक गलती कर दी, वो यह कि एक बाइक सवार को यह सलाह दे डाली कि भाई, थोड़ा धीरे चल लो। सड़क पर और भी लोग…
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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।
देहरादून जाते वक्त रास्ते में पड़ने वाले हर गांव में रावण के पुतले फूंकने के इंतजार में खड़े नजर आए। इनको बच्चों ने बड़ों की मदद से तैयार कराया होगा।…
Read More »जब मैं छठीं क्लास में था, तब मेरे घर पर बिजली का कनेक्शन लगा था। मुझे अच्छी तरह याद है कि घर पर बल्ब जलने की खुशी में मां ने मोहल्ले…
Read More »जो यह कहते हैं कि ईश्वर हर जीव में विराजमान हैं, शायद वो मुझे भूल गए। मैं धरती पर जन्में हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े जीव में…
Read More »बात डेढ़ साल पुरानी है, लेकिन आज भी ऐसा ही हाल है। 2 दिसम्बर,2015 को देहरादून के रिस्पना से प्रिंस चौक के बीच सिटी बस में दस साल का एक बच्चा भी…
Read More »आज जो सुर्खियों में हैं, वो मैं नहीं हूं। मेरी दशा कहां बदली, मैं तो आज भी वहीं हूं, जहां पहले था। मुझ पर लगा ठप्पा हटाने की तुम्हारी हिम्मत…
Read More »कहते हैं कि मां का दिल बहुत बड़ा होता है और वो अपने बच्चों के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर देती है। अगर यह बात सही है तो मां,…
Read More »आप पहाड़ के गांवो को छोड़कर देहरादून में आकर सियासत करो, तो यह तरक्की है। जब मैं अपनी जिंदगी संवारने के लिए घरबार छोड़ने को मजबूर हो जाऊं, तो यह…
Read More »राजेश पांडेय लोग कहते हैं कि मैं जिंदगी बर्बाद करती हूं, क्या तुमने उन लोगों के बारे में जानने की कोशिश की है, जिनको मैंने आबाद कर दिया। वो मेरे…
Read More »जब तक मैं हूं, इंसान तो क्या जानवर भी अपने होने का अहसास कराता है। जिस दिन, मैं टूट गई, कई लोगों की जिंदगी रूठ जाएगी, क्योंकि मैं जानती हूं…
Read More »मैंने तो सुना था कि सरकार को कुछ करना हो तो निर्णय लेने की भी जरूरत नहीं होती और न ही ढोल बजाने की, काम होते ही दिखने लगता है। मैं…
Read More »इनके पास न आर्थिक और न ही सामाजिक सुरक्षा बेखटक जीने के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन लोगों के लिए क्या कहेंगे, जिनके पास पैसा भी नहीं…
Read More »मैं देवलोक में था और देवताओं के खिलाफ संग्राम करते-करते थक गया तो सीधे धरती पर चला आया। यहां अब मेरा राज है और मैंने इंसान को खरीद लिया है।अभी…
Read More »मैं उस गरीब जनता की नब्ज हूं, जिसको टटोले बिना किसी की दाल नहीं गलती। मुझे हर बार मुद्दा बनाकर फिर से कष्टों के भंवर में गोते लगाने के लिए…
Read More »गाय एक मां कश्मीर से लेकर केरल तक तुम मेरे नाम का हल्ला मचा रहे हो। तुम मेरे नाम पर अपनी रोटियां सेंक रहे हो। कोई सरेआम कभी मेरा तो…
Read More »सुसुवा एक नदी मैं वेंटीलेटर पर हूं और अजीब सी तड़पन के साथ सांसें गिन रही हूं। लेकिन विश्वास दिलाती हूं कि मैं मरूंगी नहीं। भले ही मुझ पर कितने ही तरह के कैंसर अटैक…
Read More »अखबार समाज का आइना बनकर पाठकों को वह सब जानकारी और सूचनाएं पहुंचाता है, जो उनके लिए जरूरी होती हैं। सामाजिक बुराइयों को प्रश्रय देने वाले चेहरों को सामने लाकर…
Read More »मैं कई बार सोचता था कि खुद के जीवन में भी क्रिया प्रतिक्रिया संबंधी न्यूटन के गति के तीसरे नियम को लागू करूं। लेकिन ऐसा कोई मौका नहीं मिला, जो मुझे…
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