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इसकी स्याही मेरी स्याही से गाढ़ी कैसे
बचपन की बातें: ये दाग अच्छे हैं इसकी…
पत्रकारिता को जानना है तो छोटे शहरों से शुरुआत करो
मैं ऋषिकेश ऑफिस में बतौर ट्रेनी फिर से…
मुझे मिट्टी में रंग दिखते हैं…
मिट्टी और गोमूत्र से कमाल की चित्रकारी करते…
चिट्ठी ने अपना काम कर दिखाया और श्रेय कोई और लेने लगे
मैं सकुशल अपने घर पर था और बेरोजगार…
अपनी तनख्वाह बढ़वाने के लिए दूसरों का पैसा रुकवाने पर पूरा जोर
देहरादून में कुछ दिन बिताने के बाद मुझे…
इनकी सुनते रहो, काम करते रहो, पैसे की बात मत करना
अपने नंबर बढ़ाने के लिए दूसरों को दिक्कतों…
यह बच्चा तो बातों की ‘खिचड़ी’ बनाने में माहिर है
बचपन की बातें पिछली बार, जो बचपन की…
अखबारों में युवाओं से पहाड़ तुड़वाने वाले, उनकी दिक्कतों पर हो जाते मौन
आपको बता रहा था कि अप्रैल 1999 की…
अखबार में कोई किसी का नहीं होता, मत करो किसी की परिक्रमा
अखबार में काम करने के शुरुआती वर्षों में,…
अखबारों में खबरों का संपादन और रिपोर्टिंग
अखबारों की बात हो रही है तो संपादन…
हथेली पर आम उगाने की मशीन नहीं है रिपोर्टर
आप रिपोर्टर हैं सुपरमैन नहीं। पर, संपादक से…
अखबार के लिए महत्वपूर्ण होती है डेस्क और रिपोर्टर्स में खींचतान
अखबारों में डेस्क और रिपोर्टिंग वालों के बीच…
पत्रकारिता तो अनुभवों से आती है…
एक युवा बहुत सारे सपने लेकर पत्रकारिता में…
पत्रकारिता न तो परिक्रमा है और न ही इसका कोई दायरा है
आज चार साल बाद भी कुछ लोग मुझसे…
Hydroponics से रोजगार को समझना है तो गणेश बिष्ट से मिलिए
भानियावाला से ऋषिकेश या हरिद्वार की ओर बढ़ने…
मेरा कमरा, मुझे अपनी किसी दीवार पर जगह देगा, इसका पूरा विश्वास है
राजेश पांडेय कमरा निर्जीव है और मैं सजीव,…
जर्नलिज्म का रियल टाइम-2
1997 में मेरठ वाले अखबार देहरादून से प्रकाशित…
जर्नलिज्म का रियल टाइम-1
टेक्नोलॉजी के बिना जर्नलिज्म नहीं हो सकती। टेक्नोल़ॉजी…



