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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

Latest Blog Live News

इनकी सुनते रहो, काम करते रहो, पैसे की बात मत करना 

अपने नंबर बढ़ाने के लिए दूसरों को दिक्कतों…

यह बच्चा तो बातों की ‘खिचड़ी’ बनाने में माहिर है  

बचपन की बातें पिछली बार, जो बचपन की…

अखबार में कोई किसी का नहीं होता, मत करो किसी की परिक्रमा

अखबार में काम करने के शुरुआती वर्षों में,…

अखबारों में खबरों का संपादन और रिपोर्टिंग

अखबारों की बात हो रही है तो संपादन…

हथेली पर आम उगाने की मशीन नहीं है रिपोर्टर

आप रिपोर्टर हैं सुपरमैन नहीं। पर, संपादक से…

पत्रकारिता तो अनुभवों से आती है…

एक युवा बहुत सारे सपने लेकर पत्रकारिता में…

Hydroponics से रोजगार को समझना है तो गणेश बिष्ट से मिलिए

भानियावाला से ऋषिकेश या हरिद्वार की ओर बढ़ने…

जर्नलिज्म का रियल टाइम-2

1997 में मेरठ वाले अखबार देहरादून से प्रकाशित…

जर्नलिज्म का रियल टाइम-1

टेक्नोलॉजी के बिना जर्नलिज्म नहीं हो सकती। टेक्नोल़ॉजी…

गन्ने से सुनिये, जिंदगी की कहानी

लगभग निर्जीव हो चुका हूं। अब तो शरीर…

गेहूं की आत्मकथा

उस रात, मैं धरती से बाहर आया था।…

अपशब्दों में भी होती है भला करने वाली ताकत

शब्दों में गजब की ताकत है, भले ही…