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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

Latest Blog Live News

सौ दिन में भी नारे ही लगा रही सरकार….

मैंने तो सुना था कि सरकार को कुछ…

ये जिंदगी कब होगी आसान

इनके पास न आर्थिक और न ही सामाजिक…

मैंने इंसान खरीद डाले….

मैं देवलोक में था और देवताओं के खिलाफ…

एक अस्पतालः फरेब के वेंटीलेटर पर

मैं उस गरीब जनता की नब्ज हूं, जिसको…

अब मुझे मां कहलाने पर दुख होता है

गाय एक मां कश्मीर से लेकर केरल तक…

…ऐसे तो मेरा जेंडर बदल जाएगा

सुसुवा एक नदी मैं वेंटीलेटर पर हूं और अजीब सी…

सामाजिक सरोकारों वाले अखबारों में यह किनका विज्ञापन है

अखबार समाज का आइना बनकर पाठकों को वह…

भला हो उनका, जिन्होंने मुझे गुस्सा दिलाया

मैं कई बार सोचता था कि खुद के…

Public transport in Uttarakhand Part-2

उत्तराखंड में हर साल 24 अरब की नई बाइक-कारें…