भला हो उनका, जिन्होंने मुझे गुस्सा दिलाया

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मैं कई बार सोचता था कि खुद के जीवन में भी क्रिया प्रतिक्रिया संबंधी न्यूटन के गति के तीसरे नियम को लागू करूं। लेकिन ऐसा कोई मौका नहीं मिला, जो मुझे भीतर तक झकझोर दे । मैं उन लोगों को धन्यवाद करना चाहू्ंगा, जो मेरे भीतर ऐसा गुस्सा पनपाने में कामयाब हुए और मुझे जीने के लिए कुछ सोचने और करने का मौका दे दिया। उल्टे सीधे कमेंट करके मेरे गुस्से को भड़काने का काम करने वाले नहीं जानते कि उन्होंने मेरा कितना बड़ा फायदा कर दिया। खैर ईश्वर इन लोगों का भला करे।

 न्यूटन का गति का तीसरा नियम – For every action, there is an equal and opposite reaction. जहां तक मैं इसका अर्थ जान रहा हूं कि किसी वस्तु पर लगाए गए बल की विपरीत दिशा में भी वस्तु की ओर से प्रतिक्रिया स्वरूप समान बल लगता है। अगर आप किसी दीवार पर धक्का लगा रहे हैं तो वो दीवार भी समान बल से आपकी ओर प्रतिक्रिया कर रही है। यहां दीवार, कुर्सी, मेज कुछ भी हो सकता है।

इस नियम को अपने जीवन में कैसे उतारें ? अपना गुस्सा कैसे कम करें और किसी की क्रिया पर अपने क्रोध या आवेश रूपी प्रतिक्रिया का सकारात्मक इस्तेमाल कैसे करें? जिससे हमारा अपना भला हो, न कि नुकसान। आपको बार बार कुछ गलत करने के लिए उत्तेजित करने का भाव पालने वाला व्यक्ति आपकी प्रतिक्रिया से या तो लज्जित हो जाए या फिर आपका कुछ गलत करने का विचार ही मन में न ला पाए। इन सभी सवालों के जवाब भी आपके सामने रखूंगा और इससे होने वाले कुछ फायदे भी आपको गिनाऊंगा।

मेरा सबसे बड़ा दोष गुस्सा लगातार मेरा नुकसान कर रहा था। इससे दूर रहने के कई उपाय इधर उधर से सुनने पढ़ने को मिलते। कोई मुझसे कहता कि शांत रहना सीखो। किसी प्रतिक्रिया से पहले सोचो कि तुम जो करने वाले हो, यह तुम्हारे परिवार और खुद तुम्हारे लिए कितनी सही या गलत है। आपको अपने अच्छे बुरे का आकलन तो करना ही होगा।

वहीं  मैं कुछ लोगों के कमेंट और बुरे बर्ताव से मानसिक रूप से परेशान था। इन लोगों को देखने मात्र से ही मुझमें  गुस्सा भर आता और इनके व्यवहार से होने वाली परेशानी मेरे दिलोदिमाग पर अपना असर दिखाने लगती। रोजाना मैं कुछ सोचता और फिर प्रतिक्रिया देने से बचता रहा, लेकिन गुस्सा खत्म नहीं हुआ। यह मेरे साथ घर तक पहुंचने लगा और हालात यह हो गए बच्चे मुझसे बात करने से भी कतराने लगे, वह यह अंदाजा लगाने में असमंजस हो गए कि मुझे कब और उनकी किस बात से गुस्सा आ जाएगा। मैं कुछ दिन छुट्टी पर आ गया, लेकिन हालात नहीं सुधरे। मेरा मानसिक असंतोष बढ़ता जा रहा था।

एक दिन मैंने सोचा कि गुस्से से भी शरीर में ऊर्जा पैदा होती है, लेकिन इसको नकारात्मक ऊर्जा कहते हैं। शक्ति इसमें भी है और इसने अपने प्रभाव से कई लोगों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। क्या हम इसको सकारात्मक बना सकते हैं, केवल दिशा ही तो बदलनी है। मैं क्यों न इसके दूसरे पहलू पर काम करूं, जो मेरे और परिवार के लिए कुछ राहत बनकर सामने आ सके।

ऐसा नहीं कि मेरे भीतर गुस्सा खत्म हो गया, यह अब भी बरकरार है, लेकिन अब यह मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता , क्योंकि मैंने इसकी दिशा बदल दी है। अब मैं इस गुस्से वाली एनर्जी से प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि खुद को साबित करने पर तुल जाता हूं। मेरे भीतर गुस्से से जितनी ज्यादा एनर्जी पैदा होती है, उतनी ही ताकत से मैं अपने उस मिशन पर काम करता हूं, जो मुझे भविष्य में राहत देगा। यानी जितना गुस्सा, उतनी ही ताकत और लगन के साथ अपने लिए कुछ करना का जज्बा पलता है मेरे भीतर। नेगैटिव से पॉजीटिव में चेंज होने वाली यह एनर्जी मुझे सोने नहीं देती और कुछ ऐसा करने के लिए प्रेरित करती है, जो मुझे एक दिन सम्मान का हकदार बनाएगा। इसने मेरे भीतर पलने वाली हीन भावना को बाहर निकाल फेंका है, जो वर्षों से तरक्की के पायदान पर चढ़ते लोगों को देखकर मुझे पीछे धकिया रही थी।

मैं अब कुछ और बेहतर सोचने लगा हूं। मेरा डायबिटीज का लेवल बैलेंस हो रहा है और ब्लड प्रेशर अपनी हद में रहने लगा  है। मैं कुछ नया प्लान करने की स्थिति में हूं, क्योंकि मेरे जेहन में गुस्से से पैदा हो रही नेगैटिव  एनर्जी अपना पॉजीटिव रोल जो अदा कर रही है। मेरे भीतर एक आशा की किरण जाग्रत होने लगी है, जो लाख कष्टों में भी मुझे आगे बढ़ने से नहीं  रोक सकती। मैं अपनी इस नई और उत्साह, उल्लास पैदा करने वाली ताकत से अपने हक की लड़ाई को मर्यादित भाव में लड़ना सीख गया हूं। मेरे पास लंबी लकीर खींचने का साहस पैदा हो गया है।

मैं अपने अनुभवों के आधार पर कुछ लिख पढ़ रहा हूं। बच्चों को डिजीटल के बारे में कुछ नया सिखाने से पहले खुद सीख रहा हूं। खुद भी पढ़ रहा हूं और बच्चों को भी पढ़ा रहा हूं। अपने तकनीकी ज्ञान को और आगे ले जाने का प्रयास कर रहा हूं। भविष्य के लिए कुछ ऐसा प्लान ही नहीं कर रहा हूं ब्लकि उसे धरातल पर लाने की कोशिश भी जारी है, जो मुझे आखिरी सांस तक आत्मनिर्भर और स्वावभिमानी बनाकर रखेगा। अंत में एक बार फिर कहूंगा, गुस्से में बड़ी ताकत है , लेकिन इसकी दिशा बदलकर अपनी दशा को बदलना सीखना होगा।

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