हरीश रावत के ट्वीट ने खोला कांग्रेस में अंतर्कलह, लोग बोले- दूसरी पार्टी बना लो या ज्वाइन कर लो

Rajesh Pandey
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावतः फोटो हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट से
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोशल मीडिया पर संवाद तो करते हैं, पर सीधी बात करने से बच जाते हैं। वो बार-बार संदेश देते हैं कि कांग्रेस से आहत हैं, पर सीधे तौर पर नहीं बताते कि कांग्रेस में उनकी राह कौन रोक रहा है और क्यों उनको आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा है, जबकि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में हरीश रावत की सक्रियता सबसे ज्यादा दिखाई देती है।
रावत ट्वीट के माध्यम से अपनी बात रखते हैं और यूजर्स उनको अपनी पार्टी बनाने या फिर कोई और ज्वाइन करने की सलाह देते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री रावत का नया ट्वीट क्या है और इससे राजनीतिक मायने क्या हैं, इन पर बात करने से पहले यह जान लेते हैं कि रावत ने कुछ दिन पहले क्या कहा था, क्योंकि इन बातों का वर्तमान वक्तव्य से सीधा संबंध है।
रावत ने एक पोर्टल के सर्वे का हवाला देते हुए कहा था, मेरे मन में बड़ी हलचल है, एक तिहाई से ज्यादा लोगों की मुख्यमंत्री के रूप में पसंद बनना एक बड़ी सौगात है और ये सौगात उस समय और प्रखर हो जाती है जब इस पर पार्टी की शक्ति लगी हुई नहीं होती है। जिसके नेतृत्व को लेकर पार्टी में ही असमंजस हो उसको इतना आर्शीवाद मिलना जनता जनार्दन की कृपा है। उन्होंने कहा था, मैं अपने आपको एक साधनहीन, शक्तिहीन, समर्थनहीन कहूँगा क्योंकि शक्तिशाली लोगों का मेरे पास समर्थन हासिल नहीं है।

Contents
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोशल मीडिया पर संवाद तो करते हैं, पर सीधी बात करने से बच जाते हैं। वो बार-बार संदेश देते हैं कि कांग्रेस से आहत हैं, पर सीधे तौर पर नहीं बताते कि कांग्रेस में उनकी राह कौन रोक रहा है और क्यों उनको आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा है, जबकि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में हरीश रावत की सक्रियता सबसे ज्यादा दिखाई देती है।रावत ट्वीट के माध्यम से अपनी बात रखते हैं और यूजर्स उनको अपनी पार्टी बनाने या फिर कोई और ज्वाइन करने की सलाह देते हैं।पूर्व मुख्यमंत्री रावत का नया ट्वीट क्या है और इससे राजनीतिक मायने क्या हैं, इन पर बात करने से पहले यह जान लेते हैं कि रावत ने कुछ दिन पहले क्या कहा था, क्योंकि इन बातों का वर्तमान वक्तव्य से सीधा संबंध है।रावत ने एक पोर्टल के सर्वे का हवाला देते हुए कहा था, मेरे मन में बड़ी हलचल है, एक तिहाई से ज्यादा लोगों की मुख्यमंत्री के रूप में पसंद बनना एक बड़ी सौगात है और ये सौगात उस समय और प्रखर हो जाती है जब इस पर पार्टी की शक्ति लगी हुई नहीं होती है। जिसके नेतृत्व को लेकर पार्टी में ही असमंजस हो उसको इतना आर्शीवाद मिलना जनता जनार्दन की कृपा है। उन्होंने कहा था, मैं अपने आपको एक साधनहीन, शक्तिहीन, समर्थनहीन कहूँगा क्योंकि शक्तिशाली लोगों का मेरे पास समर्थन हासिल नहीं है।पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा था, मैं जानता हूँ, कुछ बड़ी शक्तियाँ किसी भी हालत में मुझे 2014 से 2016 की ओर 2017 के प्रारंभ तक की पुनरावृत्ति नहीं करने देंगे। मुझे मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए पूरी शक्तियाँ एकीकृत होकर काम करेंगी।रावत चुनाव को समुद्र बताते हुए एक और ट्वीट करते हैं- है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है,  सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!फिर लिखते हैं, फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है “न दैन्यं न पलायनम्” बड़ी उहापोह की स्थिति में हूंँ, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।“न दैन्यं न पलायनम्” श्री भगवद् गीता का श्लोक है, जिसका सामान्य रूप से हिन्दी अर्थ है- कोई दीनता नहीं चाहिए, चुनौतियों से भागना नहीं है, बल्कि जूझना जरूरी है।”पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने न दैन्यं न पलायनम् शीर्षक से कविता लिखी थी, जिसकी अंतिम पंक्तियों में लिखा है-आग्नेय परीक्षा की इस घड़ी में— आइए, अर्जुन की तरह उद्घोष करें: ‘‘न दैन्यं न पलायनम्।’’अब बात करते हैं, हरीश रावत के इन ट्वीट श्रृंख्ला पर यूजर्स क्या कह रहे हैं-एक यूजर ने लिखा- पार्टी बनाने,दूसरी में जाने की जगह संन्यास लीजिये। विश्राम करिए, हर दल के पहाड़ हितैषी के मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध रहिए। अब कोई कदम कद छोटा ही करेगा,शीर्ष की प्रतिष्ठा के साथ रहना अच्छा रहेगा।Aapko khud ki ek party banane cahiye sir. Uttrakhand aapke sath hai agr aap khud ki party banate ho to. (आपको खुद की एक पार्टी बनानी चाहिए सर। उत्तराखंड आपके साथ है, अगर आप खुद की पार्टी बनाते हो तो।)एक और यूजर लिखते हैं- आप यूकेडी से लड़ो, आपका मुख्यमंत्री बनना तय है।एक अन्य ने लिखा, बहुत हुआ रावत जी। आप एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ हैं और अपने फैसले लेने में सक्षम भी हैं.. अब आदेश नहीं आत्ममंथन कर अपनी सुनिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा था, मैं जानता हूँ, कुछ बड़ी शक्तियाँ किसी भी हालत में मुझे 2014 से 2016 की ओर 2017 के प्रारंभ तक की पुनरावृत्ति नहीं करने देंगे। मुझे मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए पूरी शक्तियाँ एकीकृत होकर काम करेंगी।
रावत चुनाव को समुद्र बताते हुए एक और ट्वीट करते हैं- है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है,  सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!

फिर लिखते हैं, फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है “न दैन्यं न पलायनम्” बड़ी उहापोह की स्थिति में हूंँ, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।
“न दैन्यं न पलायनम्” श्री भगवद् गीता का श्लोक है, जिसका सामान्य रूप से हिन्दी अर्थ है- कोई दीनता नहीं चाहिए, चुनौतियों से भागना नहीं है, बल्कि जूझना जरूरी है।”
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने न दैन्यं न पलायनम् शीर्षक से कविता लिखी थी, जिसकी अंतिम पंक्तियों में लिखा है-
आग्नेय परीक्षा की
इस घड़ी में—
आइए, अर्जुन की तरह
उद्घोष करें:
‘‘न दैन्यं न पलायनम्।’’
अब बात करते हैं, हरीश रावत के इन ट्वीट श्रृंख्ला पर यूजर्स क्या कह रहे हैं-
एक यूजर ने लिखा- पार्टी बनाने,दूसरी में जाने की जगह संन्यास लीजिये। विश्राम करिए, हर दल के पहाड़ हितैषी के मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध रहिए। अब कोई कदम कद छोटा ही करेगा,शीर्ष की प्रतिष्ठा के साथ रहना अच्छा रहेगा।

Aapko khud ki ek party banane cahiye sir. Uttrakhand aapke sath hai agr aap khud ki party banate ho to. (आपको खुद की एक पार्टी बनानी चाहिए सर। उत्तराखंड आपके साथ है, अगर आप खुद की पार्टी बनाते हो तो।)

एक और यूजर लिखते हैं- आप यूकेडी से लड़ो, आपका मुख्यमंत्री बनना तय है।

एक अन्य ने लिखा, बहुत हुआ रावत जी। आप एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ हैं और अपने फैसले लेने में सक्षम भी हैं.. अब आदेश नहीं आत्ममंथन कर अपनी सुनिए।

 

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *