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Uttarakhand Election: कोठियाल की खुली बहस की चुनौती पर हरीश रावत ने दिया यह जवाब

देहरादून। AAP (आम आदमी पार्टी) के नेता कर्नल अजय कोठियाल (Ajay Kothiyal) की मुफ्त बिजली के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) का जवाब आ गया। उन्होंने साफ-साफ कह दिया, मैं अपने आपको इतना योग्य नहीं समझता कि विद्वानजनों से बहस कर सकूं।
आप नेता कर्नल अजय कोठियाल ने प्रदेश के हर परिवार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की अपनी पार्टी (AAP) की घोषणा पर भाजपा और कांग्रेस को खुली बहस की चुनौती दी है। उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी जो घोषणा करती है, उसे पूरा भी करती है। दिल्ली में 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है।

आप नेता कर्नल कोठियाल की चुनौती पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जवाब दिया है, उन्होंने लिखा, कभी-कभी कुछ लोग चर्चा में आने के लिए मुझे बहस की चुनौती दे रहे हैं। मैं अपने आपको इतना योग्य नहीं समझता कि उन विद्वानजनों से बहस कर सकूँ।

रावत लिखते हैं, हाँ, मेरे ज्ञानवर्धन के लिए मैं उनसे इतना बताने का जरूर अनुरोध करना चाहता हूँ कि वो कैसे उत्तराखंड में, सत्ता में आते ही 300 यूनिट बिजली मुफ्त में दे देंगे! जबकि दिल्ली में साढे़ सात साल से ज्यादा समय तक सरकार में रहने के बाद भी उनकी सरकार 200 यूनिट तक ही बिजली मुफ्त दे रही है और उसके बाद यदि एक यूनिट भी बढ़ जा रहा है तो सारी बिजली का पैसा वसूल कर ले रहे हैं और देश में सबसे महंगी बिजली दे रहे हैं, इन सबके बावजूद इस समय दिल्ली की विद्युत वितरण कम्पनियों पर लाखों-करोड़ रुपया नेशनल ग्रिड कमाती है।
पूर्व सीएम रावत ने कहा, दिल्ली की बिजली इसलिए नहीं कट रही है, क्योंकि दिल्ली देश की राजधानी है और उत्तराखंड जैसा राज्य एक महीने भी बिजली का बिल अदा नहींं कर पाएगा तो सारी बिजली कट जाएगी और उत्तराखंड अंधकार में डूब जाएगा। शीला दीक्षित जी के बनाए हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दान करना तो संभव है, क्योंकि दिल्ली का राजस्व उत्तराखंड से पांच गुना ज्यादा है।
हरीश रावत का कहना है, हम कैसे सत्ता में आते ही 100 यूनिट बिजली मुफ्त में दे देंगे! कैसे दूसरे साल 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त में दे सकते हैं और ये काम बिना वितरण कंपनियों पर कर्ज का बोझ लादे, बिना बिजली की व्यवस्था को बाधित किए, इस काम को किया जाएगा। वो मैं जरूर, जिस दिन वो मुझको ये बता देंगे कि कैसे वो सत्ता में आते ही 300 यूनिट बिजली मुफ्त में दे देंगे, तो उस दिन मैं भी अपना रोड मैप विनम्रतापूर्वक उन महापंडितों के सामने रख दूंगा।
रावत कहते हैं, उनको यह भी बता दूंगा कि कैसे हरीश रावत ने, जिस राज्य में केवल 14 घंटे बिजली मिलती थी, औसत 14 घंटे वहां से कैसे 24 घंटे निरंतर बिजली मिलने वाले राज्य में उत्तराखंड को बदला, कैसे सारे राज्य के अंदर एक सामान क्वालिटी की बिजली देने वाला राज्य उत्तराखंड को बनाया और देश के अंदर सबसे सस्ती बिजली कैसे हमने उत्तराखंड के लोगों को उपलब्ध करवाई! और कैसे हम तीनों कंपनियों को लाभ में लाए! मैं अपने प्रयासों को विनम्रतापूर्वक उनके सामने रख दूंगा, वो कितना ग्रहण करना चाहेंगे, कितना ग्रहण नहीं करना चाहिए वो मैं, उन महाविद्वानों के ऊपर छोड़ देता हूँ।

दिल्ली का बजट उत्तराखंड से पांच गुना होने के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयान पर आप नेता कर्नल अजय कोठियाल ने एक ट्वीट करके जवाब दिया, हरीश रावत जी बहाने नहीं, उत्तराखंड को आगे बढ़ाने की नीयत दिखाइये। उत्तराखंड और दिल्ली का बजट लगभग बराबर है। उत्तराखंड का बजट करीब 57,400 करोड़ है और जनसंख्या 1.15 करोड़ यानी हर व्यक्ति पर खर्च करने के लिए उत्तराखंड सरकार के पास 50,000 रुपये हैं। 

ट्वीट के माध्यम से कोठियाल बताते हैं, दिल्ली का बजट करीब 69,000 करोड़ हैं और जनसंख्या 2 करोड़ है – यानी हर व्यक्ति पर खर्च करने के लिए सरकार के पास ₹34,500 हैं। उत्तराखंड में हर व्यक्ति पर खर्च करने के लिए दिल्ली से डेढ़ गुना (1.5 times) पैसे हैं, फिर भी उत्तराखंड के आम आदमी को सरकार दिल्ली जैसी सुविधा नहीं दे पाई।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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