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Uttarakhand election 2022 : क्या अप्रशिक्षितों से चोर दरवाजे से काम लिया जा रहा है

देहरादून। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की देहरादून रैली से कांग्रेस उत्साह में है और पूर्व सीएम हरीश रावत (Harish Rawat) दावा कर रहे हैं कि 2022 में कांग्रेस आ रही है और अब किसी के रोकने से भी कांग्रेस की सत्ता वापसी नहीं रुकेगी।
वो उत्तराखंडियत को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए कहते हैं कि मेरी राजनीति का एक मकसद अब करीब-करीब पूरा हो चुका है। उनकी राजनीति का एक मकसद क्या है, उत्तराखंडियत और अपने राजनीतिक जीवन को लेकर रावत क्या कहते हैं, इस पर चर्चा से पहले बात करते हैं कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं की पीड़ा को लेकर क्या कहा।
अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट पर हरीश रावत पीआरडी (प्रांतीय रक्षा दल) के जवानों से मुलाकात का जिक्र करते हैं और यह भी बताते हैं कि उनकी सरकार के कार्यकाल (2016) में 9000 युवाओं को चयनित किया गया था।
पूर्व सीएम रावत कहते हैं, मैं पीआरडी (PRD) के जवानों से मिलने गया। इनमें हमारी बेटियां भी हैं और बेटे भी हैं। ये सब लोग सरकार की योजना के तहत 2016 में चयनित हुए थे और इनकी संख्या करीब 9,000 के लगभग है, जिसमें से महिलाओं की संख्या 600 के आसपास है और इनको तब से काम नहीं दिया जा रहा है, काम नहीं सौंपा जा रहा है।

वो सवाल उठाते हैं, जो अप्रशिक्षित लोग हैं, जिनसे चोर दरवाजे से काम लिया जा रहा है।
अप्रशिक्षित लोगों से चोर दरवाजे से काम लिया जा रहा है, जैसा कि पूर्व सीएम हरीश रावत कह रहे हैं। यह एक गंभीर बात है और किन विभागों और उपक्रमों में नियमों के अनुसार नियुक्तियां नहीं हुई, इस पर बात तो होनी चाहिए। यह बात इसलिए भी ज्यादा गंभीर है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ऐसा आरोप लगाया है।
सोशल मीडिया पर रावत कहते हैं, अभी हॉर्टिकलचर के बच्चे हैं, उनको भी प्रशिक्षण दिया गया है, प्रशिक्षण के बाद उनको नियुक्ति में कहीं भी प्राथमिक नहीं मिल रही है और वही स्थिति PRD के हमारे बेटे और बेटियों के साथ है, जो बहुत गलत है और सरकार का यह बहुत अनुचित कदम है।
हरीश रावत के अनुसार,  मैं तो अभी यही कह सकता हूँ कि सरकार होश में आये और इनसे बातचीत कर इनकी समस्या का समाधान करे, जो बिलकुल न्यायोचित लगती है।
साथ ही रावत युवाओं से वादा करते हुए कहते हैं, यदि कांग्रेस की सरकार आई, उसको मैं प्रवाहित करने की स्थिति में रहा तो हम इस काम को आपकी प्राथमिकता के अनुसार करवाएंगे और अभी इनको इस ठंड में इस तरीके से धरनारत देखकर बहुत तकलीफ हो रही है, जो शक्ति राज्य को बढ़ाने में लगनी चाहिए थी, वो शक्ति जो है फुटपाथों पर इस तरीके से धक्के खा रही है, यह चिंता का विषय है।
कांग्रेस के वरिष्ठ हरीश रावत की हर बात और शब्द के मायने होते हैं। वो शब्दों के जरिये संदेश देते हैं। यहां प्रवाहित करने की स्थिति का मतलब जो हमारी समझ में आता है, वो है सरकार को चलाने की स्थिति में यानी मुख्यमंत्री बने तो प्राथमिकता के अनुसार युवाओं के कार्यों को कराएंगे।
बेरोजगारी के मुद्दे पर हरीश रावत लगातार अभियान चलाते रहे हैं। मंगलवार को रावत देहरादून में प्रशिक्षित बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट (एलोपैथिक) महासंघ उत्तराखंड के प्रदर्शन में शामिल हुए। महासंघ मांगों लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच/विरोध प्रदर्शन कर रहा था। पूर्व सीएम ने उनके प्रदर्शन में शामिल होकर उन्हें समर्थन दिया।
वैसे इस समय चुनाव नजदीक आते-आते राजनीतिक दलों की युवाओं की समस्याओं से नजदीकियां बढ़ने लगी हैं। उनको उनकी दिक्कतें अपनी दिक्कतें लगने लगी हैं। भाजपा की पुष्कर सिंह धामी सरकार भी युवाओं के लिए अपनी योजनाओं का बढ़ चढ़कर प्रचार कर रही है। यह बताने की पूरी कोशिश हो रही है कि सरकार युवाओं के बहुत ज्यादा नजदीक है। इसी तरह AAP नेता अरविंद केजरीवाल की घोषणाएं भी जगजाहिर हैं।
अब बात करते हैं हरीश रावत की उत्तराखंड और उत्तराखंडियत को लेकर अपील की।
एक दिन पहले सोशल मीडिया पर वो लिखते हैं, आप सब जानते हैं, उत्तराखंडियत अब मेरे अवशेष जीवन का लक्ष्य है। अपना राजनैतिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा और शक्ति, मैंने उत्तराखंडियत को समर्पित की हुई है।
इस बार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के तौर पर देहरादून पहुंचने के बाद मेरे उस लक्ष्य में, 2022 में कांग्रेस की सत्ता की वापसी का उद्देश्य भी जुड़ गया है। कल देहरादून के परेड ग्राउंड में  विजय सम्मान रैली में  राहुल जी को सुनने के लिये अपार भीड़ जुटी, यह स्वस्फूरित भीड़ थी, ये स्वस्फूरित जमवाड़ा इस बात को उद्घोषित कर गया है कि 2022 में कांग्रेस आ रही है और अब किसी के रोकने से भी कांग्रेस की सत्ता वापसी नहीं रुकेगी।
वो लिखते हैं, मेरी राजनीति का एक मकसद अब करीब-करीब पूरा हो चुका है। यहाँ से कांग्रेस के मेरे साथियों को आगे बढ़कर सारे अभियान को फिनिशिंग टच देना है। मैं आपको फिर से कुछ दिनों बाद अपनी शक्ति को उत्तराखंडियत और उत्तराखंड का भावी राजनैतिक एजेंडा बन सके, इस पर लगाऊंगा। मैं आप सबसे आग्रह कर रहा हूँ कि इस अभियान में मेरे साथ जुड़िये। मैं कलाकार बंधुओं से भी आग्रह कर रहा हूँ सब मेरे साथ जुड़िये। माया उपाध्याय जी जुड़ीं, मैं उनका आभारी हूँ।
रावत कहते हैं,  मैं राजनैतिक कार्यकर्ताओं से भी प्रार्थना कर रहा हूँ कि जरा सा राजनीति से इतर विधायक और राजनैतिक पदों से अलग हटकर उत्तराखंडियत के झंडे को थामने के लिए आप मेरे साथ आइये और आकर के खड़े होइये और इस अभियान में मेरे पुत्र श्री आनंद रावत मेरा साथ दे रहे हैं, वो किसी राजनैतिक पद की आकांक्षा में इस समय नहीं हैं, वो अपने पिता की मदद करना चाहते हैं, ताकि मेरे जीवन का जो लक्ष्य है “उत्तराखंडियत” वो आगे बढ़ सके।- “जय उत्तराखंड-जय उत्तराखंडियत”
अब बात करते हैं हरीश रावत का राजनीतिक मकसद क्या है, जो उनके अनुसार करीब-करीब पूरा हो चुका है। रावत का राजनीतिक उद्देश्य मुख्यमंत्री बनना है, जैसा कि लगातार सोशल मीडिया पर साझा करते रहे हैं। बाबा केदारनाथ धाम में जाकर मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद मांगते हैं और फिर सभी से इस बात को साझा भी करते हैं।
फिर वो यह सवाल भी करते हैं कि मैं 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन क्यों बनाया गया हूं, सीधे तौर पर जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह संदेश देते हैं कि इस चुनाव में कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा वो ही हैं। क्योंकि अक्सर उन्हीं नेताओं को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जाता रहा है, जिनको राजनीतिक दल चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बनाया जाता है।
पर, कांग्रेस के अन्य नेता 2022 का विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने की बात कह रहे हैं। वहीं, अपने एक और सवाल से रावत यह संदेश देते हैं कि उत्तराखंड में कांग्रेस को उनकी उपस्थिति मात्र से ही  2022 के चुनाव में सफलता की अपेक्षा है।
जैसा कि, राहुल गांधी की देहरादून रैली से उत्साहित रावत कांग्रेस की सत्ता में वापसी का दावा करने के साथ ही यह भी कह रहे हैं कि उनकी राजनीति का एक मकसद करीब करीब पूरा हो चुका है। यानी रावत एक बार फिर से यह संदेश दे रहे हैं कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी पर मुख्यमंत्री वो ही बनेंगे। क्योंकि यह जगजाहिर है कि उनकी राजनीति का एक मकसद मुख्यमंत्री बनना है। रही बात, कांग्रेस की सत्ता में वापसी की, तो यह चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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