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पूर्व सीएम हरीश रावत के मन में ये दो सवाल क्यों उठ रहे हैं?

देहरादून। न्यूज लाइव डेस्क
वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत (Harish Rawat) ने मंगलवार को दो पोस्ट साझा की हैं, पहली पोस्ट में भगवान शिव की स्तुति करते हुए बार-बार श्लोक दोहराने और फिर स्वयं से दो सवाल करने का जिक्र करते हैं।
वो लिखते हैं, आज प्रातः से मैं भगवान शिव जो निरंकार हैं, उनका एक स्तुति श्लोक बार-बार दोहरा रहा हूंँ,
गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।।
रावत लिखते हैं- इस मंत्र के उच्चारण के बाद बार-बार मेरे मन में एक सवाल कौंध रहा है, मैं 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन क्यों बनाया गया हूँ?
दूसरा सवाल मन में यह कौंध रहा है, क्या मैं उन अपेक्षाओं को जो मेरी उपस्थिति मात्र से पैदा हो रही हैं, उनको पूरा कर सकता हूंँ?
पहले भगवान शिव की स्तुति वाले श्लोक का अर्थ जान लेते हैं-
हे शिव, आप जो कैलाशपति हैं। गणों के स्वामी, नीलकंठ हैं। धर्म स्वरूप वृष यानी कि बैल की सवारी करते हैं। अनगिनत गुण वाले हैं। संसार के आदि कारण हैं। प्रकाश पुञ सदृश्य हैं। भस्म अलंकृत हैं। जो भवानी के पति हैं। उन पञ्चमुख प्रभु को मैं भजता हूं। ॐ ॐ ॐ
सभी को मालूम है कि हरीश रावत 2022 में मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं और इसके लिए पूरे मनोयोग से सक्रिय हैं। बाबा केदारनाथ धाम में स्वयं के लिए मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद मांगने की बात सोशल मीडिया में पहले ही साझा कर चुके हैं। हालांकि इसके बाद उनके और भी बयान सामने आए, पर यहां केवल उन दो सवालों के संदर्भ में बात करेंगे, जो उन्होंने मंगलवार की पोस्ट में साझा किए।

उनका यह सवाल कि मैं 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन क्यों बनाया गया हूं, सीधे तौर पर यह संदेश देता है कि इस चुनाव में कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा वो ही हैं।
अक्सर उन्हीं नेताओं को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जाता रहा है, जिनको राजनीतिक दल चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बनाते हैं, जिनके नाम और चेहरे पर चुनाव लड़ते हैं। कुल मिलाकर राजनीतिक संगठनों में यही नेता मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार माने जाते रहे हैं।
पर, कांग्रेस के उत्तराखंड प्रभारी देवेंद्र यादव पहले ही कह चुके हैं कि 2022 का विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा और चुनाव के विधायकों की सलाह से मुख्यमंत्री का चयन किया जाएगा।
उत्तराखंड में सीएम चेहरा घोषित नहीं करने की कांग्रेस की सोची समझी रणनीति है। पूर्व सीएम हरीश रावत कांग्रेस के सबसे कदावर नेता हैं और पूरे जोरशोर से कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए जुटे हैं। पर, बीच बीच में यह भी संदेश देते रहे हैं कि वो ही कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं।
पार्टी में उनके विरोधियों की संख्या कम नहीं है, इसलिए पार्टी उनको सीएम चेहरा घोषित करके किसी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।
यही वजह है कि रावत साफ तौर पर स्वयं को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं कर रहे हैं, पर समय समय पर उनके बयान यही संदेश दे रहे हैं कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी की स्थिति में वो ही मुख्यमंत्री बनेंगे।
अब उनके मन में कौंध रहे दूसरे सवाल की बात करते हैं। अपने दूसरे सवाल, क्या मैं उन अपेक्षाओं को जो मेरी उपस्थिति मात्र से पैदा हो रही हैं, उनको पूरा कर सकता हूंँ? से संदेश दिया है कि उत्तराखंड में कांग्रेस को उनकी उपस्थिति मात्र से ही  2022 के चुनाव में सफलता की अपेक्षा है।
यानी रावत ने सीधे तौर पर नहीं, पर सवाल के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने के लिए उनकी उपस्थिति बहुत जरूरी है। स्पष्ट है कि रावत बताना चाहते हैं कि वो ही कांग्रेस और कांग्रेसियों की अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। इसके माध्यम से उनका संदेश स्पष्ट है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा हरीश रावत ही हैं, क्योंकि सभी उनसे अपेक्षाएं रखते हैं।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने कंप्यूटर बाबा (Computer Baba) की एक पोस्ट को साझा किया है। इसमें पूर्व सीएम रावत कंप्यूटर बाबा के साथ हैं। इस पोस्ट में कंप्यूटर बाबा लिखते हैं- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी से भेंट कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। Harish Rawat जी बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान है, आपकी विकासवादी सोच और कार्यशैली कि उत्तराखंड की जनता को आवश्यकता है आप पुनः मुख्यमंत्री बनें, ऐसी में बाबा केदारनाथ से कामना करता हूं।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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