Blog Live

यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

सत्ता में बदलाव को अखबार के दफ्तर में बहुत करीब से महसूस किया था

क्या कोई अखबार यह बताएगा कि उसके पाठकों को क्या पसंद है एक अखबार के सबसे बड़े अधिकारी अखबार को किसी प्रोडक्ट की तरह बताते हैं। उनका कहना है कि…

Read More »

राजनीति में कम, अखबारों के दफ्तरों में ज्यादा राजनीति

अपने कामकाज में कमजोर लोग ही करते हैं अखबारों में राजनीति कई बार चुनाव के समय कुछ पत्रकारों के बारे में सुना जाता है कि वो तो उसको चुनाव लड़ा…

Read More »

अखबारों में खबर नहीं लिख पाने वाले भी करते हैं समीक्षा

डेस्क पर प्रेशर में कार्य करने की क्षमता बढ़ती है,अधिकतर मौकों पर आत्मविश्वास कम हो जाता है अभी तक आपके साथ अखबारों में रिपोर्टिंग से किन क्षमताओं में वृद्धि हो…

Read More »

अखबारों में पत्रकारिता से बढ़ती हैं आपकी क्षमताएं

आप ऊर्जावान हैं। सकारात्मक सोच रखते हैं। कुछ अभिनव करना चाहते हैं। कुछ सीखने और समझने की कोशिश करते हैं। किसी खास विषय पर आपका फोकस है। सबसे अच्छी बात…

Read More »

बचपन की बातेंः मैथ की बुक देखकर न, मुझे कुछ घबराहट हो जाती थी

सब बच्चे अगली क्लास में पहुंचकर बहुत खुश हैं। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि मैं भी बहुत खुश होता था। रिजल्ट आया नहीं कि मुझे तो बस, नई किताबों का इंतजार रहता…

Read More »

अखबार में पत्रकारिता बहुत कम, नौकरी ज्यादा की

कभी कभार तथ्य और सच भी बहुत अच्छा प्रभाव नहीं डालते, इसलिए इनको रोकना सही होता है बुरा मत मानना, अखबार में नौकरी ज्यादा होती है, पत्रकारिता बहुत कम। भले…

Read More »

अखबार में सूत्र और स्रोत तथा खबरों का संपादन

यहां खबरें संपादित करने वाला रिपोर्टर से कम जानकार भी हो सकता है अब हम पत्रकारिता में सूत्रों और स्रोतों पर बात करेंगे। अक्सर आप पढ़ते हैं सूत्रों के अनुसार।…

Read More »

इसकी स्याही मेरी स्याही से गाढ़ी कैसे

बचपन की बातें: ये दाग अच्छे हैं  इसकी स्याही मेरी स्याही से गाढ़ी कैसे। क्लास में बैठे दोस्त एक दूसरे की स्याही की शीशी देखकर ऐसा सोचते थे। क्लास पांच तक…

Read More »

पत्रकारिता को जानना है तो छोटे शहरों से शुरुआत करो

मैं ऋषिकेश ऑफिस में बतौर ट्रेनी फिर से काम करने लगा। मेरे इंचार्ज ने मुझे पहले भी काफी सपोर्ट किया था और इस बार भी तैयार थे। हमारे बीच बीट…

Read More »

मुझे मिट्टी में रंग दिखते हैं…

मिट्टी और गोमूत्र से कमाल की चित्रकारी करते हैं गोपेश्वर के आयुष परिस्थितियां आपसे कुछ ऐसा करा देती हैं, जिस पर एक दिन आप खुद से कह उठते हैं, वाह…

Read More »

चिट्ठी ने अपना काम कर दिखाया और श्रेय कोई और लेने लगे

मैं सकुशल अपने घर पर था और बेरोजगार भी। मुझे बेरोजगार होने का इतना दुख नहीं था, जितना कि यह सोचकर कि दोबारा कभी मौका मिलेगा तो क्या मेरे साढ़े…

Read More »

अपनी तनख्वाह बढ़वाने के लिए दूसरों का पैसा रुकवाने पर पूरा जोर

देहरादून में कुछ दिन बिताने के बाद मुझे फिर से फोन करके धर्मशाला आने के लिए कहा गया। मैं इनके निर्देशों और आदेशों को मानने की गलतियां कर रहा था।…

Read More »

इनकी सुनते रहो, काम करते रहो, पैसे की बात मत करना 

अपने नंबर बढ़ाने के लिए दूसरों को दिक्कतों में डालने वाले बहुत हैं पत्रकारिता में अखबार के मालिक के बेस्ट ऑफ लक ने मुझे खबरों में कुछ बड़ा करने के…

Read More »

यह बच्चा तो बातों की ‘खिचड़ी’ बनाने में माहिर है  

बचपन की बातें पिछली बार, जो बचपन की बातें आपके साथ साझा की थीं, क्या फिर से याद दिलाने की आवश्यकता है। कोई बात नहीं, एक बार दोहरा लेते हैं।…

Read More »

अखबारों में युवाओं से पहाड़ तुड़वाने वाले, उनकी दिक्कतों पर हो जाते मौन

आपको बता रहा था कि अप्रैल 1999 की रात दो बजे मंडी के बस स्टैंड पर मैं अपनी अटैची और बिस्तरबंद के साथ मौजूद था। मुझे कुछ नहीं सूझ रहा…

Read More »

अखबार में कोई किसी का नहीं होता, मत करो किसी की परिक्रमा

अखबार में काम करने के शुरुआती वर्षों में, मैं हमेशा यही समझता था कि यहां बिना गॉड फादर के काम नहीं चलता। आपको किसी न किसी की अंगुली पकड़कर ही…

Read More »

अखबारों में खबरों का संपादन और रिपोर्टिंग

अखबारों की बात हो रही है तो संपादन और रिपोर्टिंग पर चर्चा करना भी जरूरी है। अक्सर कुछ वरिष्ठ लोगों को यह कहते सुना जाता है कि कुछ ही रिपोर्टर…

Read More »

हथेली पर आम उगाने की मशीन नहीं है रिपोर्टर

आप रिपोर्टर हैं सुपरमैन नहीं। पर, संपादक से लेकर डेस्क तक के कुछ साथियों की नजर में आप सुपरमैन हैं, तभी तो, कभी भी आपसे कुछ कंटेंन्ट मांगा जा सकता…

Read More »
Back to top button