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Clever Toys vs Giant Dinosaur Story: चूहों ने डायनासोर को जमीन पर गिरा दिया

Clever Toys vs Giant Dinosaur Story

लेखक- राजेश पांडेय

यह कहानी एक मॉल की खिलौनों की दुकान की है, जहां की दुनिया बिल्कुल जादुई है। यहां की सबसे अनोखी बात यह है कि दिन भर शांत रहने वाले रूई के खिलौने रात होते ही, जैसे ही दुकान का शटर गिरता है, जीवित हो जाते हैं।

इस खिलौना नगरी के सबसे छोटे और शरारती हीरो थे चिंटू और पिंटू। इनके साथ ही दुकान में एक बहुत ही समझदार और बूढ़े कछुए दादा भी रहते थे, जिनकी आँखों में बरसों का अनुभव और कहानियां बसी थीं।

Clever Toys vs Giant Dinosaur Story: एक दिन कछुए दादा ने सभी खिलौनों को इकट्ठा किया और एक भयानक चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि मॉल में एक नया और बहुत विशाल पड़ोसी आ गया है, एक खतरनाक डायनासोर! उसकी दहाड़ से पूरी दुकान हिल जाती थी। सभी खिलौने डर के मारे कांपने लगे, लेकिन कछुए दादा ने समझाया कि डरने से काम नहीं चलेगा, हमें हिम्मत से काम लेना होगा।

चिंटू और पिंटू को एक जासूसी मिशन पर भेजा गया। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर पता लगाया कि वह डायनासोर उनकी तरह रूई का नहीं, बल्कि लोहे और प्लास्टिक का बना था और उसके पेट में बिजली के तार दौड़ रहे थे।

Clever Toys vs Giant Dinosaur Story: अचानक, एक रात उस डायनासोर ने अपनी जंजीरें तोड़ दीं और दुकान पर हमला कर दिया। उसने शटर तोड़ दिया और अपना डरावना सिर अंदर घुसाकर तबाही मचाने लगा। हर तरफ भगदड़ मच गई। तभी कछुए दादा ने अपनी बुद्धि का उपयोग किया। उन्होंने अपनी बातों में डायनासोर को उलझा लिया और इसी बीच चिंटू और पिंटू फुर्ती से उसके पेट के अंदर घुस गए। उन्होंने अपने छोटे-छोटे दांतों से डायनासोर की बैटरी का मुख्य तार काट दिया।

देखते ही देखते, दहाड़ता हुआ वह विशाल दैत्य बेजान होकर जमीन पर गिर पड़ा।

अगली सुबह जब दुकान के मालिक आए, तो उन्हें कुछ पता नहीं चला कि रात भर यहां कितनी बड़ी जंग लड़ी गई थी। दुकान के शेर ने, जो खुद को राजा समझता था, कछुए दादा की बुद्धिमानी और चिंटू-पिंटू की बहादुरी को सलाम किया और उन्हें अपना नया मार्गदर्शक चुना।

यह कहानी हमें सिखाती है कि मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, असली ताकत शरीर के आकार में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग और सूझबूझ में होती है।

बच्चों को सुनाइए कहानी और पूछिए प्रश्न 

Clever Toys vs Giant Dinosaur Story: लघु-उत्तर प्रश्नोत्तरी (Quiz)

1. मॉल की दुकान में रखे सजावटी खिलौने रात के समय क्या करते हैं? 
दिन भर शांत और बेजान दिखने वाले ये खिलौने रात को शटर गिरते ही जीवित हो उठते हैं। वे अपनी अकड़ी हुई कमर सीधी करते हैं, नाचते-गाते हैं और दिन भर के अनुभवों पर आपस में खूब गपशप करते हैं।
2. दुकान में आए नए कछुए के पास अन्य जानवरों की तुलना में अधिक ज्ञान क्यों था? 
कछुए ने बताया कि वे पूरी तरह रूई से नहीं बने हैं, बल्कि उनके पेट में उन किताबों के कागज भरे हैं जिन्हें इंसानों ने रद्दी में फेंक दिया था। चूंकि किताबों से ज्ञान मिलता है, इसलिए उन कागजों की वजह से कछुए के पास बहुत सारी जानकारियाँ थीं।
3. दुकान के प्रवेश द्वार पर बैठे दो कुत्तों की वास्तविक जिम्मेदारी क्या थी? 
दुकान के प्रवेश द्वार पर बैठे कुत्ते अपनी मुद्रा और आँखों से सुरक्षाकर्मियों जैसे लगते थे, लेकिन दुकानदार ने उन्हें सुरक्षा की नहीं बल्कि ग्राहकों के स्वागत की जिम्मेदारी दी थी। वे दिन भर बिना हिले-डुले इंसानों का स्वागत करते रहते थे।
4. खरगोश ने कछुओं के बारे में क्या धारणा बना रखी थी? 
खरगोश का मानना था कि कछुए आलसी होते हैं और उन्हें एक ही जगह पड़े रहना पसंद है। उसने यह भी कहा कि कछुओं ने यह झूठ फैलाया है कि वे दौड़ में खरगोशों को हरा सकते हैं।
5. चूहों (चिंटू और पिंटू) ने डायनासोर के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त की? 
चिंटू और पिंटू अक्सर पास की किताबों की दुकान में जाकर नई किताबों के चित्र देखते थे और वहाँ आने वाले लोगों की बातें सुनते थे। उन्होंने किताबों में डायनासोर के चित्र देखे थे और एक बच्चे व उसके पिता की बातचीत से उसका नाम और इतिहास जाना था।
6. बिल्ली ने चूहों को क्या चेतावनी दी थी? 
बिल्ली ने चूहों को धमकाते हुए कहा था कि अगर वे ज्यादा गप्पे मारेंगे या उसकी बात नहीं मानेंगे, तो वह उन्हें खा जाएगी। उसने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि जब वह आँखें दिखाए, तो वे चुपचाप बैठ जाया करें।
7. शेर ने अपनी “नकली जिंदगी” के बारे में क्या कहा? 
शेर ने स्वीकार किया कि वे सभी रूई के बने नकली जानवर हैं और उन्हें भूख नहीं लगती। उसने कहा कि वे जंगल के लिए नहीं बल्कि घरों में सजाने के लिए बनाए गए हैं और उनकी जिंदगी का कोई अपना उद्देश्य नहीं है।
8. चूहों ने डायनासोर के “भोजन” (बिजली) के बारे में क्या पता लगाया? 
चूहों ने डायनासोर के पेट के अंदर जाकर देखा कि वह ‘सवारी’ (तारों) के माध्यम से ‘खाना’ (बिजली) प्राप्त करता है। उन्होंने पाया कि डायनासोर के पेट में एक बड़ा डिब्बा (बैटरी) है, जो उसे तब भी ऊर्जा देता है जब मुख्य तार टूट जाता है।
9. कछुए ने डायनासोर को बातों में क्यों उलझाया? 
कछुआ चाहता था कि चूहों को डायनासोर के शरीर के अंदर जाकर उसकी बिजली की तारों को काटने के लिए पर्याप्त समय मिल जाए। इसलिए उसने डायनासोर की बुद्धि पर सवाल उठाकर और उससे तर्क-वितर्क करके उसे व्यस्त रखा।
10. कहानी के अंत में शेर ने कछुए और चूहों को क्या सम्मान दिया? 
शेर ने कछुए को दुकान का राजा बनाने का सुझाव दिया क्योंकि उसने अपनी बुद्धि से सबकी रक्षा की थी। साथ ही, उसने चूहों को ‘महामंत्री’ के पद के लिए नामांकित किया क्योंकि उन्होंने अपनी जान खतरे में डालकर डायनासोर को निष्क्रिय किया था।
शब्दावली (Glossary)
Clever Toys vs Giant Dinosaur Story: यहां कहानी में प्रयुक्त कुछ महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ दिए गए हैं:
शब्द
परिभाषा / अर्थ
सजावटी सामान
वे वस्तुएं जो सुंदरता बढ़ाने के लिए घरों या दुकानों में रखी जाती हैं।
मुद्रा
बैठने या खड़े होने का विशेष ढंग या स्थिति (Pose)।
धमाचौकड़ी
शोर-शराबा और उछल-कूद करना।
रद्दी
बेकार पुराने कागज या सामान जिन्हें बेच दिया जाता है।
सुरक्षा कवच
वह बाहरी आवरण जो किसी जीव की रक्षा करता है (जैसे कछुए की ऊपरी खोल)।
विशाल
आकार में बहुत बड़ा।
सॉफ्ट (Soft)
बहुत कोमल और नरम स्पर्श वाला।
सेल्फी
स्वयं के द्वारा खींची गई अपनी तस्वीर, जिसमें अक्सर कोई प्रसिद्ध वस्तु या पात्र साथ होता है।
एस्टरॉयड (Asteroid)
अंतरिक्ष में घूमने वाले बड़े पत्थर, जिनके पृथ्वी से टकराने से डायनासोर विलुप्त हो गए थे।
सवारी
चूहों द्वारा बिजली की ‘तारों’ के लिए इस्तेमाल किया गया कूट शब्द।
बेजान
जिसमें जान न हो; निर्जीव।
दहशत
बहुत अधिक डर या आतंक का माहौल।
कबाड़
पुरानी, टूटी-फूटी और बेकार वस्तुएं।
अकड़न
शरीर के किसी हिस्से का सख्त हो जाना, जिससे हिलने-डुलने में कठिनाई हो।

 

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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