संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में 21 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस (IDF) घोषित किया। यह दिवस सभी प्रकार के…
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उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक प्रगति के प्रमुख स्रोत कृषि एवं पशुपालन हैं। परन्तु, दुखद स्थिति यह है कि पशुपालन और कृषि आय के उतने बड़े स्रोत नहीं रह गए हैं, जिनके आधार पर हम दूरस्थ पर्वतीय गांवों से पलायन रोकने का दम भर सकें। पहाड़ में कृषि को खुद ग्रामीण, खासकर महिलाएं, जिनको कृषि की रीढ़ कहा जाता है, भी घाटे का सौदा मानती हैं। इस कॉलम में कृषि पर फोकस किया गया है।
उन्नतशील किसान भूपाल सिंह कृषाली ने वर्षों पहले नाहींकलां गांव से पलायन कर दिया और देहरादून जिला के कालूवाला में…
Read More »पर्वतीय क्षेत्र में आर्गेनिक खेती की संभावनाएं हैं, ऐसा अक्सर कहा जाता है। मैं यह कोई नई बात नहीं कह…
Read More »क्या अकेली सुसवा ही दोषी है दूधली घाटी में खेतों की बर्बादी के लिए हजारों बीघा खेती के लिए मुसीबत…
Read More »डोईवाला। राजीव गांधी पंचायत राज संगठन और डोईवाला किसान कांग्रेस का कहना है कि डोईवाला क्षेत्र में गेहूं और बागवानी…
Read More »मुझे नदी से नाला बनाकर तुमने मेरा जेंडर बदल दिया। क्या प्रकृति की सौगात का आभार इस तरह व्यक्त किया…
Read More »डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड जायफल सदाबहार वृक्ष है जो इण्डोनेशिया के मोलुकस द्वीप का है। इस…
Read More »डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय, देहरादून भारत में अश्वगंधा अथवा असगंध जिसका वानस्पतिक नाम वीथानीयां सोमनीफेरा है, यह एक…
Read More »रेडियो और टीवी के माध्यम से कृषि को उन्नत और उत्पादक बना सकते है। ग्रामीण अफ्रीका के छोटे से छोटे…
Read More »उत्तराखंड में लगभग 4 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती की जा रही है। इसके लिए लगभग 300 कुन्तल बीज की…
Read More »डॉ. राजेन्द्र डोभाल, महानिदेशक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, उत्तराखंड अंग्रेजी चॉकलेट वह भी स्वीट्जरलैण्ड में हेजलनट के साथ वाह आनन्द…
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