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उत्तराखंडः कमाल का है हेजलनट यानि भोटिया बादाम

  • डॉ. राजेन्द्र डोभाल, महानिदेशक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, उत्तराखंड
अंग्रेजी चॉकलेट वह भी स्वीट्जरलैण्ड में हेजलनट के साथ वाह आनन्द ही आनन्द ! पता चला हेजलनट तो भोटिया बादाम है और उत्तराखण्ड में खूब पाया जाता है। उत्तराखण्ड में पाये जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण पौधा भोटिया बादाम/hazelnut (Corylus avellana) के कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं से अवगत करा रहा हूँ। यह एक Betulaceae कुल का पौधा है। उत्तराखण्ड में यह समुद्र तल से 1000 से 3000 मीटर की ऊंचाई वाले स्थानों में पाया जाता है। यह प्रमुख रूप से उत्तराखण्ड के कुमाऊं क्षेत्र के धारचूला, पिथौरागढ़ तथा गढ़वाल में चमोली जिलें में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
भोटिया बादाम की खेती उत्तराखण्ड में अभी तक व्यवासयिक रूप से नहीं की जाती है, यह केवल प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। प्रतिभा चौहान, ट्रिब्यून समाचार पत्र के अंक 29 नवम्बर, 2015 के अनुसार हिमाचल प्रदेश में भी भोटिया बादाम प्राकृतिक रूप से चम्बा जिलें में पाया जाता है।  हिमाचल सरकार ने भोटिया बादाम के औद्योगिक उत्पादन के लिए 20,000 पेड़ इटली से आयात कर किसानों को वितरित किए हैं ,जिसमें तत्कालीन उद्यान एवं सिंचाई मंत्री, विद्या स्टॉक ने मुख्य भूमिका निभाई, ताकि हिमाचल में भोटिया बादाम का औद्योगिक उत्पादन किया जा सके।
टर्की में भोटिया बादाम की स्थानीय स्तर पर पांच प्रजातियां विकसित की गयी हैं, जैसे : तम्बूल, यासी बादाम,शीबरी काराफिनडिक तथा हैम प्रजाति मुख्य रूप से औद्योगिक फसल के रूप में उगायी जाती है।
विश्व में सर्वाधिक औद्योगिक मांग Corylus avellana की प्रजाति का है जो कि टर्की में विकसित की गयी है। टर्की के एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार Alpha-Tocopherol एवं Beta- Tocopherol सभी प्रजातियां में मुख्य अवयव के रूप में पाया जाता है।
टर्की अध्ययन के अनुसार प्रति दिन 42.5 ग्राम भोटिया बादाम खाने से शरीर को लगभग 44.4 – 83.6 प्रतिशत कॉपर तथा 40.0-44.8 प्रतिशत मैग्नीज प्राप्त होता है, जो कि स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है।
भोटिया बादाम में फालिक एसिड बादाम व अखरोट से सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है जो कि शरीर में कोशिका वृद्धि तथा कोशिका निर्माण में अत्यंत आवश्यक होने के साथ-साथ रक्त हीनता को रोकने में भी मदद करता है। भोटिया बादाम में हाल हीं में हुए कुछ शोध के अनुसार Taxol नामक रसायन के स्रोत के रूप में भी देखा जा रहा है।
इसमें Taxol की मात्रा लगभग 4.2 µg/g पाया जाता है जिसको विभिन्न कैंसर रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। यह एक विटामिन- A (20.0 iw) तथा E (15 mg/ 100g)के साथ-साथ प्रोटीन(14.95 g/100 g), फासफोरस (290mg/100 g), कैल्शियम (114.0mg/100 g), मैग्नीशियम (163.0mg/100 g), पोटेशियम (680 mg/100 g) का महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत है।
उपरोक्त पोष्टिक गुणों के आधार पर कई अन्य खाद्य पदार्थाे में पोषक पूरक के रूप में भी मिलाया जाता है जो कि Anti oxidants का प्राकृतिक स्रोत होने के कारण आप्रकृतिक घटकों का विकल्प बन सकता है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार भोटिया बादाम का तेल Low Linolenic Acid होने के कारण Light ness, Good flavor एवं लम्बी अवधि तक सुरक्षित रह सकता है।
यह एक olive Oil का औद्योगिक रूप से पौष्टिकता की दृष्टि एवं औषधीय गुणों के कारण बेहतर विकल्प बन सकता है। यह विभिन्न रोगों जैसे Ovarian Cancer, Breast Cancer, Lung Cancerतथा Head and Neck Carcinomas के उपचार मेंं भी प्रयोग किया जाता है।
भोटिया बादाम में Unsaturated fatty Acid (Oleic linolenic Acid) होने के कारण यह हानिकारक वसा को कम करता है तथा लाभदायक वसा को बढ़ाता है जो कि हृदय की रक्त वाहिनी में रक्त प्रभाव को बेहतर करने में सहायक होता है।
उपरोक्त पोष्टिक एवं औद्योगिक महत्ता के कारण विभिन्न देशों – टर्की, इटली, स्पेन, फ्रांस तथा अमेरिका में इसकी व्यवसायिक खेती की जाती है। टर्की विश्व में भोटिया बादाम का सर्वाधिक 65 प्रतिशत उत्पादन किया जाता है (6,25,000 टन) जो कि विश्व में 75 प्रतिशत योगदान देता है।
अमेरिका विश्व बाजार में 25 प्रतिशत योगदान देता है। विश्वबाजार में भोटिया बादाम को luxury Food के रूप में जाना जाता है। सम्पूर्ण विश्व लगभग 455000 टन का उत्पादन किया जाता है जिसमें 65 प्रतिशत टर्की, 20 प्रतिशत इटली, 3 प्रतिशत अमेरिका में किया जाता है।
यूरोप वर्तमान में भोटिया बादाम का सर्वाधिक उपभोग करने वाला देशों में सुमार है। विभिन्न देशों में भोटिया बादाम को विभिन्न औद्योगिक उत्पादों जैसे चाकलेट, अनाजों से उत्पादित उत्पादों ब्रेड,तेल, कॉफ़ी पेय पदार्था जैसे बियर, बोतका, आदि में पोष्टिक एवं Flavoring Agent के रूप में तथा Pharmaceutical Industry एवं Cosmetic Industry में प्रयुक्त किया जाता है।
भोटिया बादाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण फसल के रूप में स्थान ले चुकी है। विश्व बाजार में यह छिलके सहित एवं छिलके रहित दोनों अवस्थाओं में बेचा जाता है। अकेले अमेरिका के Oregon में भोटिया बादाम का औद्योगिक उत्पादन किया जाता है जो कि British Columbia तथा Canada को निर्यात किया जाता है।
वर्ष 1996 में उत्तरी अमेरिका में भोटिया बादाम का उत्पादन 19900 टन था, जिसका विश्व बाजार में 1 डॉलर से 3 डॉलर प्रति Ib में बेचा जाता है। Roasted अथवा Chocolate के रूप में 12 डॉलर प्रति Ib तक बेचा जाता है। आस्ट्रेलिया में प्रति वर्ष 2000 टन भोटिया बादाम का आयात किया जाता है, केवल कैडवरी कम्पनी के द्वारा भोटिया बादाम के तेल को विभिन्न खाद्य पदार्थां को तैयार करने के लिए बहुतायत मात्रा में आयात किया जाता है। Nutella विश्व बाजार का 25 प्रतिशत भोटिया बादाम का विभिन्न खाद्य पदार्थों में उपभोग करता है।
विश्व बाजार में भोटिया बादाम से निर्मित उत्पादन तेल, Spreadable Nut butter (Euphoria) Ecstsy, Bio Industry तथा Nutella जैसे लगभग 50,000 से अधिक उत्पाद तैयार किये जाते है। 1 नवम्बर, 2016 Julian Galeकी रिपोर्ट के अनुसार टर्की में भोटिया बादाम 7.72 से 24.25 USD प्रति kg तक बेचा गया है। Sreeja Dry Fruits and spices, हैदराबाद में भोटिया बादाम 2500 प्रति kg तक बेचा गया है।
Crystal Aromatic, नई दिल्ली में भोटिया बादाम का तेल 7000 प्रति kg तक बेचा गया है। चूंकि उत्तराखण्ड प्रदेश का अधिकतम भूभाग वन आच्छादित है जहां पर कुछ संरक्षित वन क्षेत्रो तथा न्याय पंचायत की बेनाप भूमि पर भोटिया बादाम की खेती की जा सकती है जो कि प्रदेश की आर्थिकी मे सहायक होगा।
Tags: hazelnut, Corylus avellana, Nut butter, America, Chocolate, Uttarakhand, newslive24x7.com

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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