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Reading: अफ्रीकी देशों में रेडियो टीवी कर रहे कृषि में बदलाव
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अफ्रीकी देशों में रेडियो टीवी कर रहे कृषि में बदलाव

Rajesh Pandey
Last updated: October 28, 2021 10:16 pm
Rajesh Pandey
7 years ago
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देहरादून के एक खेत में गेहूं की फसल। फोटो- सार्थक पांडेय
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रेडियो और टीवी के माध्यम से कृषि को उन्नत और उत्पादक बना सकते है। ग्रामीण अफ्रीका के छोटे से छोटे किसान तक रेडियो और टेलीविजन की आसान पहुंच है। वहां ये अच्छी खासी पहचान रखते हैं।

हाल ही में घाना के अकरा में अफ्रीका हरित क्रांति मंच (एजीआरएफ) के मंच पर डिजीटल कृषि बुनियादी ढांचे पर चर्चा के दौरान विशेषज्ञों का कहना था कि विशेष रूप से अफ्रीका के गांवों तक इंटरनेट की पहुंच नहीं है, इसलिए कृषि को डिजीटल प्लेटफार्म पर लाकर किसानों को जागरूक करना बड़ी चुनौती है। कृषि को डिजीटल बनाना काफी मुश्किल हो गया है।

अनुमान है कि अफ्रीका में 82 प्रतिशत घर इंटरनेट से नहीं जुड़े हैं। स्टार टाइम्स नाइजीरिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी झांग जुन्की का कहना था कि “हमने टेलीविजन और रेडियो के उन कार्यक्रमों को देखा है, जिनसे कृषि में बदलाव आए हैं। इंटरनेट और भी बेहतर होता, लेकिन महंगा गैजेट्स और खराब नेटवर्क कवरेज के कारण अभी उस तक पहुंच बहुत सीमित है।

जुन्की ने केन्या के सिटीजन टेलीविजन के शाम्बा शेप अप कार्यक्रम का जिक्र है, जो व्यवहारिक तरीके से पूर्वी अफ्रीका के किसानों को पशुपालन, मुर्गी पालन, विभिन्न फसलों, मिट्टी की उर्वरता, जलवायु परिवर्तन, कृषि व्यवसाय के लिए जागरूक बनाता है। यह एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसने कई छोटे किसानों के जीवन को बदल दिया है और अन्य देशों को इससे सीखना चाहिए।

जुन्की ने कृषि विकास में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की भूमिका पर भी चर्चा करते हुए कहा कि ये ये स्थानीय भाषा व बोली में किसानों को कृषि सेवाओं व जलवायु संबंधी सूचनाएं देते हैं।  इंटरनेट की समस्या को हल करने के लिए, डिजीटल सॉल्यूशन कंपनी ब्लू टाउन सॉल्यूशन ने ग्रामीण समुदायों की सेवा के लिए उपग्रह से जुड़ी इंटरनेट सेवा का उपयोग किया। अफ्रीका में यह कंपनी घाना और तंजानिया में काम कर रही है।

ब्लू टाउन सॉल्यूशन के वाइस प्रेसीडेंट लुईज काजर कहते हैं कि डिजीटल होने का अर्थ सूचनाओं तक पहुंच के साथ बाजार, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, सरकारी कार्यक्रमों से भी जुड़ना है। इसके लिए एक स्पष्ट रणनीति और स्थिरता होना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार सस्ते और विश्वसनीय संचार विशेषकर मोबाइल फोन और इंटरनेट तक पहुंच समृद्धि और जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मददगार हो सकते हैं।

घाना में उनकी कंपनी ने लगभग 1200 हॉटस्पॉट बनाए हैं, जिनमें से अधिकतर गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े हैं। अफ्रीकन वीमेन इन एग्रीकलचलर रिसर्च की डायरेक्टर डॉ. वंजिरू कमाउ रुटेनबर्ग का कहना है कि सरकार कृषि के डिजीटाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। हमें स्पष्ट नीतियों की आवश्यकता है, जो निवेशकों को इस क्षेत्र में आकर्षित करेंगी। हमें वित्त, अनुसंधान, डिजीटल बुनियादी ढांचे और सहयोग की आवश्यकता है।

 

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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