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Pi Day 2026: वह जादुई नंबर जिसने हजारों साल तक दुनिया को घुमाया!

Rajesh Pandey
Last updated: March 14, 2026 1:29 pm
Rajesh Pandey
1 month ago
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आज 14 मार्च को पाई दिवस है।- एआई इमेज
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Pi Day 2026: नई दिल्ली, 14 मार्च 2026ः  आज 14 मार्च है, यानी वर्ष की तीसरा महीना और 14 तारीख। इसको अंकों में लिखा जाए तो यह 3.14 होगा, जो गणनाओं में इस्तेमाल होने वाले π का मान है। आज दुनिया भर में ‘पाई दिवस’ मनाया जा रहा है। यह सिर्फ गणित का एक नंबर नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के उस सफर की कहानी है जिसने एक गोल घेरे की गुत्थी सुलझाने के लिए 4000 साल लगा दिए।

पांचवीं शताब्दी में आर्यभट्ट ने पाई का मान 3.1416 बताया। उन्होंने यह भी पहचान लिया था कि यह मान ‘आसन्न’ (लगभग) है, यानी इसे कभी पूरा नहीं नापा जा सकता। गणितीय स्थिरांक pi ( π) को समर्पित यह दिन अब केवल प्रयोगशालाओं और कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है।

यह भी पढ़ें- पाई को तो जानते ही होंगे आप, 14 मार्च को है उसका दिन

Pi Day 2026: पाई दिवस की शुरुआत का श्रेय भौतिक विज्ञानी लैरी शॉ (Larry Shaw) को जाता है। उन्होंने 1988 में सैन फ्रांसिस्को के ‘एक्सप्लोरेटोरियम’ (Exploratorium) में पहली बार इसे मनाया था। वहां आज भी लोग एक ‘पाई श्राइन’ (Pi Shrine) के चारों ओर 3.14 बार घूमकर परेड निकालते हैं। 2009 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने आधिकारिक तौर पर 14 मार्च को राष्ट्रीय पाई दिवस के रूप में मान्यता दी, जिसके बाद यह पूरी दुनिया में फैल गया।

किसी भी वृत्त की परिधि (Circumference) और उसके व्यास (Diameter) का अनुपात है। यह एक ऐसी संख्या है जो कभी खत्म नहीं होती और न ही खुद को दोहराती है। यह ज्यामिति (Geometry) से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक हर जगह अनिवार्य है।

दुनिया भर में पाई ( π) दिवस को मजेदार और दिलचस्प तरीकों से मनाया जाता है:

Pi Day 2026: इस दिन लोग पाई (एक विदेशी मिठाई), पिज्जा और अन्य गोल चीजें खाते हैं। कई कंपनियां तो अपने उत्पाद $3.14 (लगभग ₹260) की विशेष कीमत पर बेचती हैं। स्कूलों और कॉलेजों में पाई के अंकों को याद करने की प्रतियोगिताएं होती हैं। साथ ही ‘पाई टॉस’ जैसे प्रयोगों से गणित को खेल-खेल में समझाया जाता है।

अमेरिका की मशहूर यूनिवर्सिटी MIT (Massachusetts Institute of Technology) ऐतिहासिक रूप से इसी दिन अपने अंडरग्रेजुएट एडमिशन के नतीजे जारी करती है।

आज का दिन विज्ञान के दो सबसे बड़े नामों से भी जुड़ा है।

आधुनिक भौतिकी के जनक आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को हुआ था। इसी दिन 2018 में ब्रह्मांड विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने दुनिया को अलविदा कहा था।

एक छोटे से वृत्त से लेकर विशाल ग्रहों की कक्षा तक, पाई हर जगह मौजूद है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि गणित नीरस नहीं, बल्कि हमारे जीवन के हर घेरे में छिपा एक सुंदर संगीत है।

क्यों पड़ा इसका नाम ‘पाई’?

अक्सर लोग सोचते हैं कि पाई किसी वैज्ञानिक का नाम होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यह ग्रीक (यूनानी) वर्णमाला का 16वां अक्षर है। इसका चुनाव ग्रीक शब्द ‘Perimetros’ (जिसका अर्थ है परिधि या घेरा) से हुआ है। चूंकि ‘Perimeter’ की शुरुआत ‘P’ से होती है, इसलिए इसके ग्रीक रूप π को चुना गया। वेल्स के गणितज्ञ विलियम जोन्स ने सबसे पहले 1706 में अपनी एक किताब में वृत्त के अनुपात को दर्शाने के लिए pi चिन्ह ( π) का प्रयोग किया। इस चिन्ह को असली पहचान और लोकप्रियता महान गणितज्ञ लियोनार्ड यूलर ने दिलाई। जब उन्होंने अपने कार्यों में इसका इस्तेमाल करना शुरू किया, तब पूरी दुनिया ने इसे ‘पाई’ के नाम से अपना लिया।

वृत्त के घेरे और उसके व्यास (Diameter) का सही अनुपात ढूंढना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही। 2000 ईसा पूर्व में बेबीलोन और मिस्र के लोग इसे लगभग 3.12 या 3.16 मानकर काम चलाते थे। 250 ईसा पूर्व में यूनानी वैज्ञानिक आर्किमिडीज ने 96 भुजाओं वाले आकार बनाकर पहली बार इसे गणितीय सटीकता दी।

पाई एक ‘अपरिमेय संख्या’ (Irrational Number) है। इसका मतलब है कि दशमलव के बाद इसके अंक अनंत तक जाते हैं और कभी रिपीट नहीं होते। आज सुपर कंप्यूटरों ने पाई के 100 ट्रिलियन से अधिक अंकों को खोज लिया है। दिलचस्प बात यह है कि अगर आप पाई के अंकों में अपना मोबाइल नंबर या जन्मतिथि ढूंढें, तो वह कहीं न कहीं जरूर मिल जाएगी!

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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