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बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा दो किसानों को

डोईवाला। राजीव गांधी पंचायत राज संगठन और डोईवाला किसान कांग्रेस का कहना है कि डोईवाला क्षेत्र में गेहूं और बागवानी की फसलों को बारिश से काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने डोईवाला के उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
संगठन के प्रदेश संयोजक मोहित उनियाल का कहना है कि लॉकडाउन के समय आर्थिक गतिविधियों समेत तमाम व्यवस्थाएं बाधित हैं। देश में कृषि और किसानों का योगदान हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। किसान अपने परिवार के साथ-साथ जनता के लिए दिन रात खेतों में कार्य कर रहे हैं। उनको होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई आवश्यक रूप से की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले क्षेत्र में भारी बारिश की वजह से गेहूं व बागवानी की फसल को भारी नुकसान हुआ है । गेहूं की कटी हुई फसल बर्बाद हो गई। डोईवाला कृषि विभाग की रिपोर्ट में गेहूं की करीब 75 फीसदी खेती को नुकसान
दिखाया गया है, लेकिन राजस्व विभाग की रिपोर्ट में सिर्फ सात से दस फीसदी ही नुकसान का अंदेशा जताया गया है।
ज्ञापन में उनियाल ने कहा कि डोईवाला क्षेत्र के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से डोईवाला क्षेत्र में कृषि को हुए नुकसान का राजस्व विभाग से पुनः सर्वे कराने की मांग की। वहीं डोईवाला किसान कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष उमेद वोहरा ने कहा कि संकट की घड़ी में पूरा देश किसानों के भरोसे है। सरकार को किसानों के हितों का ध्यान रखना चाहिए।उन्होंने किसानों को जल्द से जल्द नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। इस मौके पर एनएसयूआई के डोईवाला विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष सावन राठौर भी उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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