सांस के स्वरूप को पहचानकर पेप्टिक अल्सर का निदान !

Rajesh Pandey

वर्तमान में, पेप्टिक अल्सर रोग एक महत्वपूर्ण चिकित्सा समस्या है, जिस पर पूरी दुनिया में विशेष ध्यान दिया गया है। इस बीमारी के विकास के लिए हेलिकोबैक्टर पाइलोरी जीवाणु संक्रमण को सबसे महत्वपूर्ण खतरे का कारक माना जाता है।

पारंपरिक दर्दनाक और आक्रामक एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं तीव्र शुरुआत और पेप्टिक अल्सर की प्रगति के साथ साथ विभिन्न गैस्ट्रिक जटिलताओं का शुरू में ही पता लगाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, कोलकाता में प्रो. माणिक प्रधान और उनकी शोध टीम ने स्वरूप मान्यता आधारित क्लस्टरिंग दृष्टिकोण का उपयोग किया, जो स्वस्थ व्यक्तियों के साथ अल्सर और अन्य गैस्ट्रिक स्थितियों के साथ पेप्टिक की श्वांस को चुनिंदा रूप से अलग कर सकता है।

टीम ने मशीन लर्निंग (एमएल) प्रोटोकॉल का उपयोग किया, ताकि श्वांस के विश्लेषण से उत्पन्न बड़े जटिल ब्रीथोमिक्स डेटा सेट से सही जानकारी निकाली जा सके।

यूरोपियन जर्नल ऑफ मास स्पेक्ट्रोस्कोपी में प्रकाशित एक लेख में, उन्होंने अद्वितीय श्वांस-स्वरूप, सांसोग्राम और “श्वांस के निशान” हस्ताक्षरों को पहचानने के लिए क्लस्टरिंग दृष्टिकोण को लागू किया। इसने एक व्यक्ति की विशिष्ट गैस्ट्रिक स्थिति के स्पष्ट प्रतिबिंब के साथ-साथ तीन अलग-अलग खतरनाक क्षेत्रों के साथ प्रारंभिक और बाद के चरण की गैस्ट्रिक स्थितियों के भेदभाव और एक रोग चरण से दूसरे चरण में सटीक संक्रमण में मदद की।

रोगियों से उत्पन्न श्वांस -स्वरूप रोगी की बेसल चयापचय दर (बीएमआर) और उम्र, लिंग, धूम्रपान की आदतों, या जीवन शैली जैसे अन्य जटिल कारकों के अलावा हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित एसएन बोस सेंटर में तकनीकी अनुसंधान केंद्र (टीआरसी) में किए गए शोध में परियोजना विद्यार्थी सुश्री  सयोनी भट्टाचार्य और परियोजना वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत मैती और डॉ. अनिल महतो शामिल थे, जिन्होंने एएमआरआई अस्पताल, कोलकाता में प्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिक और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सुजीत चौधरी के सहयोग से काम किया था।

वैज्ञानिकों ने “पायरो ब्रीथ” नामक एक प्रोटोटाइप उपकरण विकसित किया है, जिसे अस्पताल के वातावरण में चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्रदान की गई है और इसका पेटेंट कराया गया है। संभावित व्यावसायीकरण के लिए संबंधित प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) नई दिल्ली के माध्यम से एक स्टार्टअप कंपनी को हस्तांतरित किया गया है

यह आरंभिक पहचान, चयनात्मक वर्गीकरण और विभिन्न गैस्ट्रिक जटिलताओं की प्रगति के आकलन के लिए नए गैर-नवेसिव मार्ग खोल सकता है और शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की व्यापक जांच में सहायता कर सकता है।- पीआईबी

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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