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रगड़ गांव (सकलाना) इंटर कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

विद्यालय परिसर में प्रधानाचार्य परमानंद सकलानी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया

टिहरी गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल जिले के जौनपुर ब्लाक स्थित रगड़ गांव (सकलाना) के राजकीय इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। बच्चों ने शिक्षक-शिक्षिकाओं के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्य परमानंद सकलानी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया।

रगड़गांव में देहरादून के रायपुर ब्लॉक तथा टिहरी गढ़वाल के जौनपुर व चंबा ब्लाक के बच्चे पढ़ने आते हैं। अतिदुर्गम स्थित इस विद्यालय में विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों कुंड, हल्द्वाड़ी, बमेंडी गांव, एरल गांव, तौलिया काटल, सैरा गांव, पसनी, घुड़साल सहित 11 गांवों से बच्चे आते हैं। इनमें कुंड गांव लगभग 12 किमी. दूर है। बड़ी संख्या में बच्चे राष्ट्रीय ध्वज के साथ विद्यालय पहुंचे। समारोह में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और अभिभावक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

विद्यालय परिसर में ध्वजारोहण के साथ शुरू समारोह में कक्षा छह से लेकर 12 तक के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। बच्चों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए बहुत उत्साह देखा गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य परमानंद सकलानी ने शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का संदेश पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता मोहित उनियाल, शिक्षक देवानंद देवली, एनएस नेगी, शौकीन सिंह, राजाराम रतूड़ी, जहीर अंसारी, संजीव आर्य, ओमप्रकाश सिंह बिष्ट, विजय सकलानी सहित विद्यालय का पूरा स्टाफ उपस्थित रहे।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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