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Reading: Video: मां मनइच्छा के चरणों से निकलती है जलधारा
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Video: मां मनइच्छा के चरणों से निकलती है जलधारा

Rajesh Pandey
Last updated: April 15, 2021 10:13 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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देहरादून की ओर से ऋषिकेश जाते समय डांडी गांव से थोड़ा आगे बाई ओर नरेंद्रनगर बाइपास दिखता है। यहां से आप सीधा नरेंद्रनगर जा सकते हैं, वो भी ऋषिकेश जाए बिना।
वनों के बीच से होते हुए नरेंद्रनगर की ओर ले जा रही यह सड़क बहुत शानदार है। सर्पीली सड़क पर नजारे बहुत शानदार हैं। हम ज्यादा आगे तो नहीं गए।
अपने मित्र और डुगडुगी के संस्थापक मोहित उनियाल के साथ करीब डेढ़ किमी. ही चले होंगे कि बाई ओर मां मनइच्छा के मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच गए।
यहां से कुछ सीढ़ियां चढ़कर आप पहुंचेंगे मां के दरबार में, जहां प्रकृति का वास है। बहुत शांत और स्वच्छ पर्यावरण में पहुंचकर सभी को अच्छा लगता है। हमने वहां पक्षियों की तरह तरह की आवाजें सुनीं और लंगूरों व बंदरों के दलों को भोजन की तलाश में या फिर मौज मस्ती के लिए पेड़ों पर उछलकूद करते हुए देखा।

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देहरादून की ओर से ऋषिकेश जाते समय डांडी गांव से थोड़ा आगे बाई ओर नरेंद्रनगर बाइपास दिखता है। यहां से आप सीधा नरेंद्रनगर जा सकते हैं, वो भी ऋषिकेश जाए बिना।वनों के बीच से होते हुए नरेंद्रनगर की ओर ले जा रही यह सड़क बहुत शानदार है। सर्पीली सड़क पर नजारे बहुत शानदार हैं। हम ज्यादा आगे तो नहीं गए।अपने मित्र और डुगडुगी के संस्थापक मोहित उनियाल के साथ करीब डेढ़ किमी. ही चले होंगे कि बाई ओर मां मनइच्छा के मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच गए।यहां से कुछ सीढ़ियां चढ़कर आप पहुंचेंगे मां के दरबार में, जहां प्रकृति का वास है। बहुत शांत और स्वच्छ पर्यावरण में पहुंचकर सभी को अच्छा लगता है। हमने वहां पक्षियों की तरह तरह की आवाजें सुनीं और लंगूरों व बंदरों के दलों को भोजन की तलाश में या फिर मौज मस्ती के लिए पेड़ों पर उछलकूद करते हुए देखा।वन तो जीवों को बसेरा होता है, इसलिए उनका अधिकार बनता है कि वो अपने घर में जितना मर्जी उछल कूद करें। वो हमारे शहर में थोड़ा हैं, जो उनको यहां नहीं घूमना, वहां नहीं घूमना, यह नहीं करना, वो नहीं करना जैसे तमाम प्रतिबंधों में रहना पड़ेगा। खैर, यहां वो स्वतंत्र हैं।हमें बताया गया कि मां मनइच्छा देवी यहां प्रतिष्ठित पिंडी के रूप में अवतरित हैं। मां की प्रतिष्ठित पिंडी पांच सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। पहले माता की पूजा अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़ के कच्चे पगडंडीनुमा रास्ते से होकर आना पड़ता था।कुछ वर्ष पहले यहां से होकर सड़क का निर्माण हुआ।सड़क से माता के मंदिर तक सीढ़ियों का निर्माण हुआ। श्रद्धालुओं के पूजा अर्चना एवं विश्राम करने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।डांडी निवासी महेंद्र बताते हैं कि मां मनइच्छा देवी रानीपोखरी न्याय पंचायत सहित डांडी, बड़कोट सहित कई गांवों की कुलदेवी हैं। हम सभी के लिए अषाढ़ माह में मंदिर में पहुंचना अनिवार्य है। हमें जब भी समय मिलता है, माता के दर्शन के लिए यहां पहुंच जाते हैं।गांवों में सभी शुभकार्यों के लिए मां की अनुमति जरूरी है। नवरात्र में यहां भंडारा लगता है। दूरदराज से भी श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं।मंदिर में पूजा अर्चना एवं देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे पंडित हर्षमणि नौटियाल बताते हैं कि भक्ति में भाव की प्रधानता होती है। आप कहीं भी हों, सच्चे मन से माता का भावपूर्ण स्मरण करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होती है।उन्होंने बताया कि मंदिर में माता के चरणों से जलधारा निकलती है। इसी जल से मंदिर में भंडारा से लेकर सभी कार्य संपन्न होते हैं। यहां आसपास पानी के लिए कोई ट्यूबवैल, पाइप लाइन जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।पंडित हर्षमणि बताते हैं कि पूर्व में भूगर्भ वैज्ञानिक यहां आए थे, उन्होंने इस पहाड़ पर कुछ यंत्रों की सहायता से अध्ययन के बाद बताया कि इस भूमि पर आसपास जल की संभावना नहीं है। यहां जलधारा निकलना आश्चर्य की बात है।उन्होंने बताया कि यहां जीवों एवं पक्षियों की विविधता है। यहां रात्रि में एक विशाल जीव आता है, जिसकी पूंछ काफी लंबी है। हमारे यहां अरविंद शास्त्री उस जीव की पूंछ को खींचते हैं।पंडित हर्षमणि के अनुसार, मां मनइच्छा देवी के मंदिर में प्रतिदिन 41 दिन तक आकर दर्शन करने औऱ सच्चे मन से की गई मनोकामना पूर्ण होती है।इस दौरान माता की सांयकाल आरती में शामिल होना, हम सभी के लिए आनंददायक रहा। घंटियों और शंख की ध्वनि की गूंज ने मन को भक्तिभाव से परिपूर्ण कर दिया।साईं बाबा के मंदिर से शुरू हुआ आरती एवं पूजन का क्रम मां दुर्गा मंदिर, श्री हनुमान मंदिर एवं श्री शिव मंदिर से होता हुआ मां मनइच्छा के मंदिर में संपन्न हुआ। मंदिर परिसर से दूर तक वनों की हरियाली और पर्वत श्रृंख्ला को देखने का अनुभव बहुत शानदार रहा है।मंदिर परिसर से थोड़ा ऊंचाई पर सीढ़ियां चढ़कर आप पहुंच सकते हैं भैरव बाबा जी की गुफा तक। जहां आपको प्रज्ज्वलित ज्योति के दर्शन होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।ध्यान रखें, मंदिर परिसर में पॉलीथिन न ले जाएं। वहां स्वच्छता का ध्यान रखें। मां के मंदिर में बिना इजाजत फोटोग्राफी न करें। मंदिर में मां मनइच्छा की मूर्ति का फोटो खींचना मना है। मंदिर में चमड़े से बनी वस्तुएं बेल्ट, पर्स आदि ले जाना मना है। मंदिर समिति के नियमों का पालन करना हम सभी का कर्तव्य बनता है।आपको जब भी शांत औऱ प्रकृति के वातावरण में आने का मन करे, तो मां मनइच्छा के दरबार में हाजिरी लगाइएगा, आपका मन शांति एवं आनंद से भरपूर होगा। हमने तो ऐसा महसूस किया है।Keywords: ऋषिकेश शहर, मां मनइच्छा देवी, उत्तराखंड के मंदिर, भारत के प्राचीन मंदिर, भारत की विरासत, Temples of Uttarakhand, TEMPLES OF WORLD, Temples Of India, Worldwide Hindu Temples, ॐ, Temples Of India
वन तो जीवों को बसेरा होता है, इसलिए उनका अधिकार बनता है कि वो अपने घर में जितना मर्जी उछल कूद करें। वो हमारे शहर में थोड़ा हैं, जो उनको यहां नहीं घूमना, वहां नहीं घूमना, यह नहीं करना, वो नहीं करना जैसे तमाम प्रतिबंधों में रहना पड़ेगा। खैर, यहां वो स्वतंत्र हैं।
हमें बताया गया कि मां मनइच्छा देवी यहां प्रतिष्ठित पिंडी के रूप में अवतरित हैं। मां की प्रतिष्ठित पिंडी पांच सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। पहले माता की पूजा अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़ के कच्चे पगडंडीनुमा रास्ते से होकर आना पड़ता था।

तक धिना धिनः वाकई कमाल का था यह भ्रमण

कुछ वर्ष पहले यहां से होकर सड़क का निर्माण हुआ।सड़क से माता के मंदिर तक सीढ़ियों का निर्माण हुआ। श्रद्धालुओं के पूजा अर्चना एवं विश्राम करने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

 

डांडी निवासी महेंद्र बताते हैं कि मां मनइच्छा देवी रानीपोखरी न्याय पंचायत सहित डांडी, बड़कोट सहित कई गांवों की कुलदेवी हैं। हम सभी के लिए अषाढ़ माह में मंदिर में पहुंचना अनिवार्य है। हमें जब भी समय मिलता है, माता के दर्शन के लिए यहां पहुंच जाते हैं।
गांवों में सभी शुभकार्यों के लिए मां की अनुमति जरूरी है। नवरात्र में यहां भंडारा लगता है। दूरदराज से भी श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं।
मंदिर में पूजा अर्चना एवं देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे पंडित हर्षमणि नौटियाल बताते हैं कि भक्ति में भाव की प्रधानता होती है। आप कहीं भी हों, सच्चे मन से माता का भावपूर्ण स्मरण करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होती है।
उन्होंने बताया कि मंदिर में माता के चरणों से जलधारा निकलती है। इसी जल से मंदिर में भंडारा से लेकर सभी कार्य संपन्न होते हैं। यहां आसपास पानी के लिए कोई ट्यूबवैल, पाइप लाइन जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
पंडित हर्षमणि बताते हैं कि पूर्व में भूगर्भ वैज्ञानिक यहां आए थे, उन्होंने इस पहाड़ पर कुछ यंत्रों की सहायता से अध्ययन के बाद बताया कि इस भूमि पर आसपास जल की संभावना नहीं है। यहां जलधारा निकलना आश्चर्य की बात है।

उन्होंने बताया कि यहां जीवों एवं पक्षियों की विविधता है। यहां रात्रि में एक विशाल जीव आता है, जिसकी पूंछ काफी लंबी है। हमारे यहां अरविंद शास्त्री उस जीव की पूंछ को खींचते हैं।
पंडित हर्षमणि के अनुसार, मां मनइच्छा देवी के मंदिर में प्रतिदिन 41 दिन तक आकर दर्शन करने औऱ सच्चे मन से की गई मनोकामना पूर्ण होती है।
इस दौरान माता की सांयकाल आरती में शामिल होना, हम सभी के लिए आनंददायक रहा। घंटियों और शंख की ध्वनि की गूंज ने मन को भक्तिभाव से परिपूर्ण कर दिया।
साईं बाबा के मंदिर से शुरू हुआ आरती एवं पूजन का क्रम मां दुर्गा मंदिर, श्री हनुमान मंदिर एवं श्री शिव मंदिर से होता हुआ मां मनइच्छा के मंदिर में संपन्न हुआ। मंदिर परिसर से दूर तक वनों की हरियाली और पर्वत श्रृंख्ला को देखने का अनुभव बहुत शानदार रहा है।
मंदिर परिसर से थोड़ा ऊंचाई पर सीढ़ियां चढ़कर आप पहुंच सकते हैं भैरव बाबा जी की गुफा तक। जहां आपको प्रज्ज्वलित ज्योति के दर्शन होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
ध्यान रखें, मंदिर परिसर में पॉलीथिन न ले जाएं। वहां स्वच्छता का ध्यान रखें। मां के मंदिर में बिना इजाजत फोटोग्राफी न करें। मंदिर में मां मनइच्छा की मूर्ति का फोटो खींचना मना है। मंदिर में चमड़े से बनी वस्तुएं बेल्ट, पर्स आदि ले जाना मना है। मंदिर समिति के नियमों का पालन करना हम सभी का कर्तव्य बनता है।
आपको जब भी शांत औऱ प्रकृति के वातावरण में आने का मन करे, तो मां मनइच्छा के दरबार में हाजिरी लगाइएगा, आपका मन शांति एवं आनंद से भरपूर होगा। हमने तो ऐसा महसूस किया है।
Keywords: ऋषिकेश शहर, मां मनइच्छा देवी, उत्तराखंड के मंदिर, भारत के प्राचीन मंदिर, भारत की विरासत, Temples of Uttarakhand, TEMPLES OF WORLD, Temples Of India, Worldwide Hindu Temples, ॐ, Temples Of India

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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