नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कोरोना संक्रमण पर प्रकाशित एक लेख को जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए अपनी सफाई पेश की है। मंत्रालय ने उन बच्चों का डाटा भी पेश किया है, जो कोविड-19 संक्रमण से प्रभावित हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अब तक डेटा पोर्टल (बाल स्वराज) पर 1,53,827 बच्चों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 1,42,949 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है, 492 बच्चे अकेले हो गए और 10,386 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।
मंत्रालय के अनुसार, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से फील्ड डेटा आ रहा है और इसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और निगरानी में संकलित किया जा रहा है। इसके अनुसार भारत में यह आंकड़ा करीब 1.53 लाख है। इन आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कोविड-19 संक्रमण में 156 बच्चे अनाथ हो गए। वहीं राज्य में 3568 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे ऐसे हर बच्चे की पहचान करें, जिसने कोविड के दौरान महामारी काल की अवधि में किसी भी वजह (कोविड या अन्य) से अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है या अकेले हो गए हैं। महामारी की अवधि के दौरान माता-पिता की मौत कोविड, प्राकृतिक, अप्राकृतिक या किसी अन्य कारण से हो सकती है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 109 के तहत एक निगरानी प्राधिकरण के रूप में अपने कार्य को आगे बढ़ाते हुए ‘बाल स्वराज‘ नामक एक पोर्टल तैयार किया है, जहां इस डेटा को अपलोड किया गया है। एनसीपीसीआर लगातार उन सभी बच्चों पर नजर रख रहा है, जिन्होंने किसी भी वजह से माता-पिता (दोनों या किसी एक) को खो दिया है और एक अप्रैल 2020 से अकेले हो गए हैं।
हर बच्चे के डेटा/सूचना को इकट्ठा करने के बाद उसे सत्यापित किया जाता है, जिससे ऐसे सभी बच्चों को उचित देखभाल, सुरक्षा और लाभ प्रदान किया जा सके। अब तक पोर्टल पर 1,53,827 बच्चों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 1,42,949 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है, 492 बच्चे अकेले हो गए और 10,386 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।
15 फरवरी 2022 की स्थिति के अनुसार
उन बच्चों का विवरण, जिन्होंने कोविड या किसी अन्य कारण से अपने माता-पिता या अभिभावक को खो दिया है
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | अनाथ | एकल अभिभावक | परित्यक्त | कुल |
| अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | 7 | 267 | 0 | 274 |
| आंध्र प्रदेश | 418 | 8445 | 4 | 8867 |
| अरुणाचल प्रदेश | 41 | 356 | 0 | 397 |
| असम | 160 | 1918 | 1 | 2079 |
| बिहार | 313 | 2002 | 0 | 2315 |
| चंडीगढ़ | 12 | 145 | 0 | 157 |
| छत्तीसगढ़ | 156 | 318 | 10 | 484 |
| दादरा एवं नगर हवेली और दमन व दीव | 16 | 312 | 0 | 328 |
| दिल्ली | 318 | 6438 | 1 | 6757 |
| गोवा | 8 | 76 | 0 | 84 |
| गुजरात | 1210 | 13724 | 0 | 14934 |
| हरियाणा | 127 | 3582 | 3 | 3712 |
| हिमाचल प्रदेश | 152 | 3074 | 3 | 3229 |
| जम्मू और कश्मीर | 23 | 637 | 0 | 660 |
| झारखंड | 141 | 1319 | 2 | 1462 |
| कर्नाटक | 573 | 4512 | 13 | 5098 |
| केरल | 113 | 3673 | 29 | 3815 |
| लद्दाख | 2 | 112 | 0 | 114 |
| लक्षद्वीप | 1 | 71 | 0 | 72 |
| मध्य प्रदेश | 1794 | 5509 | 359 | 7662 |
| महाराष्ट्र | 718 | 19707 | 4 | 20429 |
| मणिपुर | 20 | 261 | 3 | 284 |
| मेघालय | 18 | 111 | 6 | 135 |
| मिजोरम | 13 | 140 | 0 | 153 |
| नगालैंड | 9 | 142 | 5 | 156 |
| ओडिशा | 1617 | 24697 | 4 | 26318 |
| पुदुचेरी | 12 | 377 | 0 | 389 |
| पंजाब | 71 | 1377 | 0 | 1448 |
| राजस्थान | 714 | 6098 | 18 | 6830 |
| सिक्किम | 0 | 36 | 0 | 36 |
| तमिल नाडु | 339 | 11567 | 2 | 11908 |
| तेलंगाना | 253 | 2044 | 1 | 2298 |
| त्रिपुरा | 17 | 45 | 1 | 63 |
| उत्तर प्रदेश | 554 | 9748 | 15 | 10317 |
| उत्तराखंड | 156 | 3568 | 0 | 3724 |
| पश्चिम बंगाल | 290 | 6541 | 8 | 6839
|
| कुल | 10386 | 142949 | 492 | 153827 |
सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को ऐसे सभी बच्चों के डेटा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। एनसीपीसीआर पोर्टल पर दर्ज किए जा रहे डेटा की जांच करता है और नियमित रूप से जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों के साथ आवश्यक संवाद स्थापित करता है। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में, एनसीपीसीआर नियमित रूप से न्यायालय को अपडेट करने के लिए हलफनामा दाखिल करता है।- इनपुट पीआईबी से लिया है।













