Millet Based Laddoos Health Benefits: एम्स ऋषिकेश के अध्ययन में खुलासा, मिलेट्स आधारित लड्डू बढ़ाते हैं महिलाओं में आयरन और कैल्शियम

Rajesh Pandey
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला के एक खेत में टोकरी में रखी मंडुआ की फसल। फोटो- सक्षम पांडेय

  • दैनिक आहार में मोटे अनाज के समावेश से हीमोग्लोबिन और सीरम फेरिटिन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

Millet Based Laddoos Health Benefits: ऋषिकेश, 13 जनवरी 2026: एम्स ऋषिकेश द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मिलेट्स (मोटा अनाज) आधारित लड्डुओं का सेवन युवा महिलाओं में आयरन और कैल्शियम के स्तर को सुधारने का एक प्रभावी और किफायती जरिया है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस शोध के निष्कर्षों की सराहना करते हुए इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।

संस्थान के काॅलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिन्सिपल प्रो. डॉ. स्मृति अरोड़ा के नेतृत्व में किए गए इस शोध टीम में शरीर क्रिया विज्ञान विभाग से डाॅ. पूर्वी कुलश्रेष्ठ, सीएफएम से डाॅ. रंजीता, नर्सिंग फेकल्टी डाॅ. जेवियर वेल्सियाल और न्यूट्रीशियन फाॅसिया मदाला शामिल थे।

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Millet Based Laddoos Health Benefits: शोध की कार्यप्रणाली: संस्थान के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. स्मृति अरोड़ा के नेतृत्व में यह अध्ययन हॉस्टल में रहने वाली 18 से 23 वर्ष की 100 से अधिक स्नातक नर्सिंग छात्राओं पर किया गया। प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित किया गया था:

  1. प्रायोगिक समूह: जिन्हें 90 दिनों तक नियमित आहार के साथ प्रतिदिन 50 ग्राम मिलेट-आधारित लड्डू दिया गया।

  2. नियंत्रण समूह: जिन्हें केवल सामान्य हॉस्टल आहार दिया गया।

विशेषज्ञों द्वारा तैयार इन लड्डुओं में मुख्य रूप से रागी (फिंगर मिलेट), भुना हुआ चना, गुड़ और घी का उपयोग किया गया था।

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Millet Based Laddoos Health Benefits: अध्ययन के निष्कर्ष: तीन महीने के शोध के बाद यह पाया गया कि मिलेट लड्डू का सेवन करने वाली छात्राओं के हीमोग्लोबिन, सीरम फेरिटिन और सीरम कैल्शियम के स्तर में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। इसके विपरीत, सामान्य आहार लेने वाली छात्राओं के पोषण स्तर में कोई सुधार नहीं देखा गया, बल्कि उनमें सीरम फेरिटिन का स्तर कम पाया गया। शोध की एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि लड्डुओं के सेवन से छात्राओं के बॉडी मास इंडेक्स (BMI) या शरीर की संरचना पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए वरदान: AIIMS Rishikesh के अनुसार, हॉस्टल में रहने वालीं छात्राएं अक्सर अनियमित आहार और मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव के कारण सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की कमी के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।

यह अध्ययन सिद्ध करता है कि मिलेट्स न केवल किफायती हैं, बल्कि बिना वजन बढ़ाए पोषण की कमी को दूर करने का एक स्थायी समाधान भी हैं। इस निष्कर्ष के आधार पर, सामुदायिक पोषण कार्यक्रमों, स्कूलों और हॉस्टलों की भोजन योजनाओं में मिलेट्स आधारित स्नैक्स को शामिल करने की पुरजोर सिफारिश की गई है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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