कोरोना संक्रमण के दौरान उत्तराखंड में 156 बच्चों ने माता-पिता को खो दिया

Rajesh Pandey
संकेतात्मक चित्र
नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कोरोना संक्रमण पर प्रकाशित एक लेख को जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए अपनी सफाई पेश की है। मंत्रालय ने उन बच्चों का डाटा भी पेश किया है, जो कोविड-19 संक्रमण से प्रभावित हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अब तक डेटा पोर्टल (बाल स्वराज) पर 1,53,827 बच्चों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 1,42,949 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है, 492 बच्चे अकेले हो गए और 10,386 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।
मंत्रालय के अनुसार, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से फील्ड डेटा आ रहा है और इसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और निगरानी में संकलित किया जा रहा है। इसके अनुसार भारत में यह आंकड़ा करीब 1.53 लाख है। इन आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कोविड-19 संक्रमण में 156 बच्चे अनाथ हो गए। वहीं राज्य में 3568 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे ऐसे हर बच्चे की पहचान करें, जिसने कोविड के दौरान महामारी काल की अवधि में किसी भी वजह (कोविड या अन्य) से अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है या अकेले हो गए हैं। महामारी की अवधि के दौरान माता-पिता की मौत कोविड, प्राकृतिक, अप्राकृतिक या किसी अन्य कारण से हो सकती है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 109 के तहत एक निगरानी प्राधिकरण के रूप में अपने कार्य को आगे बढ़ाते हुए बाल स्वराज नामक एक पोर्टल तैयार किया है, जहां इस डेटा को अपलोड किया गया है। एनसीपीसीआर लगातार उन सभी बच्चों पर नजर रख रहा है, जिन्होंने किसी भी वजह से माता-पिता (दोनों या किसी एक) को खो दिया है और एक अप्रैल 2020 से अकेले हो गए हैं।
हर बच्चे के डेटा/सूचना को इकट्ठा करने के बाद उसे सत्यापित किया जाता है, जिससे ऐसे सभी बच्चों को उचित देखभाल, सुरक्षा और लाभ प्रदान किया जा सके। अब तक पोर्टल पर 1,53,827 बच्चों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 1,42,949 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है, 492 बच्चे अकेले हो गए और 10,386 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।

 

15 फरवरी 2022 की स्थिति के अनुसार

उन बच्चों का विवरणजिन्होंने कोविड या किसी अन्य कारण से अपने माता-पिता या अभिभावक को खो दिया है

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशअनाथएकल अभिभावकपरित्यक्तकुल
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह72670274
आंध्र प्रदेश418844548867
अरुणाचल प्रदेश413560397
असम160191812079
बिहार313200202315
चंडीगढ़121450157
छत्तीसगढ़15631810484
दादरा एवं नगर हवेली और दमन व दीव163120328
दिल्ली318643816757
गोवा876084
गुजरात121013724014934
हरियाणा127358233712
हिमाचल प्रदेश152307433229
जम्मू और कश्मीर236370660
झारखंड141131921462
कर्नाटक5734512135098
केरल1133673293815
लद्दाख21120114
लक्षद्वीप171072
मध्य प्रदेश179455093597662
महाराष्ट्र71819707420429
मणिपुर202613284
मेघालय181116135
मिजोरम131400153
नगालैंड91425156
ओडिशा161724697426318
पुदुचेरी123770389
पंजाब71137701448
राजस्थान7146098186830
सिक्किम036036
तमिल नाडु33911567211908
तेलंगाना253204412298
त्रिपुरा1745163
उत्तर प्रदेश55497481510317
उत्तराखंड156356803724
पश्चिम बंगाल290654186839

 

कुल10386142949492153827

 

सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को ऐसे सभी बच्चों के डेटा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। एनसीपीसीआर पोर्टल पर दर्ज किए जा रहे डेटा की जांच करता है और नियमित रूप से जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों के साथ आवश्यक संवाद स्थापित करता है। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में, एनसीपीसीआर नियमित रूप से न्यायालय को अपडेट करने के लिए हलफनामा दाखिल करता है।-  इनपुट पीआईबी से लिया है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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