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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

कबीले में चुनाव-6: गुणी महाराज के सियासी गुण दिखने लगे

राजेश पांडेय छठें दिन की मुलाकात के लिए खरगोश अपने फुंकनी यंत्र के साथ मैदान की ओर दौड़ लगा रहा है। अचानक फुंकनी यंत्र से नई तरह की ध्वनि आती…

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कबीले में चुनाव-5ः देवता के यहां भी सियासत कर आए अक्कड़ महाराज

राजेश पांडेय पांचवें दिन की मुलाकात में खरगोश बोला, मेरे फुंकनी यंत्र ने एक और नई शक्ति प्राप्त कर ली है। यह अब जिसे चाहो, दिखा सकता है। कोई क्या…

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एक मुलाकातः घने जंगल में रहती हैं चांद पर दिखने वाली बूढ़ी मां

राजेश पांडेय बचपन से सुनता आया हूं, चांद पर एक बूढ़ी मां रहती हैं, जो चरखा चलाती हैं। कहानियां सुनाने वाले हमसे कहते थे, जब भी बूढ़ी मां को याद…

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कबीले में चुनाव-4ः बड़े महाराज की भट्टी पर पानी फेंक गए बड़कू महाराज

राजेश पांडेय जैसे-जैसे कबीले में चुनाव के लिए सियासी माहौल बदलता जा रहा है, वैसे ही ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं के लिए खरगोश और हिरन की उत्सुकता भी बढ़ रही…

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कबीले में चुनाव-3ः बड़बोले महाराज ने बगावत नहीं, सियासत की है

राजेश पांडेय तीसरे दिन की मुलाकात में हिरन बड़ी उत्सुकता से खरगोश से पूछता है, यार तुम्हारा फुंकनी यंत्र क्या बता रहा है। खरगोश बोला, फुंकनी यंत्र बड़े काम की…

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कबीले में चुनाव-2ः भट्टी पर खाली बर्तन चढ़ाकर छोंक लगा रहे बड़े महाराज

राजेश पांडेय खरगोश और हिरन की दूसरे दिन की मुलाकात होती है। हिरन बोला, आज कुछ नया। खरगोश ने कहा, नया क्या, वही बगावत, बगावत का शोर मचा है कबीले…

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कबीले में चुनाव-1ः सत्ता, सियासत और बगावत

राजेश पांडेय़ पहाड़ से लेकर मैदान तक विस्तार लिए उत्तराखंड का प्राकृतिक सौंदर्य पूरी दुनिया को लुभाता है। यहां पर जन्मीं कई नदियां देश के लिए उपहार हैं। उत्तराखंड के…

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Video: अपने जन्म से शाकाहारी नहीं है आलू वाला समोसा…

राजेश पांडेय जब तक रहेगा समोसे में आलू, तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू… यह अक्षय कुमार की एक फिल्म का गाना है, जिससे समोसे में आलू की अहमियत का पता…

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गायों को बचाने के लिए पुष्पा नेगी से कुछ सीखिए

मेरे एक मित्र ने कहा, अठूरवाला की पुष्पा नेगी, गायों पर बड़ा काम कर रही हैं। मेरा सीधा सवाल था, क्या वो डेयरी फार्मिंग कर रही हैं या फिर सड़कों पर…

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हकीकत ए उत्तराखंडः मैं सच में नहीं जानती, नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को !

धौलखंड नदी की तपती रेत पर खड़े होकर भाबड़ से बान बनाई जा रही है। कड़ी धूप में दिनभर पसीने बहाने के बाद, इतना भी नहीं बचता कि दो वक्त…

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हकीकत ए उत्तराखंडः इस आबादी का न तो कोई गांव है और न ही कोई शहर

पचास साल से भी ज्यादा वक्त गुजार दिया हमारे पूर्वजों ने जंगलों की परवरिश करने में, पर उन्हें क्या पता था कि उनकी पीढ़ियां इन्हीं जंगलों के बीच घिरकर वर्षों…

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जानिए, इस मंदिर परिसर में जल स्रोत और संरक्षण के उपाय

मनइच्छा मंदिर परिसर स्थित भैरव गुफा की चट्टान से निरंतर रिसता जल सहित अन्य जल स्रोतों से प्राप्त जल का प्रबंधन सीखने लायक है। वहीं निरंतर जल प्रवाह से भैरो…

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हम शर्मिंदा हैंः इसलिए बच्चों के साथ बैग लेकर स्कूल तक आठ किमी. पैदल चले

राजेश पांडेय देहरादून के पर्वतीय गांवों के बच्चों की पीड़ा को महसूस करने के लिए हम उनके साथ, गांव से स्कूल तक करीब आठ किमी. पैदल चले। हम इन बच्चों…

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खबरों के लिए आपको बहुत कुछ झेलना पड़ता है

निगाहें झुकाने वाला कोई काम नहीं करिएगा हम बात कर रहे थे कि अखबारों की प्रतिस्पर्धा में कुछ रिपोर्टर्स के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ने की। इसके पीछे किन लोगों का हाथ…

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हाल ए हल्द्वाड़ीः “बचपन से सुन रहे हैं कि हमारे गांव तक रोड आएगी, रोड आएगी…,पर यह कब आएगी”

” मैं उस रात को कभी नहीं भूल सकता। बहुत तेज बारिश हो रही थी। गांव से सड़क तक जाने वाला कच्चा रास्ता बंद हो गया था। मेरी पत्नी प्रसव पीड़ा…

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कहां गया जल, नलों की टोंटियां घुमाकर रोज देखता है देहरादून का हल्द्वाड़ी गांव

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव “डेढ़ साल पहले लगे नल में कभी पानी नहीं देखा। हमारे यहां पानी की बहुत दिक्कत है। घर में, मैं और पति रहते हैं, मेरे पैरों…

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पलेड की चढ़ाई ने मेरी सांसें फुला दीं, बच्चे तो 16 किमी. रोज चलते हैं

” मेरा भाई,कक्षा सात में पढ़ता है, उसको स्कूल जाने और आने के लिए करीब 16 किमी. पैदल चलना पड़ता है। स्कूल से घर आने पर वह थक जाता है।…

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हकीकत ए उत्तराखंडः सचिवालय में लड़वाकोट का पत्थर रख दें तो क्या सचिवालय लड़वाकोट हो जाएगा

उत्तराखंड का सरकारी सिस्टम इतना गजब का है कि अगर लड़वाकोट को सचिवालय और सचिवालय को लड़वाकोट के पास लाना हो तो मिनट नहीं लगाएगा। अब आप पूछोगे कि लड़वाकोट…

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