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NEWSLIVE24x7 > Blog > Agriculture > Uttarakhand की इस डेयरी में गोबर से बिजली बनती है
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Uttarakhand की इस डेयरी में गोबर से बिजली बनती है

Rajesh Pandey
Last updated: December 19, 2021 5:46 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
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राजेश पांडेय। न्यूज लाइव ब्लॉग
गोबर (Gobar) से बिजली बनाई जाती है, मैंने पहले कई बार सुना था, पर नकरौंदा (Nakraunda) में प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर (Progressive Dairy Farmer) शरद शर्मा (Sharad Sharma) ऐसा काफी समय से कर रहे हैं। बिजली जाने पर करीब दो से तीन घंटे गोबर गैस से जेनरेटर चलाते हैं और मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट (Milk Processing Unit) और अन्य आवश्यक कार्य बिना किसी बाधा के चलते हैं। उनका कहना है, गोबर के बहुत सारे लाभकारी (Benefits of Gobar) एवं आय बढ़ाने के उपाय (Income generations activities) कर सकते हैं।

गोबर से बिजली बनाने के बारे में जानने के लिए पूरा वीडियो देखें-

Contents
राजेश पांडेय। न्यूज लाइव ब्लॉगगोबर (Gobar) से बिजली बनाई जाती है, मैंने पहले कई बार सुना था, पर नकरौंदा (Nakraunda) में प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर (Progressive Dairy Farmer) शरद शर्मा (Sharad Sharma) ऐसा काफी समय से कर रहे हैं। बिजली जाने पर करीब दो से तीन घंटे गोबर गैस से जेनरेटर चलाते हैं और मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट (Milk Processing Unit) और अन्य आवश्यक कार्य बिना किसी बाधा के चलते हैं। उनका कहना है, गोबर के बहुत सारे लाभकारी (Benefits of Gobar) एवं आय बढ़ाने के उपाय (Income generations activities) कर सकते हैं।नकरौंदा, उत्तराखंड (Uttarakhand) के देहरादून जिला में आता है। देहरादून से हरिद्वार जाते समय श्री लक्ष्मण सिद्ध मंदिर से पहले बाईं ओर से नकरौंदा जा सकते हैं। शरद शर्मा को डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) में लगभग 20 साल से ज्यादा हो गए हैं। इससे पहले वर्षों फूलों की खेती (Floriculture) की, जिसको अन्य फसलों की तुलना में ज्यादा लाभकारी बताते हैं, पर इसमें बहुत सारी सावधानियां बरतनी होती हैं।“ हमारे पास वर्तमान में 200 से अधिक पशुधन (livestock) है। कहते हैं, डेयरी में दूध ही नहीं ब्लकि आय बढ़ाने में अन्य उत्पादों का भी अहम योगदान है। गोबर से आप बहुत तरह के उत्पाद तैयार कर सकते हैं। गोबर गैस प्लांट (Gobar gas plant) लगाकर बायो गैस (Biogas) से रसोई का चूल्हा जलाने के साथ बिजली भी पैदा कर सकते हैं। इसके लिए डीजल वाले जेनरेटर में कुछ बदलाव लाने होंगे यानी उसको मॉडिफाई (Modification of diesel generation) करना होगा,” शरद शर्मा बताते हैं।राज्य बनने से पहले से ही उनका जैविक खेती ( Organic farming) करने वाले कृषकों में उनका पंजीकरण है। शरद शर्मा बहुत वर्षों से अपने खेतों और बाग में गोबर की खाद (dung manure) इस्तेमाल करते हैं। गोबर नर्सरियों को बेचा जा सकता है।बताते हैं, गोबर से निकलने वाला पानी (slurry water) जिसको किसी उपयोग का नहीं समझा जाता, पॉली हाउस व सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जिसके परिणाम बड़े अच्छे हैं। गोबर को सूखाकर उसका पाउडर बनाकर नर्सरी में इस्तेमाल किया जाता है। इससे दीये, गमले और सजावटी आइटम बनाए जा रहे हैं। नर्सरियों की बेड बनाने में सूखा गोबर प्रयोग होता है।गोबर के बहुपयोग बताने के साथ ही, शरद शर्मा न्यूज लाइव को डेयरी फार्म पर गोबर गैस के दो बड़े चैंबर दिखाते हैं। बताते हैं यहां पैदा होने वाली बायोगैस स्टाफ की रसोई और पशुओं के लिए पानी गर्म करने सहित कई कार्यों में इस्तेमाल होती है।बताते हैं, उनका प्लान सोलर पैनल (Solar Panel) लगाकर डेयरी फार्मिंग एवं मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट (Milk Processing Unit) को रिन्युएवल एनर्जी (Renewable Energy) से चलाने का है। इस दिशा में काम किया जा रहा है।“आपके पास बायोगैस का पर्याप्त प्रोडक्शन है तो  पूरे टाइम बिजली ले सकते हैं, पर सभी संयंत्र (Plants) और बिजली उपकरण (Electric equipment) एक साथ चलाने के लिए आवश्यक बायोगैस बनाने की क्षमता वाले बायोगैस चैंबर्स (Biogas chambers) हमारे पास नहीं हैं। हमारे पास छोटे चैंबर्स हैं।ज्यादा बायोगैस बनाने के लिए कम से कम 24 या 30 क्यूबिक फीट के चैंबर्स की आवश्यकता है। पर, यहां 20 किलोवाट के जेनरेटर से इतनी बिजली पैदा हो जाती है कि पावर कट के समय प्रोसेसिंग यूनिट बाधित नहीं होती। जेनरेटर पर ज्यादा जोर नहीं पड़े, इसलिए आवश्यक उपकरण ही चलाते हैं। ” शरद शर्मा ने जानकारी दी।वो बताते हैं, गोबर यानी बायोगैस से बिजली बनाकर गांव को सप्लाई कर सकते हैं। अगर बायोगैस को सीएनजी (Compressed Natural Gas) में कन्वर्ट करें तो इससे तो वाहन चला सकते हैं। देश में इतना पशुधन है, जिनके गोबर से बायोगैस और अन्य उत्पाद मिलने लगें तो फ्यूल की समस्या नहीं रहेगी।शरद शर्मा का कहना है कि अगर किसानों में जागरूकता पैदा की जाए तो वो गोबर से बायोगैस और अन्य उत्पाद बनाने के लिए सड़कों पर घूम रहे पशुधन को पालेंगे। इससे आयअर्जक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। गोबर की उपयोगिता के बारे में लोगों को बताना होगा। बताते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार चार या पांच रुपये किलो गोबर खरीद रही है। यहां भी इस दिशा में ऐसा होना चाहिए। Keywords: about bio gas, about bio gas plant, biogas and its production, biogas as alternative fuel, biogas as fuel, biogas production articles, biogas energy production, biogas as cooking fuel, biogas as vehicle fuel, bio gas at home, biogas generator, biogas procedure, biogas component, biogas for electricity, biogas for cooking in India

नकरौंदा, उत्तराखंड (Uttarakhand) के देहरादून जिला में आता है। देहरादून से हरिद्वार जाते समय श्री लक्ष्मण सिद्ध मंदिर से पहले बाईं ओर से नकरौंदा जा सकते हैं। शरद शर्मा को डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) में लगभग 20 साल से ज्यादा हो गए हैं। इससे पहले वर्षों फूलों की खेती (Floriculture) की, जिसको अन्य फसलों की तुलना में ज्यादा लाभकारी बताते हैं, पर इसमें बहुत सारी सावधानियां बरतनी होती हैं।
“ हमारे पास वर्तमान में 200 से अधिक पशुधन (livestock) है। कहते हैं, डेयरी में दूध ही नहीं ब्लकि आय बढ़ाने में अन्य उत्पादों का भी अहम योगदान है। गोबर से आप बहुत तरह के उत्पाद तैयार कर सकते हैं। गोबर गैस प्लांट (Gobar gas plant) लगाकर बायो गैस (Biogas) से रसोई का चूल्हा जलाने के साथ बिजली भी पैदा कर सकते हैं। इसके लिए डीजल वाले जेनरेटर में कुछ बदलाव लाने होंगे यानी उसको मॉडिफाई (Modification of diesel generation) करना होगा,” शरद शर्मा बताते हैं।
देहरादून के नकरौंदा स्थित प्रोगेसिव डेयरी फार्मर शरद शर्मा के डेयरी फार्म पर बायो गैस चैंबर। फोटो -सार्थक पांडेय
राज्य बनने से पहले से ही उनका जैविक खेती ( Organic farming) करने वाले कृषकों में उनका पंजीकरण है। शरद शर्मा बहुत वर्षों से अपने खेतों और बाग में गोबर की खाद (dung manure) इस्तेमाल करते हैं। गोबर नर्सरियों को बेचा जा सकता है।

बताते हैं, गोबर से निकलने वाला पानी (slurry water) जिसको किसी उपयोग का नहीं समझा जाता, पॉली हाउस व सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जिसके परिणाम बड़े अच्छे हैं। गोबर को सूखाकर उसका पाउडर बनाकर नर्सरी में इस्तेमाल किया जाता है। इससे दीये, गमले और सजावटी आइटम बनाए जा रहे हैं। नर्सरियों की बेड बनाने में सूखा गोबर प्रयोग होता है।
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गोबर के बहुपयोग बताने के साथ ही, शरद शर्मा न्यूज लाइव को डेयरी फार्म पर गोबर गैस के दो बड़े चैंबर दिखाते हैं। बताते हैं यहां पैदा होने वाली बायोगैस स्टाफ की रसोई और पशुओं के लिए पानी गर्म करने सहित कई कार्यों में इस्तेमाल होती है।
बताते हैं, उनका प्लान सोलर पैनल (Solar Panel) लगाकर डेयरी फार्मिंग एवं मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट (Milk Processing Unit) को रिन्युएवल एनर्जी (Renewable Energy) से चलाने का है। इस दिशा में काम किया जा रहा है।
देहरादून के नकरौंदा स्थित प्रोगेसिव डेयरी फार्मर शरद शर्मा ने बायो गैस से जेनरेटर चलाने एवं बिजली उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी । फोटो -सार्थक पांडेय
“आपके पास बायोगैस का पर्याप्त प्रोडक्शन है तो  पूरे टाइम बिजली ले सकते हैं, पर सभी संयंत्र (Plants) और बिजली उपकरण (Electric equipment) एक साथ चलाने के लिए आवश्यक बायोगैस बनाने की क्षमता वाले बायोगैस चैंबर्स (Biogas chambers) हमारे पास नहीं हैं। हमारे पास छोटे चैंबर्स हैं।
ज्यादा बायोगैस बनाने के लिए कम से कम 24 या 30 क्यूबिक फीट के चैंबर्स की आवश्यकता है। पर, यहां 20 किलोवाट के जेनरेटर से इतनी बिजली पैदा हो जाती है कि पावर कट के समय प्रोसेसिंग यूनिट बाधित नहीं होती। जेनरेटर पर ज्यादा जोर नहीं पड़े, इसलिए आवश्यक उपकरण ही चलाते हैं। ” शरद शर्मा ने जानकारी दी।
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वो बताते हैं, गोबर यानी बायोगैस से बिजली बनाकर गांव को सप्लाई कर सकते हैं। अगर बायोगैस को सीएनजी (Compressed Natural Gas) में कन्वर्ट करें तो इससे तो वाहन चला सकते हैं। देश में इतना पशुधन है, जिनके गोबर से बायोगैस और अन्य उत्पाद मिलने लगें तो फ्यूल की समस्या नहीं रहेगी।
शरद शर्मा का कहना है कि अगर किसानों में जागरूकता पैदा की जाए तो वो गोबर से बायोगैस और अन्य उत्पाद बनाने के लिए सड़कों पर घूम रहे पशुधन को पालेंगे। इससे आयअर्जक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। गोबर की उपयोगिता के बारे में लोगों को बताना होगा। बताते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार चार या पांच रुपये किलो गोबर खरीद रही है। यहां भी इस दिशा में ऐसा होना चाहिए।
  • हितेश नेगी से मुलाकातः डेयरी फार्मिंग का मतलब दूध ही नहीं है, यहां बहुत सारे लाभकारी उत्पाद हैं
  • बातें स्वरोजगार कींः बाड़ाकोटी जी से जानिए, गायों को पालने का सही तरीका
 Keywords: about bio gas, about bio gas plant, biogas and its production, biogas as alternative fuel, biogas as fuel, biogas production articles, biogas energy production,
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biogas procedure, biogas component, biogas for electricity, biogas for cooking in India

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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