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Uttarakhand की इस डेयरी में गोबर से बिजली बनती है

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव ब्लॉग
गोबर (Gobar) से बिजली बनाई जाती है, मैंने पहले कई बार सुना था, पर नकरौंदा (Nakraunda) में प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर (Progressive Dairy Farmer) शरद शर्मा (Sharad Sharma) ऐसा काफी समय से कर रहे हैं। बिजली जाने पर करीब दो से तीन घंटे गोबर गैस से जेनरेटर चलाते हैं और मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट (Milk Processing Unit) और अन्य आवश्यक कार्य बिना किसी बाधा के चलते हैं। उनका कहना है, गोबर के बहुत सारे लाभकारी (Benefits of Gobar) एवं आय बढ़ाने के उपाय (Income generations activities) कर सकते हैं।

गोबर से बिजली बनाने के बारे में जानने के लिए पूरा वीडियो देखें-

नकरौंदा, उत्तराखंड (Uttarakhand) के देहरादून जिला में आता है। देहरादून से हरिद्वार जाते समय श्री लक्ष्मण सिद्ध मंदिर से पहले बाईं ओर से नकरौंदा जा सकते हैं। शरद शर्मा को डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) में लगभग 20 साल से ज्यादा हो गए हैं। इससे पहले वर्षों फूलों की खेती (Floriculture) की, जिसको अन्य फसलों की तुलना में ज्यादा लाभकारी बताते हैं, पर इसमें बहुत सारी सावधानियां बरतनी होती हैं।
“ हमारे पास वर्तमान में 200 से अधिक पशुधन (livestock) है। कहते हैं, डेयरी में दूध ही नहीं ब्लकि आय बढ़ाने में अन्य उत्पादों का भी अहम योगदान है। गोबर से आप बहुत तरह के उत्पाद तैयार कर सकते हैं। गोबर गैस प्लांट (Gobar gas plant) लगाकर बायो गैस (Biogas) से रसोई का चूल्हा जलाने के साथ बिजली भी पैदा कर सकते हैं। इसके लिए डीजल वाले जेनरेटर में कुछ बदलाव लाने होंगे यानी उसको मॉडिफाई (Modification of diesel generation) करना होगा,” शरद शर्मा बताते हैं।
देहरादून के नकरौंदा स्थित प्रोगेसिव डेयरी फार्मर शरद शर्मा के डेयरी फार्म पर बायो गैस चैंबर। फोटो -सार्थक पांडेय
राज्य बनने से पहले से ही उनका जैविक खेती ( Organic farming) करने वाले कृषकों में उनका पंजीकरण है। शरद शर्मा बहुत वर्षों से अपने खेतों और बाग में गोबर की खाद (dung manure) इस्तेमाल करते हैं। गोबर नर्सरियों को बेचा जा सकता है।

बताते हैं, गोबर से निकलने वाला पानी (slurry water) जिसको किसी उपयोग का नहीं समझा जाता, पॉली हाउस व सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जिसके परिणाम बड़े अच्छे हैं। गोबर को सूखाकर उसका पाउडर बनाकर नर्सरी में इस्तेमाल किया जाता है। इससे दीये, गमले और सजावटी आइटम बनाए जा रहे हैं। नर्सरियों की बेड बनाने में सूखा गोबर प्रयोग होता है।
गोबर के बहुपयोग बताने के साथ ही, शरद शर्मा न्यूज लाइव को डेयरी फार्म पर गोबर गैस के दो बड़े चैंबर दिखाते हैं। बताते हैं यहां पैदा होने वाली बायोगैस स्टाफ की रसोई और पशुओं के लिए पानी गर्म करने सहित कई कार्यों में इस्तेमाल होती है।
बताते हैं, उनका प्लान सोलर पैनल (Solar Panel) लगाकर डेयरी फार्मिंग एवं मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट (Milk Processing Unit) को रिन्युएवल एनर्जी (Renewable Energy) से चलाने का है। इस दिशा में काम किया जा रहा है।
देहरादून के नकरौंदा स्थित प्रोगेसिव डेयरी फार्मर शरद शर्मा ने बायो गैस से जेनरेटर चलाने एवं बिजली उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी । फोटो -सार्थक पांडेय
“आपके पास बायोगैस का पर्याप्त प्रोडक्शन है तो  पूरे टाइम बिजली ले सकते हैं, पर सभी संयंत्र (Plants) और बिजली उपकरण (Electric equipment) एक साथ चलाने के लिए आवश्यक बायोगैस बनाने की क्षमता वाले बायोगैस चैंबर्स (Biogas chambers) हमारे पास नहीं हैं। हमारे पास छोटे चैंबर्स हैं।
ज्यादा बायोगैस बनाने के लिए कम से कम 24 या 30 क्यूबिक फीट के चैंबर्स की आवश्यकता है। पर, यहां 20 किलोवाट के जेनरेटर से इतनी बिजली पैदा हो जाती है कि पावर कट के समय प्रोसेसिंग यूनिट बाधित नहीं होती। जेनरेटर पर ज्यादा जोर नहीं पड़े, इसलिए आवश्यक उपकरण ही चलाते हैं। ” शरद शर्मा ने जानकारी दी।
वो बताते हैं, गोबर यानी बायोगैस से बिजली बनाकर गांव को सप्लाई कर सकते हैं। अगर बायोगैस को सीएनजी (Compressed Natural Gas) में कन्वर्ट करें तो इससे तो वाहन चला सकते हैं। देश में इतना पशुधन है, जिनके गोबर से बायोगैस और अन्य उत्पाद मिलने लगें तो फ्यूल की समस्या नहीं रहेगी।
शरद शर्मा का कहना है कि अगर किसानों में जागरूकता पैदा की जाए तो वो गोबर से बायोगैस और अन्य उत्पाद बनाने के लिए सड़कों पर घूम रहे पशुधन को पालेंगे। इससे आयअर्जक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। गोबर की उपयोगिता के बारे में लोगों को बताना होगा। बताते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार चार या पांच रुपये किलो गोबर खरीद रही है। यहां भी इस दिशा में ऐसा होना चाहिए।
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Working Experience –25 Years of experience in Mass Media and content writing in Hindi.     Literary work- Two books in Hindi. One of them is Jungle mei Tak Dhinaa Dhin, which is a compilation  of 18 stories based on wildlife. Another one is Zindagi ka Tak Dhinaa Dhin. This book is with 7 Stories. These Stories presents the Human lifestyle and the entire system, where we live. Both books are copyright from copyright office Government of India. I am also working on the other two books and short stories. Blog writing and real-time coverage is my passion.    Initiative- Initiate a storytelling platform Tak Dhinaa Dhin. We are working in slums and Government schools. Our aim is to motivate children to write stories. We believe that imagination is must to reach near reality. We are motivating children on our digital platform also. Dugdugi is an other initiative for Creative Kids and Youth. Conducting a pathshaala for Slum's Children. Qualification- B.Sc. (Physics, Chemistry, Math), Bachlor of Journalism and LLB  Core competence- Content writing, Reporting and Editing.

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