Yusuf and Bangu the Buffalo: बंगू केवल एक पशु नहीं, बल्कि यूसुफ के परिवार की रीढ़ रही है। उसने बरसों तक अपने दूध से परिवार का पोषण किया, लेकिन प्रकृति की मार ने उसे अचानक बेबस कर दिया। जंगल में चरते समय एक पहाड़ी ढलान से फिसलने के कारण बंगू का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। वह दर्द से कराहती जंगल में गिर पड़ी।
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पहाड़ों के कठिन रास्तों पर एक भारी-भरकम भैंस का घायल होकर गिरना, आमतौर पर उसके अंत की शुरुआत माना जाता है। कुछ लोगों ने सलाह दी कि इसे यहीं छोड़ देना चाहिए, लेकिन यूसुफ चैची का उत्तर ‘गुज्जर समुदाय की हिम्मत, हौसले और पशुओं के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है, उन्होंने कहा: “गुज्जर अपने जानवर को जंगल में मरने के लिए नहीं छोड़ता।”
Yusuf and Bangu the Buffalo: यूसुफ ने हार नहीं मानी। उन्होंने आसपास के डेरों से मदद मांगी। रस्सियों, लकड़ियों और मानवीय श्रम से, घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद बंगू को उस दुर्गम पहाड़ से नीचे उतारा गया। यह सिर्फ एक जानवर को बचाना नहीं था, बल्कि एक परिवार के सदस्य को घर वापस लाना था।
आज बंगू दूध नहीं देती और चलने-फिरने में असमर्थ है, लेकिन यूसुफ के डेरे में उसका सम्मान कम नहीं हुआ है। यूसुफ रोज़ मीलों पैदल चलकर उसके लिए ताज़ा चारा लाते हैं और पारंपरिक जड़ी-बूटियों से उसका उपचार कर रहे हैं।
यूसुफ का कहना है, “तू सिर्फ भैंस नहीं है बंगू, तू हमारी संस्कृति और हमारी गुज्जरियत है।”
यूसुफ और बंगू का रिश्ता उस अटूट भरोसे का प्रतीक है, जो आज की मशीनी दुनिया में दुर्लभ होता जा रहा है।
इस पूरी दास्तां को अमन गुज्जर ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पोस्ट किया है।
वन गुज्जर युवा ट्राइबल संगठन के प्रमुख, वन गुज्जरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले मीर हमजा ने शिवालिक क्षेत्र, सहारनपुर के इस वाकये की पुष्टि करते हुए कहा, वन गुज्जर ने पशुओं से प्रेम के लिए पहचान रखता है। पशुओं की सुरक्षा के लिए वो कोई भी जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं।













