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Yusuf and Bangu the Buffalo: जंगल में जख्मी हुई ‘अपाहिज’ भैंस को कंधों पर उठाकर घर लाए वन गुज्जर, कर रहे हैं चिकित्सा और सेवा

Rajesh Pandey
Last updated: January 4, 2026 1:23 pm
Rajesh Pandey
4 months ago
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जख्मी भैंस को कंधों पर उठाकर घर ले जाते गुज्जर। फोटो- अमन गुज्जर के सोशल मीडिया से
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Yusuf and Bangu the Buffalo: देहरादून, 04 जनवरी, 2025ः वन गुज्जरों को अपने पशुओं से बहुत प्रेम है। वो पशुओं की सेवा में पूरा जीवन बिता देते हैं। शिवालिक की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच से मानवता और वफादारी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सुकून देती है। यह कहानी है वन गुज्जर यूसुफ चैची और उनकी प्यारी गोजरी भैंस ‘बंगू’ की। बुरी तरह जख्मी भैंस को यूसुफ ने उसके हाल में जंगल में नहीं छोड़ा, बल्कि अपने साथियों की मदद से उसको कंधों पर उठाकर घर तक लेकर आए और अब उसकी सेवा कर रहे हैं।

Yusuf and Bangu the Buffalo: बंगू केवल एक पशु नहीं, बल्कि यूसुफ के परिवार की रीढ़ रही है। उसने बरसों तक अपने दूध से परिवार का पोषण किया, लेकिन प्रकृति की मार ने उसे अचानक बेबस कर दिया। जंगल में चरते समय एक पहाड़ी ढलान से फिसलने के कारण बंगू का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। वह दर्द से कराहती जंगल में गिर पड़ी।

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पहाड़ों के कठिन रास्तों पर एक भारी-भरकम भैंस का घायल होकर गिरना, आमतौर पर उसके अंत की शुरुआत माना जाता है। कुछ लोगों ने सलाह दी कि इसे यहीं छोड़ देना चाहिए, लेकिन यूसुफ चैची का उत्तर ‘गुज्जर समुदाय की हिम्मत, हौसले और पशुओं के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है, उन्होंने कहा: “गुज्जर अपने जानवर को जंगल में मरने के लिए नहीं छोड़ता।”

Yusuf and Bangu the Buffalo: यूसुफ ने हार नहीं मानी। उन्होंने आसपास के डेरों से मदद मांगी। रस्सियों, लकड़ियों और मानवीय श्रम से, घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद बंगू को उस दुर्गम पहाड़ से नीचे उतारा गया। यह सिर्फ एक जानवर को बचाना नहीं था, बल्कि एक परिवार के सदस्य को घर वापस लाना था।

आज बंगू दूध नहीं देती और चलने-फिरने में असमर्थ है, लेकिन यूसुफ के डेरे में उसका सम्मान कम नहीं हुआ है। यूसुफ रोज़ मीलों पैदल चलकर उसके लिए ताज़ा चारा लाते हैं और पारंपरिक जड़ी-बूटियों से उसका उपचार कर रहे हैं।

यूसुफ का कहना है, “तू सिर्फ भैंस नहीं है बंगू, तू हमारी संस्कृति और हमारी गुज्जरियत है।”

यूसुफ और बंगू का रिश्ता उस अटूट भरोसे का प्रतीक है, जो आज की मशीनी दुनिया में दुर्लभ होता जा रहा है।

इस पूरी दास्तां को अमन गुज्जर ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पोस्ट किया है।

वन गुज्जर युवा ट्राइबल संगठन के प्रमुख, वन गुज्जरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले मीर हमजा ने शिवालिक क्षेत्र, सहारनपुर के इस वाकये की पुष्टि करते हुए कहा, वन गुज्जर ने पशुओं से प्रेम के लिए पहचान रखता है। पशुओं की सुरक्षा के लिए वो कोई भी जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं।

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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