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Dialysis Management and Patient Safety: डायलिसिस सत्र बीच में छोड़ना किडनी रोगियों के लिए खतरनाक: एम्स ऋषिकेश

Rajesh Pandey
Last updated: March 11, 2026 6:21 pm
Rajesh Pandey
1 month ago
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Dialysis Management and Patient Safety: ऋषिकेश, 11 मार्च, 2026ः विश्व गुर्दा दिवस पर एम्स ऋषिकेश के गुर्दा रोग विभाग की ओर से आयोजित सतत मेडिकल शिक्षा (CME) में विशेषज्ञों ने डायलिसिस प्रबंधन की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि डायलिसिस के निर्धारित सत्रों (Sessions) को बीच में छोड़ना किडनी रोगियों के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकता है।

Dialysis Management and Patient Safety: सीएमई का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि एवं संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने कहा, “किडनी रोगियों के उपचार में डायलिसिस प्रक्रिया का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यह एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जिसमें प्रबंधन की मामूली सी कमी भी रोगी के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। चिकित्सा कर्मियों को इस प्रक्रिया में पूरी गंभीरता बरतनी चाहिए।”

Dialysis Management and Patient Safety: संस्थान के डीन एकेडेमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने भी सत्र को संबोधित करते हुए डायलिसिस के आधुनिक तौर-तरीकों पर प्रकाश डाला।

प्रमुख चर्चा एवं प्रशिक्षण बिंदु:

  • संक्रमण से बचाव: हीमोडायलिसिस के लिए बनाए गए ‘फिस्टुला’ वाली जगह को साफ रखने और संक्रमण (Infection) से बचाव के व्यावहारिक तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया।

  • नियमितता का महत्व: विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने बताया कि डायलिसिस का कोई भी सत्र छोड़ना शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा सकता है, जो हृदय और अन्य अंगों के लिए घातक है। इसलिए नियमित डायलिसिस अनिवार्य है।

  • पेरिटोनियल डायलिसिस: विशेषज्ञों ने बताया कि पेरिटोनियल डायलिसिस में पेट की अंदरूनी परत का उपयोग कर रक्त को फिल्टर किया जाता है। यह प्रक्रिया कम समय लेती है और आयुष्मान कार्ड के तहत भी कवर होती है।

  • क्रिटिकल केयर: आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए ‘फ्लूड मैनेजमेंट’ और डायलिसिस की सटीक डोज निर्धारित करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर जोर दिया गया।

नेफ्रोलॉजी विभाग की डॉ. शेरोन कंडारी, डॉ. दीपेश धूत और डॉ. साहिल गर्ग ने डायलिसिस के बुनियादी सिद्धांतों, वॉल्यूम मैनेजमेंट और हीमोडायलिसिस व पेरिटोनियल डायलिसिस के नैदानिक अंतरों पर तकनीकी व्याख्यान दिए।

इस अवसर पर डॉ. अंकित अग्रवाल, डॉ. लतिका चावला, डॉ. लोकेश सहित विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर्स (डॉ. अनिल, डॉ. अभय, डॉ. संदीप, डॉ. रितेश, डॉ. सायन), नर्सिंग अधिकारी और मेडिकल छात्र उपस्थित रहे।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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