
देहरादून। न्यूज लाइव ब्यूरो

दैनिक मजदूरी करने वाले मालदेवता के एक व्यक्ति की बेटी को कक्षा दो में दाखिला नहीं मिला तो वह निराश हो गया। उनका नाम बीपीएल परिवारों की लिस्ट में नहीं था, तो बेटी को शिक्षा का अधिकार अधिनियम( आरटीई) का लाभ भी नहीं मिल सका। एक गरीब पिता के सामने बेटी को अच्छी एजुकेशन दिलाने के साथ ही परिवार की आजीविका चलाने की चुनौती पैदा हो गई। इस पिता की मदद के लिए नथुवावाला स्थित सुभाष चंद्र बोस एकेडमी ने जो किया, वो वाकई प्रेरणास्पद है। स्कूल प्रबंधन ने उनकी बेटी को एडमिशन ही नहीं दिया, बल्कि 35 हजार रुपये की दुधारु गाय खरीद कर भी दी, ताकि बेटी की पढ़ाई का खर्चा निकालने के साथ परिवार की आजीविका भी चल सके।
प्राचीन भारत में माता-पिता अपने बच्चों को गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजते समय गुरुकुल को अपनी सामर्थ्य अनुसार गायें भेंट स्वरूप दिया करते थे | नथुवावाला स्थित सुभाष चंद्र बोस एकेडमी के संचालक दिगंबर सिंह नेगी ने अपनी फेसबुक वाल पर इस प्रेरक किस्से को शेयर किया है। उनके इस अभिनव प्रयोग काे खूब सराहना मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों दैनिक मजदूरी करने वाले एक अभिभावक ललित पासवान अपनी पुत्री को कक्षा दो में दाखिला दिलाने के लिए मालदेवता से सुभाष चंद्र बोस एकेडमी नथुवावाला देहरादून लेकर आए।

बीपीएल सूची में नाम न होने के कारण आरटीई के अंतर्गत बच्ची को दाखिला नहीं मिल सका।विद्यालय प्रबंधन ने जब ललित पासवान को कहा कि हम तुम्हें एक गाय देंगे, तुम गाय पालकर अपनी पुत्री की शिक्षा का खर्च वहन कर सकते हो | पहले तो वह इनकार करने लगे और बच्ची को निशुल्क पढ़ाने की गुजारिश करने लगे, लेकिन जब उनको स्पष्ट कह दिया गया कि निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था बंद कर दी गई है | आपको गाय या सब्जी की ठेली निशुल्क विद्यालय की ओर से अतिरिक्त अर्थोपार्जन के लिए दी जाएगी, जिससे आप अपने बच्चे की शिक्षा का खर्च सहजता से वहन कर सकते हैं | तब वह गाय पालने को राजी हो गए | श्री नेगी के अनुसार विद्यालय ने नथुवावाला निवासी सावन सिंह बिष्ट से 35000 रुपये में दुधारू गाय खरीद कर 4 मई 2017 को ललित पासवान के परिवार को भेंट की | श्री नेगी की फेसबुक वाल पर इस अनोखे और सराहनीय प्रयाेग की खूब चर्चा हो रही है।













