Lunar Halo in Uttarakhand: आसमान में दिखी चांद की सभा: चांद के चारों ओर बनी रोशनी की जादुई अंगूठी, जानें क्या है इसके पीछे का विज्ञान

Rajesh Pandey
शनिवार की रात आसमान में एक दुर्लभ और बेहद खूबसूरत खगोलीय घटना देखने को मिली। चांद के चारों ओर एक चमकदार सफेद घेरा नजर आया, जिसे देखकर लोग अचंभित रह गए। 

Lunar Halo in Uttarakhand:  डोईवाला/देहरादून, 31 जनवरी, 2026: शनिवार की रात आसमान में एक दुर्लभ और बेहद खूबसूरत खगोलीय घटना देखने को मिली। चांद के चारों ओर एक चमकदार सफेद घेरा नजर आया, जिसे देखकर लोग अचंभित रह गए। जरूरी नहीं कि एक ही समय में यह दुनिया के हर स्थान से एक जैसा दिखाई देता है। चांद के चारों ओर ऐसा घेरा दिखने के लिए स्थान विशेष की जलवायु निर्भर करती है।

क्या है यह ‘लूनर हेलो’?

Lunar Halo in Uttarakhand: वैज्ञानिक भाषा में इसे ’22-डिग्री हेलो’ (22-Degree Halo) कहा जाता है। यह घटना तब होती है जब आसमान में बहुत ऊंचाई (करीब 20,000 फीट से ऊपर) पर ‘सिरस’ (Cirrus) नाम के पतले बादल छा जाते हैं। इन बादलों में बर्फ के छोटे-छोटे षट्कोणीय (Hexagonal) क्रिस्टल होते हैं। जब चंद्रमा की रोशनी इन क्रिस्टलों से होकर गुजरती है, तो वह एक खास कोण पर मुड़ जाती है, जिससे चांद के चारों तरफ एक गोलाकार घेरा बन जाता है।

Lunar Halo in Uttarakhand: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसे “चांद की सभा” भी कहा जाता है और इसे आने वाले दिनों में बारिश या बर्फबारी का संकेत माना जाता है।

अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार, यह पूरी तरह से एक वायुमंडलीय प्रक्रिया है। इसके पीछे का विज्ञान वही है जो इंद्रधनुष बनाने का होता है, बस फर्क यह है कि इंद्रधनुष पानी की बूंदों से बनता है और ‘हेलो’ बर्फ के क्रिस्टलों से।

अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार, यह घटना पूरी तरह से प्रकाश के परावर्तन पर आधारित है। यह घेरा हमेशा चांद से 22 डिग्री के कोण पर ही बनता है, इसलिए इसे ’22-डिग्री हेलो’ कहा जाता है।

वैज्ञानिक जानकारी के लिए आप नासा के इस आधिकारिक लिंक पर विस्तार से पढ़ सकते हैं: 👉 NASA: What is a Lunar Halo?

क्या यह बारिश का संकेत है?

स्थानीय लोक मान्यताओं और मौसम विज्ञान, दोनों में ही इस घेरे का बड़ा महत्व है। अक्सर यह माना जाता है कि अगर चांद के चारों ओर घेरा दिख रहा है, तो अगले 24 से 48 घंटों में बारिश या बर्फबारी हो सकती है। इसका कारण यह है कि जिन ‘सिरस’ बादलों से यह घेरा बनता है, वे आमतौर पर मौसम में बदलाव आने के संकेत होते हैं।

यह केवल देहरादून तक सीमित नहीं है। आज रात (31 जनवरी, 2026) जहां भी मौसम का मिजाज एक जैसा है, इसलिए वहां भी लोग इस नजारे को देख रहे होंगे। वैज्ञानिक दृष्टि से, यह घटना एक बार में हजारों किलोमीटर के क्षेत्र में दिखाई दे सकती है, बशर्ते वहां का वायुमंडल एक जैसा हो।

सावधानी और रोचक तथ्य:

  • यह घेरा हमेशा चंद्रमा से 22 डिग्री की दूरी पर ही बनता है।

  • कभी-कभी यह घेरा इतना साफ होता है कि इसमें इंद्रधनुष की तरह हल्के रंग भी दिखाई देते हैं।

  • एक दिलचस्प वैज्ञानिक तथ्य यह है कि हर व्यक्ति अपना ‘अलग’ हेलो देखता है। ठीक वैसे ही जैसे इंद्रधनुष (Rainbow) के मामले में होता है। आप जिस कोण से बर्फ के क्रिस्टलों को देख रहे हैं, वह आपके बगल में खड़े व्यक्ति से थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए तकनीकी रूप से, आप जो घेरा देख रहे हैं, वह सिर्फ आपके लिए बना है! विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक सामान्य खगोलीय घटना है।
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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