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Organ Donation Awareness AIIMS Rishikesh: ‘ब्रेन डेड’ व्यक्ति के अंग दे सकते हैं कई लोगों को नया जीवन

Rajesh Pandey
Last updated: January 24, 2026 4:57 pm
Rajesh Pandey
3 months ago
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Organ Donation Awareness AIIMS Rishikesh: ऋषिकेश, 24 जनवरी, 2026ः ‘ब्रेन डेड’ व्यक्ति के अंगों से किसी भी जरूरतमंद का जीवन बचाया जा सकता है। दिल्ली एम्स के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक गुप्ता ने एम्स ऋषिकेश के सभागार में आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा, यदि चिकित्सक समय पर ब्रेन डेथ की जांच करें और परिजनों को जागरूक करें, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

Contents
कोमा और ब्रेन डेथ के बीच का अंतर समझना जरूरीआंकड़ों में अंगदान की स्थितिमेडिकल छात्र बनें जागरूकता के ‘संदेश संवाहक’

Also Read:Organ Donation AIIMS Rishikesh: अंगदान करके अमर हो गए ऋषिकेश के रघु पासवान, पांच लोगों को मिला नया जीवन

कोमा और ब्रेन डेथ के बीच का अंतर समझना जरूरी

Organ Donation Awareness AIIMS Rishikesh: डॉ. दीपक गुप्ता ने विस्तार से बताया कि अक्सर लोग कोमा और ब्रेन डेथ को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, “कोमा में व्यक्ति जीवित रहता है और उसके ठीक होने की संभावना होती है, लेकिन ब्रेन डेथ एक पूर्ण मृत अवस्था है जिससे वापसी संभव नहीं है। यदि परिजन इस स्थिति में अंगदान का निर्णय लें, तो यह न केवल महापुण्य है बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।”

आंकड़ों में अंगदान की स्थिति

Organ Donation Awareness AIIMS Rishikesh: डॉ. गुप्ता ने कहा कि अंगदान के मामले में हमारा देश 68वीं रैंक में है, जबकि सबसे पहले अपनी हड्डियों का दान करने वाले महर्षि दधीचि भारत भूमि पर ही जन्मे थे।

  • देश में हर साल करीब 1.5 लाख लोगों की सड़क दुर्घटना में और 50 हजार से अधिक की धूम्रपान के कारण मृत्यु होती है।

  • पिछले वर्ष ऐसी 5 लाख मौतों में से केवल 1,128 मामलों में ही परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया जा सका।

  • यदि चिकित्सक समय पर ब्रेन डेथ की जांच करें और परिजनों को जागरूक करें, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

मेडिकल छात्र बनें जागरूकता के ‘संदेश संवाहक’

संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने मेडिकल छात्रों से आह्वान किया कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभाएं। उन्होंने जानकारी दी कि एम्स ऋषिकेश में कॉर्निया बैंक सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है, जिसके माध्यम से संस्थान अब तक सैकड़ों जरूरतमंदों को आंखों की रोशनी लौटा चुका है। इस अवसर पर ऋषिकेश के मेयर शम्भू पासवान, डीन एकेडेमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय समेत कई फैकल्टी सदस्य, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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