agricultureNewsUncategorized

Regenerative Farming Soil Health: मिट्टी की सेहत में होगा सुधार, बढ़ेगी अन्न की पैदावार

Regenerative Farming Soil Health

Regenerative Farming Soil Health

newslive24x7.com, 18 August 29025: आज जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी खाद्य सुरक्षा के लिए नई चुनौतियाँ पेश कर रहे हैं, वहीं कृषि पद्धतियों में बदलाव की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इस बदलाव के केंद्र में है ‘मिट्टी का स्वास्थ्य’। एक हालिया अध्ययन, Regenerative Farming Benefits: 7 Key Reasons For 2025, इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे Regenerative कृषि पद्धतियाँ न केवल मिट्टी को पुनर्जीवित कर रही हैं, बल्कि किसानों और पर्यावरण के लिए भी लाभ के अवसर  ला रही हैं।

Regenerative Farming एक ऐसी प्रणाली है जो मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इसका मुख्य लक्ष्य मिट्टी में कार्बन को वापस लाना है, जिससे मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है। इन कृषि प्रणालियों में, किसान फसल चक्रण, कवर क्रॉप्स और कम जुताई जैसी तकनीकों का उपयोग करते हैं। ये तरीके मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों को बढ़ाते हैं, क्योंकि पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से वायुमंडल से कार्बन को अवशोषित करके मिट्टी में जमा करते हैं।

मिट्टी ही जीवन का आधार (Regenerative Farming Soil Health)

हमारी भोजन आपूर्ति का लगभग 95% हिस्सा स्वस्थ मिट्टी पर निर्भर करता है। स्वस्थ मिट्टी वह है जो कार्बनिक पदार्थों से भरपूर हो और जीवित जीवों – बैक्टीरिया, कवक, केंचुओं और अन्य सूक्ष्मजीवों – से भरी हुई हो। ये सभी पोषक तत्वों के चक्रण और पानी को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, पारंपरिक गहन कृषि पद्धतियों ने अक्सर मिट्टी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाया है, जिससे उसकी उर्वरता और उत्पादकता कम हुई है।

पुनर्योजी खेती (Regenerative Farming ): मिट्टी को फिर से जीवंत करने का रास्ता

पुनर्योजी कृषि (Regenerative Farming) एक समग्र दृष्टिकोण है जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इसमें कई प्रमुख अभ्यास शामिल हैं:

  1. कम या बिना जुताई (No-till or Reduced Tillage): गहन जुताई (intensive tilling) और अन्य पारंपरिक तरीकों से मिट्टी में जमा कार्बनिक पदार्थ टूट जाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में वापस वायुमंडल में चले जाते हैं। जबकि Regenerative Farming में मिट्टी की संरचना और सूक्ष्मजीवों के जीवन को बनाए रखने के लिए कम या बिना जुताई खेती को प्रोत्साहित किया जाता है। 
  2. कवर क्रॉपिंग (Cover Cropping): मुख्य फसल के बीच या बाद में मिट्टी को ढँकने वाली फसलें उगाना, जो मिट्टी को कटाव से बचाती हैं, पोषक तत्व जोड़ती हैं और खरपतवारों को नियंत्रित करती हैं।
  3. विविध फसल चक्र (Diverse Crop Rotation): विभिन्न प्रकार की फसलों को घुमा-फिराकर बोना, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है और कीटों व बीमारियों का चक्र टूटता है।
  4. पशुधन का एकीकरण (Integrating Livestock): पशुओं को फसल प्रणाली में शामिल करना, जिससे खाद के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और चराई से मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है।

किसानों और पर्यावरण के लिए अप्रत्याशित लाभ (Regenerative Farming Soil Health)

यह अध्ययन बताता है कि पुनर्योजी खेती से किसानों और पर्यावरण दोनों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:

  • मिट्टी का स्वास्थ्य और उत्पादकता में वृद्धि: स्वस्थ मिट्टी में पानी को बनाए रखने और पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने की बेहतर क्षमता होती है, जिससे फसलें सूखे, कीटों और बीमारियों के प्रति अधिक लचीली बनती हैं। अनुमान है कि पुनर्योजी खेती पांच वर्षों में मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ में 21% तक की वृद्धि कर सकती है। समय के साथ, इससे फसल की पैदावार में सुधार होता है और सिंथेटिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, जिससे किसानों की लागत घटती है।
  • जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation): स्वस्थ मिट्टी एक कार्बन सिंक (carbon sink) के रूप में कार्य करती है, जिसका अर्थ है कि यह वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को अवशोषित करती है और उसे अपने भीतर जमा करती है। यह प्रक्रिया जलवायु परिवर्तन को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • जल प्रबंधन और गुणवत्ता में सुधार: बेहतर मिट्टी संरचना और कार्बनिक पदार्थ के कारण पानी का बेहतर घुसपैठ होता है और सतह का बहाव कम होता है, जिससे मिट्टी का कटाव और बाढ़ का जोखिम कम होता है।
  • आर्थिक और सामाजिक लाभ: कम इनपुट लागत (उर्वरक, कीटनाशक पर), स्थिर पैदावार और बाजार में नए अवसरों (जैसे जैविक या टिकाऊ उत्पादों के लिए) के कारण किसानों की आर्थिक प्रगति होती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी पैदा करता है।

पुनर्योजी कृषि प्रणालियाँ मिट्टी को कार्बन से समृद्ध करती हैं, जबकि मोनोकल्चर (एकल फसल) प्रणालियाँ ऐसा नहीं करती हैं। यह अंतर इस बात को दर्शाता है कि पुनर्योजी प्रणालियाँ मिट्टी के स्वास्थ्य और दीर्घकालिक उत्पादकता को बेहतर बनाती हैं।

मोनोकल्चर और कार्बन

मोनोकल्चर में एक ही फसल को बड़े पैमाने पर बार-बार उगाया जाता है। इस प्रणाली में अक्सर गहन जुताई और सिंथेटिक उर्वरकों का उपयोग होता है, जो मिट्टी की संरचना को खराब करते हैं और कार्बनिक पदार्थों को नष्ट कर देते हैं। इस कारण से, मोनोकल्चर वाले खेतों में मिट्टी में कार्बन की मात्रा कम हो जाती है।

पुनर्योजी प्रणालियों के तहत मिट्टी में 30% तक अधिक कार्बनिक पदार्थ होने का मतलब यह है कि ये खेत अधिक स्थिर, लचीले और पर्यावरण के अनुकूल हैं।

भविष्य की ओर एक कदम

2025 और उसके बाद के लिए, पुनर्योजी कृषि केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बनती जा रही है। यह किसानों को अधिक लचीला, लाभदायक और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार बनने में मदद करती है।

Regenerative Farming और Natural Farming में समानताएं

पुनर्योजी खेती (Regenerative Farming) और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) में बहुत समानताएँ हैं, और अक्सर इन्हें एक-दूसरे के पर्याय के रूप में देखा जाता है या इनके सिद्धांत काफी हद तक ओवरलैप करते हैं। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण सूक्ष्म अंतर भी हैं:

Also Read: Organic vs Natural Farming: डॉ. राजेंद्र कुकसाल से जानिए, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में अंतर

समानताएँ (Similarities):

  1. मिट्टी का स्वास्थ्य केंद्र में: दोनों का मुख्य लक्ष्य मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। वे मिट्टी को एक जीवित, गतिशील प्रणाली मानते हैं, जिसमें सूक्ष्मजीवों और कार्बनिक पदार्थों की प्रचुरता होनी चाहिए।
  2. रसायनिक इनपुट में कमी/उन्मूलन: दोनों ही रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और शाकनाशकों के उपयोग को कम करने या पूरी तरह से समाप्त करने पर जोर देते हैं।
  3. जैव विविधता (Biodiversity): दोनों ही खेतों में और उसके आसपास जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं, चाहे वह फसल विविधीकरण (crop diversification) के माध्यम से हो या लाभकारी कीटों और सूक्ष्मजीवों को आकर्षित करके।
  4. पानी का कुशल उपयोग: मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के माध्यम से पानी को बेहतर ढंग से बनाए रखने की क्षमता दोनों का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।
  5. पर्यावरणीय लाभ: दोनों का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन को कम करना (कार्बन पृथक्करण के माध्यम से), जल प्रदूषण को कम करना और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार करना है।

Regenerative Farming और Natural Farming में अंतर

प्राकृतिक खेती (Natural Farming):

    • उत्पत्ति और दर्शन: यह भारत में ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ (ZBNF) से जुड़ा है। इसमें कोई बाहरी इनपुट या लागत नहीं होती। इसका मतलब है कि खेत के बाहर से कोई भी चीज (यहाँ तक कि खरीदी गई जैविक खाद भी) नहीं लानी चाहिए। यह मुख्य रूप से खेत में उपलब्ध संसाधनों, जैसे गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और स्थानीय सूक्ष्मजीवों (जैसे जीवामृत और बीजामृत) का उपयोग करता है।
    • जुताई: यह आमतौर पर जुताई न करने (no-till) या न्यूनतम जुताई (minimum tillage) पर जोर देता है।
    • अधिक विशिष्ट: प्राकृतिक खेती अक्सर अधिक विशिष्ट और निर्देशात्मक होती है, जिसमें कुछ निर्धारित प्रथाओं का पालन करना होता है।
  1. पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture):
    • उत्पत्ति और दर्शन: यह एक व्यापक, वैश्विक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य केवल कृषि को ‘टिकाऊ’ बनाना नहीं, बल्कि उसे ‘पुनर्जीवित’ करना है – यानी मिट्टी, पानी और जैव विविधता को सक्रिय रूप से बेहतर बनाना। यह ‘नेट पॉजिटिव’ पर्यावरणीय प्रभाव पर केंद्रित है।
    • इनपुट: यह रसायनों के उपयोग को कम करने या समाप्त करने पर जोर देता है, लेकिन ‘शून्य बाहरी इनपुट’ का उतना कड़ा नियम नहीं है जितना प्राकृतिक खेती में। यह खेत के बाहर से लाई गई जैविक खाद (जैसे कम्पोस्ट) या बायोइनपुट्स का उपयोग कर सकता है, यदि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करने के लक्ष्य में योगदान करते हैं।
    • जुताई: यह भी आमतौर पर कम या बिना जुताई पर जोर देता है।
    • अधिक लचीला/परिणाम-केंद्रित: पुनर्योजी कृषि अधिक परिणाम-केंद्रित है। इसका लक्ष्य मिट्टी और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है, और इसे प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रथाओं को अपनाया जा सकता है, जो स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर भिन्न हो सकती हैं।

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button