By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: Organic vs Natural Farming: डॉ. राजेंद्र कुकसाल से जानिए, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में अंतर
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Agriculture > Organic vs Natural Farming: डॉ. राजेंद्र कुकसाल से जानिए, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में अंतर
AgricultureNews

Organic vs Natural Farming: डॉ. राजेंद्र कुकसाल से जानिए, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में अंतर

Rajesh Pandey
Last updated: July 18, 2025 7:25 pm
Rajesh Pandey
9 months ago
Share
टिहरी के नागणी में प्राकृतिक खेती। यहां बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी प्राकृतिक खेती करते हैं।
SHARE

Organic vs Natural Farming: देहरादून, 18 जुलाई, 2025: जैविक खेती (Organic Farming) और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) दोनों ही पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त कृषि पद्धतियाँ हैं, लेकिन इनके सिद्धांतों, तरीकों और प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं में कुछ अहम अंतर हैं. आइए, कृषि एवं औद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुकसाल से इन अंतरों को समझते हैं-

1. आधार और दृष्टिकोण

  • जैविक खेती (Organic Farming):
    • यह एक विदेशी पद्धति है जो विशेष रूप से बाहरी आदानों (inputs) के उपयोग पर केंद्रित है।
    • इसमें प्रमाणित बीज, कम्पोस्ट खाद, गोबर की खाद, केंचुए (जैसे Eisenia foetida), जैविक उर्वरक, जैविक कीटनाशक और अन्य स्वीकृत जैविक उत्पादों का उपयोग किया जाता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक आदानों (जैसे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक) से बचना है।
  • प्राकृतिक खेती (Natural Farming):
    • यह एक स्वदेशी पद्धति है जिसे “शून्य-बजट प्राकृतिक खेती (Zero Budget Natural Farming)” के नाम से भी जाना जाता है, जिसे पद्मश्री सुभाष पालेकर ने प्रस्तावित किया है।
    • यह ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म पर आधारित है। इसमें बाहरी निवेशों के बिना प्राकृतिक/आध्यात्मिक तरीके से खेती की जाती है।
    • प्राकृतिक खेती के मुख्य आधार प्रकृति यानी पृथ्वी, वायुमंडल, जल और सूर्य हैं। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्रकृति ने जीवों और पौधों के लिए स्वयं ही पोषण की व्यवस्था की है, जैसा कि जंगलों में बड़े वृक्ष बिना मानवीय सहायता के हरे-भरे रहते हैं।
    • यह मान्यता है कि पेड़-पौधे 98% अपना भोजन/पोषण हवा, पानी और सूर्य के प्रकाश से प्राप्त करते हैं, जबकि शेष 2% पोषण अच्छी, स्वस्थ मिट्टी में उपलब्ध जीवाणुओं की सहायता से मिलता है।
    • इसमें देशी बीज, देशी गाय का गोबर, गौमूत्र और वनस्पति अर्क का उपयोग होता है, तथा मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे आच्छादन (पेड़-पौधों के अवशेष) और जीवामृत के प्रयोग से मिट्टी के सूक्ष्मजीवों और देशी केंचुओं को सक्रिय कर पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे बाहरी आदानों पर निर्भरता शून्य या कम होती है।

Also Read: Video: जड़धारी जी ने बिना जोते, बिना खाद के लहलहा दिए खेत

2. प्रमाणीकरण

  • जैविक खेती (Organic Farming):
    • इसमें तीसरे पक्ष के प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है. यह एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी उत्पाद को जैविक रूप से उगाया गया है, संसाधित किया गया है और प्रमाणित किया गया है।
    • यह तृतीय-पक्ष सत्यापन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि उत्पाद जैविक मानकों का पालन करता है।
    • यदि कोई किसान या समूह अपने जैविक उत्पाद का निर्यात करना चाहता है, तो उसे कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA-Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority ) के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • प्राकृतिक खेती (Natural Farming):
    • इस पद्धति में प्रमाणीकरण के लिए किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है।
    • इसमें उत्पादक/किसान और उपभोक्ता के बीच आपसी विश्वास का संबंध होता है।

3. लागत और पोषण

  • जैविक खेती (Organic Farming):
    • पोषण के लिए इसमें अधिक मात्रा में जैविक/जीवांश/कम्पोस्ट खाद और अन्य निवेशों की आवश्यकता होती है, जिससे लागत बहुत अधिक आती है।
  • प्राकृतिक खेती (Natural Farming):
    • इसे “ज़ीरो बजट” खेती भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें जीवामृत, आच्छादन (mulching) और मिट्टी में उपस्थित जीवाणुओं एवं केंचुओं को सक्रिय कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है, जिसमें लागत बहुत कम आती है.
    • इसमें अंतरवर्तीय फसलें उगाकर मुख्य फसल की लागत का मूल्य सह-फसल उत्पादन से निकालने का प्रयास किया जाता है।

संक्षेप में, जैविक खेती एक विशिष्ट प्रणाली है जो रासायनिक आदानों को हटाती है और प्रमाणीकरण पर जोर देती है, जबकि प्राकृतिक खेती एक व्यापक और स्वदेशी दृष्टिकोण है जो ज्ञान, विज्ञान, प्रकृति और अध्यात्म पर आधारित है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों और प्रक्रियाओं का उपयोग करके शून्य-लागत पर खेती की जाती है।

You Might Also Like

‘पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज’ लांच, विजेता को मिलेगा दस लाख का पुरस्कार, आवेदन करें
Dhan Singh Rawat Education Review Srinagar: श्रीनगर क्षेत्र के स्कूलों में अव्यवस्थाओं को लेकर अफसरों पर नाराज हुए शिक्षा मंत्री
 e-Zero FIR system Uttarakhand Cyber Crime: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को तुरंत मिलेगी सहायता , गृह मंत्री अमित शाह ने किया उद्घाटन
कृषि उपजों के अच्छे दाम के लिए बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था करें अफसरः सीएम
ICAR-IISWC Kharif Crop Advisory: किसानों के पास पहुंचा वैज्ञानिकों का दल
TAGGED:agricultural practiceschemical-free farmingDr. Rajendra Kuksaleco-friendly farmingfarming methodsNatural Farmingorganic certificationOrganic farmingSustainable AgricultureZBNFzero budget natural farming
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article Uttarakhand Primary Teachers Demands: इस माह के वेतन में सभी शिक्षकों के चयन-प्रोन्नत वेतनमान लग जाएंगे
Next Article बच्चों की पढ़ाई के लिए उफनती नदी को दिन में 16 बार पार करते धामन सिंह
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?