
Chamoli Artisans Fair Local Products: चमोली में Empower Society का कारीगर मेला, स्थानीय उत्पादों को मिला मंच
Chamoli Artisans Fair Local Products: चमोली, 15 दिसंबर, 2025: एम्पावर सोसाइटी ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित क्राफ्ट पर काम करने वालीं संस्थाओं देव डंका और कल्प गंगा के साथ मिलकर दशोली ब्लॉक के बेमरू- बजनी फार्म्स में कारीगर मेला लगाया। मेले में कारीगरों और किसानों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया। मेला देखने और उत्पाद खरीदने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग पहुंचे।
पहले दिन कारीगर मेला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पशुपालन एवं आजीविका संवर्धन विशेषज्ञ डॉ. राजीव ने किया। डॉ. राजीव ने ग्रामीणों को पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाने का आह्वान करते हुए पशुपालन, चारा प्रबंधन के साथ, कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। दूसरे दिन मेले का शुभारंभ ग्राम प्रधान ने किया।

Chamoli Artisans Fair Local Products: प्रमुख आकर्षण रहे स्थानीय उत्पाद
मेले में उत्तराखंड की समृद्ध हस्तकला और कृषि उपज की झलक देखने को मिली। प्रदर्शित उत्पादों में मुख्य रूप से शामिल थे:
- प्राकृतिक फाइबर उत्पाद: रिंगाल, बाँस और अन्य प्राकृतिक रेशों से बनी कलाकृतियाँ।
- हस्तशिल्प और वस्त्र: लोहे के उत्पाद, हथकरघा, किड्स वियर, बैग, ऊनी वस्त्र जैसे स्वेटर, शॉल, हाथ के दस्ताने, मोजे और याक तथा अंगोरा ऊन से बनी टोपियाँ/कैप, कैंडल्स, दीये आदि।
- मिट्टी और पत्थर की कला: मनमोहक मिट्टी के उत्पाद और पत्थर पर उकेरी गई कलाकृतियाँ।
- कृषि और खाद्य उत्पाद: शुद्ध घी, शहद, तेल, गुड़, लाल चावल, दाल (जैसे राजमा), फल (माल्टा, अखरोट), आलू और मक्का (कॉर्न) आधारित उत्पाद।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर ज़ोर: एम्पावर सोसाइटी की सचिव मोनादीपा सरमा के अनुसार, यह पहल न केवल स्थानीय कारीगरों को एक बाजार प्रदान करती है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि उनके पारम्परिक कौशल और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर पहचान पाएँ। ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिकी को सशक्त करने के लिए इन स्थानीय और जैविक उत्पादों का उपभोग समय की माँग है।
Chamoli Artisans Fair Local Products: इस मेले को ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी कला तथा कृषि उपज को उचित मूल्य दिलाने की दिशा में एक सफल कदम माना जा रहा है।
सोसाइटी की सचिव मोनादीपा सरमा ने बताया, कारीगर मेले की तैयारियां लगभग एक माह से की जा रही थीं, ताकि अधिक से अधिक संख्या में ग्रामीण अपने उत्पादों को मेला स्थल में ला सकें। मेला 11 दिसंबर से 15 दिसंबर तक चला।

एम्पावर सोसाइटी के उपाध्यक्ष (क्रियान्वयन) निखिल ने बताया,सोसाइटी के मास्टर ट्रेनर ग्रामीणों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित हस्तकला के उत्पादों का प्रशिक्षण देते हैं। ग्रामीण रिंगाल, बांस एवं प्राकृतिक रेशों से घरों में रोजमर्रा के कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद, जैसे- विभिन्न आकार की अलग अलग कार्यों में प्रयोग की जाने वालीं टोकरियां, पर्स, बैग, चटाइयां, अंब्रेला, पानी की बोतलें, चप्पलें सहित सजावटी सामान आदि बनाते हैं। कारीगर मेला में ग्रामीणों ने अपने बनाए उत्पाद प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए उपलब्ध कराए। यह सब कौशल विकास एवं संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की वजह से संभव हो सका। संस्था ग्रामीणों को उनके बनाए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने यानी मार्केट लिंकेज में सहयोग करती है।
मेला प्रबंधन में मास्टर ट्रेनर राजेश लाल और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सोसाइटी की सचिव मोनादीपा सरमा ने बताया, यह टीम ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।













