जिसको तुम आत्महत्या करना कह रहे थे, वो निकली आसमां छूने की हसरत

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युवा पत्रकार संतोष कुमार पांडेय ने वर्ष 2019 के किसी दिन अखबार में डिप्टी न्यूज एडिटर की नौकरी छोड़ दी। संतोष कुछ नया करना चाहते थे। वो चाहते थे कि अखबारों में अनिश्चितता के जिस संकट की, जो बात हो रही है, उससे दूर होकर कुछ ऐसा किया जाए, जो उनके जैसे तमाम लोगों को एक राह दिखाए। वो मील का वो पत्थर स्थापित करना चाहते हैं, जो असल जिंदगी में उन पत्रकारों के लिए पथ प्रदर्शक, जो सिर्फ औऱ सिर्फ पत्रकारिता के लिए स्थापित मानदंडों के सहारे आगे बढ़ना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं।
संतोष बताते हैं कि जब उन्होंने नौकरी छोड़ी तो उनके बारे में कहा जाने लगा कि यह तो आत्महत्या करने जैसा कदम है। जिस दौर में नौकरी पाना कठिन है, उस समय यह अखबार में अच्छा पद और वेतन छोड़कर जा रहे हैं।
वो सभी को एक ही जवाब देते थे कि यह आत्महत्या करना नहीं है। मैं तो आप जैसे लोगों के लिए रास्ता तैयार कर रहा हूं। एक दिन आप भी इसी पर आओगे, तब मैं आपको सहयोग करूंगा। किसी को तो कदम बढ़ाना होगा।

बकौल संतोष, मैं जानता था कि जो रास्ता मैंने चुना है, वहां मुश्किल बहुत हैं, बहुत सारी बाधाएं  हैं। हो सकता है कि सफल हो जाऊँ और न भी हूं। पर, मैं हमेशा आशान्वित रहता हूं, क्योंकि मुझे खुद पर भरोसा है। जब आप कुछ नया करते हैं तो पहले स्वयं पर विश्वास करना बहुत आवश्यक होता है।
खुद पर विश्वास करने का मतलब यह है कि आपको जुझारू होना होगा, आपको जुनूनी होना होगा और आपको धैर्य रखना होगा। मैं डिजीटल मीडिया के माध्यम से अपनी पत्रकारिता को नये आयाम देना चाहता था, इसके सुखद परिणामों को पाने के लिए आपके पास धैर्य होना, प्रमुख शर्त है।
यहां तो आपका मजबूत कन्टेंट ही आपको दुनिया से जोड़ेगा। यह साफ है कि डिजीटल, जो पूरे विश्व को एक साथ जोड़ता है, वहां बहुत आसानी से आपको स्वीकार नहीं किया जाता।
आपकी परख होती है। अगर, हम खबरों और उनके विश्वलेषण या आकलन की बात करें तो वहां आपके ज्ञान और विश्वसनीयता को सख्त मानकों पर जांचा जाता है।
बताते हैं कि एक बार निराशा भी हुई कि लगातार मेहनत के बल पर ज्यादा रेस्पांस नहीं मिल रहा है। मैंने एक बार सोचा कि वो लोग सही कह रहे थे।
मुझे इन सभी बातों की अपेक्षा पहले से थी, पर अपनी मेहनत पर ज्यादा विश्वास था। एक दिन ऐसा भी आया कि यूट्य़ूब पर एक वीडियो, जो आईएएस अधिकारियों के गांव की कवरेज का था, मिलियन व्यूज पार कर गया।
मेरा हौसला बढ़ गया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस समय Poll Talk  के 55 हजार सब्सक्राइबर हैं। आमदनी भी हो रही है, वो भी पूरी संतुष्टि के साथ। इन सबसे बढ़कर, खास बात यह है कि मैंने कन्टेंट पर ज्यादा मेहनत की और सामुदायिक हितों को प्राथमिकता पर रखा। यह तय है कि हम मुद्दों को ईमानदारी से रखेंगे और स्वतंत्र होकर काम करेंगे।

Poll Talk  के संपादक संतोष ने यूट्यूब पर कन्टेंट, टैगिंग, ट्रेंड पर फोकस करने की टिप्स दीं। कम्युनिटी गाइडलाइन को पूरी तरह फॉलो करने पर जोर दिया।
डुग डुगी से बातचीत में उनका कहना है कि स्थापित मीडिया के समक्ष व्यक्ति तौर पर स्वतंत्रता से जर्नलिज्म करने में दिक्कतें तो आती हैं।
उनके सामने आपके कन्टेंट को विश्वसनीय नहीं माना जाता, पर जब आप निरंतरता से सही तथ्यों को प्रस्तुत करते हैं तो एक दिन आप ब्रांड बन जाते हैं। आप पर लोग विश्वास करते हैं। आपकी पहचान स्थापित होती है। पर, आवश्यक शर्त, सही और निष्पक्ष रूप से तथ्यों के प्रस्तुतीकरण की है।

 

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