Indian Agriculture Success Stories Mann Ki Baat 2026: केरल के इस गांव में धान की 570 तरह की किस्में, मन की बात में प्रधानमंत्री ने की तारीफ
Indian Agriculture Success Stories Mann Ki Baat 2026: नई दिल्ली, 22 फरवरी, 2026ः केरल के त्रिसूर जिले का गांव पेरिन्गोत्तुकरा चावल की सदियों पुरानी प्रजाति ‘इत्तिक्कंडप्पन’ (Ittikkandappan) से लेकर काले चावल और विभिन्न प्रकार के अनाजों का संग्रहालय है। त्रिसूर के पेरिन्गोत्तुकरा स्थित ‘अवणगट्टू कलारी श्री विष्णुमाया मंदिर’ द्वारा संचालित ‘सर्वतो भद्रम ऑर्गेनिक्स’ के स्वदेशी धान किस्म संरक्षण क्षेत्र में 570 तरह की धान की किस्में सफलतापूर्वक उगाई गई हैं।
Indian Agriculture Success Stories Mann Ki Baat 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में केरला के त्रिसूर जिले में गांव का जिक्र करते हुए कहा, “यहां एक ही खेत में 570 तरह की धान की किस्में लगाई जाती हैं। इसमें स्थानीय किस्में भी हैं, हर्बल किस्में भी हैं और दूसरे राज्यों से लाई गई प्रजातियां भी हैं। ये केवल खेती नहीं, बीजों की विरासत को बचाने का महाअभियान है। हमारे किसानों की मेहनत का असर आंकड़ों में भी दिख रहा है।
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन चुका है। 15 करोड़ टन से अधिक चावल का उत्पादन, ये छोटी उपलब्धि नहीं है। हम अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं और दुनिया की food basket में योगदान भी दे रहे हैं।”
Indian Agriculture Success Stories Mann Ki Baat 2026:केरल के इस खेत में चेन्नेल्लू, जीरकशाला, चीरा, कुलपांडी, हवलक्कनन्, कुरुवा, चित्तेनी, ओरपाडी और चेराडी जैसी धान की किस्मों की खेती की गई है। इनके साथ ही अन्य राज्यों की किस्मों को भी उगाया गया है, जिनमें कर्नाटक का नसर बाथ, तमिलनाडु का कोयंबटूर सन्ना, बंगाल का जुगल (जो एक धान में दो दानों के लिए प्रसिद्ध है), बिहार का काला नमक और पूर्वी भारत का जीरा फूल शामिल हैं। डेढ़ एकड़ के इस खेत में प्रत्येक किस्म को छोटे, दो-मीटर चौड़े वर्गाकार भूखंडों (plots) में उगाया गया है, जिससे रंगों, आकृतियों और पौधों की ऊंचाइयों का एक सुंदर मेल (मोज़ेक) दिखाई देता है।
ओडिशा में हिरोद पटेल कर रहे मछली पालन के साथ इंटीग्रेडेट फार्मिंग
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे किसान केवल अन्नदाता नहीं हैं, वे धरती के सच्चे साधक हैं। मिट्टी को सोना बनाना क्या होता है, ये कोई हमारे किसानों से सीखे और हमारा आज का किसान तो परंपरा और technology, दोनों को साथ लेकर चल रहा है और मुझे ये देखकर खुशी होती है कि हमारे किसान अब सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि गुणवत्ता, value addition और नए बाजारों पर भी ध्यान दे रहे हैं।
“ओडिशा में हिरोद पटेल नाम के एक युवा किसान से जुड़ी जानकारी वाकई बहुत प्रेरक है। करीब आठ साल पहले तक वे अपने पिता शिव शंकर पटेल के साथ पारंपरिक ढंग से धान की खेती करते थे, लेकिन उन्होंने खेती को नए नजरिये से देखना शुरू किया। अपने खेत के तालाब के ऊपर उन्होंने मजबूत जालीदार ढांचा बनाया। उस पर बेल वाली सब्जियां उगाई, तालाब के चारों ओर केले, अमरूद और नारियल लगाए और तालाब में मछली पालन भी शुरू किया। यानि एक ही जगह – पारंपरिक खेती भी हो रही है, सब्जी भी, फल भी, मछली भी। इससे जमीन का बेहतर उपयोग हुआ, पानी की बचत हुई और अतिरिक्त आमदनी भी मिली। आज दूर-दूर से किसान उनका model देखने आते हैं।”
नंजनगुड केले, मैसूरु पान के पत्ते और इंडी नींबू भेजे जा रहे विदेश
उन्होंने कहा, “अब तो कृषि उत्पाद हवाई मार्ग से भी ज्यादा आसानी से विदेश पहुंच रहे हैं। कर्नाटका के नंजनगुड केले, मैसूरु पान के पत्ते और इंडी नींबू को मालदीव भेजा गया। ये उत्पाद अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और इन्हें GI टैग भी मिला है। आज का किसान quality भी चाहता है, quantity भी बढ़ा रहा है और अपनी पहचान भी बना रहा है।”













