
Rethinking Education: रटकर याद करने की बजाय सीखने-समझने पर जोर
Rethinking Education: newslive24x7.com, 14 August, 2025: यह एक स्कूल की बात है, जहाँ छात्र आमतौर पर सीखने के प्रति उदासीन रहते थे। गणित की कक्षा में भी यही हाल था। शिक्षक इस बात से परेशान थे कि उनके छात्र गणित के सिद्धांतों को बस रट लेते हैं, लेकिन उनका असली मतलब नहीं समझ पाते।
एक दिन, शिक्षक ने एक अलग तरह की परीक्षा लेने का फैसला किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अगले दिन एक ओपन-बुक एग्जाम की तैयारी करके आएँ, लेकिन यह परीक्षा वैसी नहीं होगी, जैसी वे सोचते हैं।
अगले दिन, जब छात्र परीक्षा देने पहुँचे, तो वे हैरान रह गए। प्रश्नपत्र में गणित का एक भी सवाल नहीं था। इसके बजाय, वहाँ सिर्फ एक निर्देश लिखा था:
“इस प्रश्नपत्र में गणित का कोई प्रश्न नहीं है। आप अपनी पुस्तक से कोई भी एक ऐसी समस्या चुनें, जो आपको सबसे कठिन लगती हो। फिर, उस समस्या को अपनी भाषा में इस तरह समझाएँ कि पाँचवीं कक्षा का कोई बच्चा उसे आसानी से समझ सके। आप अपनी पुस्तक, नोट्स, या किसी भी अन्य स्रोत का उपयोग कर सकते हैं।”
छात्रों ने पहले तो सोचा कि यह कोई मज़ाक है, लेकिन शिक्षक ने उन्हें समझाया कि यही उनकी परीक्षा है। छात्रों ने चुपचाप अपनी किताबें खोलीं और सबसे कठिन लगने वाले सिद्धांतों को समझना शुरू किया।
एक छात्र ने ‘पाइथागोरस प्रमेय’ को चुना। उसने अपनी किताब से सूत्र तो देख लिया, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि इसे सरल भाषा में कैसे समझाया जाए। उसने बहुत देर तक सोचा, चित्र बनाए, और अंत में एक कहानी लिखी।
उसने लिखा, “सोचो तुम्हारे पास एक सीढ़ी है, जिसे तुम दीवार पर टिकाते हो। दीवार की ऊँचाई a होती है और दीवार से सीढ़ी के निचले सिरे की दूरी b होती है। सीढ़ी की लंबाई c होती है। पाइथागोरस प्रमेय कहता है कि अगर तुम दीवार की ऊँचाई को उसी से गुणा करो, और दूरी को भी उसी से गुणा करो, और फिर उन दोनों को जोड़ दो, तो वह सीढ़ी की लंबाई को उसी से गुणा करने पर मिलने वाले जवाब के बराबर होगा।” यानी 90 डिग्री पर खड़ी दीवार की ऊंचाई के वर्ग और दीवार से सीढ़ी के निचले सिरे की दूरी के वर्ग का जोड़ सीढ़ी की कुल लंबाई के वर्ग के बराबर होता है। इसका फार्मूला होगा- a2 (a का वर्ग) + b2 (b का वर्ग)= c2 (c का वर्ग) यह एक ऐसे त्रिभुज की तरह होता है, जिसका एक कोण 90 डिग्री होता है।
परीक्षा के अंत में, शिक्षक ने देखा कि हर छात्र ने किसी न किसी सिद्धांत को अपनी भाषा में समझाया था। कोई ‘एरिया’ को कमरे में बिछी टाइलों से जोड़कर समझा रहा था, तो कोई ‘फ्रैक्शंस’ को पिज्जा के टुकड़ों से।
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शिक्षक ने सबको पास कर दिया, लेकिन यह सिर्फ पास होने की बात नहीं थी। उस दिन, पहली बार छात्रों ने गणित के सिद्धांतों को सच में समझा था। उन्होंने रटना छोड़ दिया और यह सीखना शुरू किया कि किसी भी कठिन विचार को सरल कैसे बनाया जा सकता है।
यह परीक्षा सिर्फ गणित की नहीं थी, बल्कि यह सिखाने की थी कि सीखने का असली मतलब है—समझना, और फिर उस समझ को दूसरों के साथ साझा करना। यह इनोवेटिव तरीका सिर्फ उन शिक्षक के स्कूल में ही नहीं, बल्कि कई जगह अपनाया गया और सफल रहा।
यह बात दर्शाती है कि शिक्षा में रटकर याद करने की बजाय गहन समझ (deep understanding) पर ध्यान केंद्रित करना कितना महत्वपूर्ण है। शिक्षक का तरीका एक सफल इनोवेटिव शिक्षण पद्धति का उदाहरण है, जिसने छात्रों को न केवल गणित के सिद्धांतों को समझने में मदद की, बल्कि उनकी सोच को भी विकसित किया।
शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं
शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों को सोचने और समझने की क्षमता प्रदान करना है। आज के तेजी से बदलते दौर में, हमें यह सोचने की जरूरत है कि क्या हमारी शिक्षा पद्धति, जो रटने और परीक्षा पास करने पर आधारित है, छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर पा रही है?
यही वह जगह है जहाँ ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा का विचार सामने आता है। इसका मतलब है शिक्षा के सिद्धांतों और तरीकों पर नए सिरे से विचार करना। इसका लक्ष्य एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है जो रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, और समस्याओं को हल करने की क्षमता को बढ़ावा दे।
री-थिंकिंग शिक्षा के मुख्य स्तंभ:
1. रटने से समझ तक (From Rote to Understanding)
पारंपरिक कक्षाओं में, अक्सर छात्रों से तथ्यों को याद करने की उम्मीद की जाती है। ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा इस पद्धति को चुनौती देती है। इसका लक्ष्य छात्रों को यह सिखाना है कि वे क्यों और कैसे सीख रहे हैं, न कि सिर्फ क्या सीख रहे हैं। एक छात्र को पाइथागोरस प्रमेय का सूत्र रटाने की बजाय, उसे यह बताना चाहिए कि इस प्रमेय का उपयोग वास्तविक जीवन में कहाँ होता है, जैसे किसी इमारत की ऊँचाई नापने में।
2. एक-तरफा संवाद से सहयोग तक (From Monologue to Collaboration)
पुरानी शिक्षा पद्धति में, शिक्षक ज्ञान का एकमात्र स्रोत होता है और छात्र निष्क्रिय श्रोता होते हैं। ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा में, कक्षा एक सहयोगपूर्ण वातावरण बन जाती है। यहाँ शिक्षक एक मार्गदर्शक के रूप में काम करते हैं और छात्र एक-दूसरे के साथ मिलकर समस्याओं को सुलझाते हैं। यह दृष्टिकोण टीम वर्क और सामाजिक कौशल को बढ़ावा देता है।
3. किताबी ज्ञान से वास्तविक अनुभव तक (From Books to Real-World Experience)
वास्तविक जीवन में आने वाली चुनौतियाँ अक्सर किताबों में नहीं मिलतीं। ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा छात्रों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ती है। उदाहरण के लिए, उन्हें किसी स्थानीय समस्या (जैसे प्रदूषण) पर प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इससे छात्र न केवल विषय के बारे में सीखते हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और समाधान खोजने का तरीका भी सीखते हैं।
क्यों जरूरी है री-थिंकिंग?
आज की दुनिया में, जहाँ जानकारी हर जगह उपलब्ध है, हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो केवल जानकार न हों, बल्कि इनोवेटिव, अनुकूलनीय और संवेदनशील भी हों। ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा हमें ऐसे ही नागरिक तैयार करने में मदद करती है। यह उन्हें सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करती है।
अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं या एक अभिभावक हैं, तो हमें यह सोचना होगा कि हम अपने बच्चों को किस तरह की शिक्षा दे रहे हैं। क्या यह शिक्षा उन्हें एक बेहतर भविष्य के लिए तैयार कर रही है? ‘री-थिंकिंग’ की यह शुरुआत हमारे और हमारे बच्चों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन कुछ उदाहरणों पर सोच सकते हैं
पाइथागोरस प्रमेय के अलावा भी, ऐसे कई अद्भुत उदाहरण हैं जो ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा के सिद्धांतों को दर्शाते हैं। ये उदाहरण साबित करते हैं कि जब सीखने का तरीका बदला जाता है, तो छात्र की पूरी सोच और क्षमता का विकास होता है।
यहाँ कुछ और प्रेरणादायक उदाहरण दिए गए हैं जिन्हें आप अपने वेबपेज के लिए उपयोग कर सकते हैं:
1. सामुदायिक उद्यान प्रोजेक्ट (Community Garden Project)
विषय: विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान
पारंपरिक कक्षा में, छात्र पौधों के बारे में किताबों में पढ़ते हैं। लेकिन एक इनोवेटिव तरीका यह हो सकता है कि उन्हें स्कूल में एक सामुदायिक उद्यान (community garden) बनाने का काम दिया जाए।
- क्या होता है: छात्र खुद मिट्टी तैयार करते हैं, बीज बोते हैं, पौधों की देखभाल करते हैं और फसल काटते हैं। इस दौरान, वे सिर्फ पौधों के जीवन चक्र के बारे में ही नहीं सीखते, बल्कि गणित का उपयोग करके खाद और पानी की मात्रा का हिसाब लगाते हैं। वे यह भी सीखते हैं कि यह उद्यान समुदाय के लिए कैसे उपयोगी हो सकता है, जिससे उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना आती है।
- परिणाम: यह प्रोजेक्ट रटने की बजाय, ‘करके सीखने’ (learning by doing) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। छात्र वास्तविक समस्याओं का सामना करते हैं (जैसे- पौधे को कीड़ों से कैसे बचाएं?) और खुद उनका समाधान खोजते हैं।
2. इतिहास पर डॉक्यूमेंट्री बनाना (Creating a Documentary on History)
विषय: इतिहास, भाषा और संचार
इतिहास की कक्षा में, छात्र अक्सर घटनाओं और तारीखों को याद करते हैं। एक नई पद्धति के तहत, उन्हें किसी ऐतिहासिक घटना या व्यक्तित्व पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का काम दिया जा सकता है।
- क्या होता है: छात्र लाइब्रेरी और इंटरनेट पर रिसर्च करते हैं, स्क्रिप्ट लिखते हैं, साक्षात्कार (interviews) की योजना बनाते हैं और वीडियो रिकॉर्ड करते हैं। इस प्रक्रिया में, वे न केवल उस घटना को गहराई से समझते हैं, बल्कि लेखन, बोलने, और एडिटिंग जैसे महत्वपूर्ण कौशल भी सीखते हैं।
- परिणाम: इस तरह का प्रोजेक्ट छात्रों को सिर्फ इतिहास का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें यह भी सिखाता है कि किसी भी जानकारी को कैसे इकट्ठा करें, उसका विश्लेषण करें और उसे रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करें।
3. व्यवसाय शुरू करने का अनुभव (Starting a Mock Business)
विषय: अर्थशास्त्र, गणित, कला
पारंपरिक अर्थशास्त्र की कक्षा में, छात्र बाजार और व्यापार के सिद्धांतों के बारे में पढ़ते हैं। लेकिन ‘री-थिंकिंग’ शिक्षा में, उन्हें एक छोटा काल्पनिक व्यवसाय (mock business) शुरू करने का अवसर दिया जा सकता है।
- क्या होता है: छात्र एक प्रोडक्ट या सेवा की योजना बनाते हैं, उसका बजट बनाते हैं, मार्केटिंग रणनीति तैयार करते हैं और फिर उसे स्कूल के एक छोटे से मेले में बेचते हैं। इस प्रोजेक्ट के दौरान, वे गणित का उपयोग करके लाभ-हानि का हिसाब लगाते हैं, कला का उपयोग करके अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन बनाते हैं और टीम वर्क के माध्यम से अपने व्यवसाय को सफल बनाते हैं।
- परिणाम: यह अनुभव उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप में लागू करना सिखाता है। वे सीखते हैं कि एक व्यवसाय कैसे काम करता है और भविष्य में उद्यमी बनने के लिए क्या कौशल आवश्यक हैं।
ये सभी उदाहरण यह दिखाते हैं कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह एक जीवन-भर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जोड़कर और अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।













