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Reading: युवाओं के लिए प्रेरणा हैं हिमालय पुत्र और जलधारा
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युवाओं के लिए प्रेरणा हैं हिमालय पुत्र और जलधारा

Rajesh Pandey
Last updated: April 7, 2021 8:35 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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दुनिया जितनी तेजी से दौड़ रही है, उसमें उतनी ही गति से बदलाव हो रहे हैं। मैं अभी इस बहस में नहीं जाना चाहता कि इनमें से कौन सा बदलाव हम सभी के हित में है और कौन सा नहीं।
मैं तो धीमी गति से चलने में विश्वास करता हूं, ताकि उन सभी परिवर्तन का साक्षी बन सकूं, जो हमारे आसपास होते हैं। आज एक बार फिर मैं युवाओं, जिनके बारे में अक्सर यह कह दिया जाता है कि वो तो सोशल मीडिया से बाहर ही नहीं निकलता चाहते, को हाईवे पर फैले कचरे को इकट्ठा करते हुए पाया।

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दुनिया जितनी तेजी से दौड़ रही है, उसमें उतनी ही गति से बदलाव हो रहे हैं। मैं अभी इस बहस में नहीं जाना चाहता कि इनमें से कौन सा बदलाव हम सभी के हित में है और कौन सा नहीं।मैं तो धीमी गति से चलने में विश्वास करता हूं, ताकि उन सभी परिवर्तन का साक्षी बन सकूं, जो हमारे आसपास होते हैं। आज एक बार फिर मैं युवाओं, जिनके बारे में अक्सर यह कह दिया जाता है कि वो तो सोशल मीडिया से बाहर ही नहीं निकलता चाहते, को हाईवे पर फैले कचरे को इकट्ठा करते हुए पाया।युवाओं के बीच इस सकारात्मक बदलाव को हमें स्वीकार ही नहीं करना होगा, बल्कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा। मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं है कि युवा हमसे ज्यादा ज्ञान रखते हैं। उनके कार्य करने का तरीका हमसे ज्यादा साइंटिफिक है। अगर हम गैर जिम्मेदार नहीं हैं तो आज का .युवा भी कम समझदार नहीं है। मैं अधिकतर युवाओं के बारे में यह बात कह रहा हूं, न कि सभी के।हां तो मैं बात कर रहा था कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट से कुछ पहले ऋषिकेश रोड की, जहां आने-जाने वाले लोग कूड़ा फेंककर आगे बढ़ जाते हैं। खाने पीने की चीजों के पैकेट, पन्नियां, प्लास्टिक गिलास, पानी की बोतलें फेंककर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति बहुत खराब है।हिमालय पुत्र एवं जलधारा से जुड़े नवीन बंगवाल, शैलेंद्र कांत, रश्मि सिंह अमीषा भट्ट और अन्य युवा हमें ऋषिकेश रोड और आसपास जंगल में कचरा इकट्ठा करते मिले। वो भी बिना किसी प्रचार प्रसार के।साफ्टवेयर इंजीनियर नवीन चंडीगढ़ में जॉब करते हैं, पर अपने साथियों के साथ रविवार को पर्यावरण को कुछ समय देने के लिए हर दूसरे रविवार यहां पहुंच जाते हैं।उनका कहना है कि हमारे साथ डिजीटली 100 युवा जुड़े हैं, जिनमें से हर रविवार कम से कम 20 से ज्यादा अलग-अलग स्थानों पर कचरा इकट्ठा करके उसको सुरक्षित स्थान पर निस्तारित करते हैं।इनमें से कुछ युवा चंद्रभागा नदी का अध्ययन कर रहे हैं। उनका कहना है कि चंद्रभागा नदी में जल कम हो रहा है, वो जानना चाहते हैं कि इसकी वजह क्या है।उनका कहना है कि हम कोशिश कर रहे हैं। हम स्वयं से पहल कर रहे हैं। लोगों को कूड़े की शिफ्टिंग की आदत को छोड़ना होगा। कूड़ा कचरा तो निर्धारित स्थान पर डालने से ही हम पर्यावरण की एक बड़ी मुश्किल को दूर कर पाएंगे।
युवाओं के बीच इस सकारात्मक बदलाव को हमें स्वीकार ही नहीं करना होगा, बल्कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा। मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं है कि युवा हमसे ज्यादा ज्ञान रखते हैं। उनके कार्य करने का तरीका हमसे ज्यादा साइंटिफिक है। अगर हम गैर जिम्मेदार नहीं हैं तो आज का .युवा भी कम समझदार नहीं है। मैं अधिकतर युवाओं के बारे में यह बात कह रहा हूं, न कि सभी के।
हां तो मैं बात कर रहा था कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट से कुछ पहले ऋषिकेश रोड की, जहां आने-जाने वाले लोग कूड़ा फेंककर आगे बढ़ जाते हैं। खाने पीने की चीजों के पैकेट, पन्नियां, प्लास्टिक गिलास, पानी की बोतलें फेंककर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति बहुत खराब है।
हिमालय पुत्र एवं जलधारा से जुड़े नवीन बंगवाल, शैलेंद्र कांत, रश्मि सिंह अमीषा भट्ट और अन्य युवा हमें ऋषिकेश रोड और आसपास जंगल में कचरा इकट्ठा करते मिले। वो भी बिना किसी प्रचार प्रसार के।
साफ्टवेयर इंजीनियर नवीन चंडीगढ़ में जॉब करते हैं, पर अपने साथियों के साथ रविवार को पर्यावरण को कुछ समय देने के लिए हर दूसरे रविवार यहां पहुंच जाते हैं।
उनका कहना है कि हमारे साथ डिजीटली 100 युवा जुड़े हैं, जिनमें से हर रविवार कम से कम 20 से ज्यादा अलग-अलग स्थानों पर कचरा इकट्ठा करके उसको सुरक्षित स्थान पर निस्तारित करते हैं।
इनमें से कुछ युवा चंद्रभागा नदी का अध्ययन कर रहे हैं। उनका कहना है कि चंद्रभागा नदी में जल कम हो रहा है, वो जानना चाहते हैं कि इसकी वजह क्या है।

उनका कहना है कि हम कोशिश कर रहे हैं। हम स्वयं से पहल कर रहे हैं। लोगों को कूड़े की शिफ्टिंग की आदत को छोड़ना होगा। कूड़ा कचरा तो निर्धारित स्थान पर डालने से ही हम पर्यावरण की एक बड़ी मुश्किल को दूर कर पाएंगे।

 

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TAGGED:Campaign on Social MediaChandra Bhaga RiverDigital IndiaDigital MarketingDigitalizationGanga riverJolly Grant AirportNature and TechnologyPlastic PollutionSocial Media CampaignTributaries of GangaYouth and Social Mediaकचरे का निस्तारणप्लास्टिक कचरे का निस्तारण कैसे करेंप्लास्टिक कचरे से होने वाले नुकसान
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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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