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उत्तराखंड में सैनिक कल्याण विभाग कराएगा शहीद द्वार एवं स्मारकों का निर्माणः सीएम

मुख्यमंत्री धामी ने विजय दिवस पर भूतपूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं को सम्मानित किया

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस पर गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की, प्रदेश में शहीद द्वार/स्मारकों के निर्माण अब सैनिक कल्याण विभाग के माध्यम से होंगे, पहले यह कार्य संस्कृति विभाग से कराए जाते थे।

वीरता चक्र श्रृंखला से अलंकृत सैनिकों एवं वीर नारियों को परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा अनुमन्य होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ ही पराक्रम और बलिदान की भूमि भी है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीरभूमि प्रदेश के 255 जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। प्रदेश के 74 सैनिकों को विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित कर देश स्वयं सम्मानित हुआ था।

मुख्यमंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य में पांचवें धाम की नींव रखते हुए देहरादून में एक भव्य ‘सैन्य धाम‘ का निर्माण प्रारंभ किया है। जो आने वाली अनेक पीढ़ियों के लिए एक दिव्य प्रेरणा पुंज के रूप में कार्य करेगा।

इस दौरान सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक खजान दास, विधायक सविता कपूर, निदेशक सैनिक कल्याण (ब्रिगेडियर.से.नि) अमृतलाल, पूर्व सैन्य अधिकारी एवं वीरांगनाएं उपस्थित रहे।

 

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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