
Hemvanti Nandan Bhatt Hemu Uttarakhand Culture: पहाड़ की ‘आवाज़’ को मंच की तलाश: आर्थिक संकट के बीच स्टूडियो की चौखट पर ठिठकी ‘हेमू’ की रचनाएं
Hemvanti Nandan Bhatt Hemu Uttarakhand Culture: देहरादून, 22 फरवरी, 2026ः पत्रकारिता में सिद्धांतों की कठिन डगर पर चलने वाले वरिष्ठ रचनाकार हेमवंती नंदन भट्ट ‘हेमू’ आज एक अजीब द्वंद्व में हैं। उनके पास उत्तराखंड की संस्कृति, वेदना और जनसरोकारों का वह ‘खजाना’ है, जिसकी गूंज दुनियाभर में होनी चाहिए थी, लेकिन विडंबना देखिए कि सिद्धांतों वाली पत्रकारिता और गंभीर विषयों पर लेखनी चलाने वाले हेमू भट्ट के पास अपनी रचनाओं को संगीत के साथ जनता तक पहुँचाने के लिए मदद की दरकार है।
Hemvanti Nandan Bhatt Hemu Uttarakhand Culture: आज जब संगीत के नाम पर फूहड़ता और सतहीपन का बोलबाला है, ऐसे में ‘हेमू’ की रचनाएं उस सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए संघर्ष के दौर में हैं। अब पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक दिक्कतों के चलते रचनाएं कागजों में ही दम तोड़ती दिख रही हैं।
पत्रकार हेमू भट्ट का लिखा गीत ‘ऊँची ऊँची डांडयू माँ…’ पर वीडियो जारी
गीतों में समाहित है उत्तराखंड का भूत, वर्तमान और भविष्य
Hemvanti Nandan Bhatt Hemu Uttarakhand Culture: हेमवंती नंदन भट्ट की रचनाएं केवल शब्द नहीं, बल्कि पहाड़ की जीवंत दास्तां हैं। उनके गीतों में वह गहराई है, जो आज के व्यावसायिक गीतों में नहीं दिखती। उनका गीत “चुप च यू गौं चुप च स्यु गौं केकु तैं यु मौन लेयुं…” पहाड़ के उन बंद घरों और वीरान गांवों की मूक आवाज है, जिसे सुनकर किसी भी पहाड़ प्रेमी की आंखें नम हो सकती हैं।
श्रृंगार रस में उनकी रचना “हे मेरि बांद आसमा कु चांद जनि तेरू रूप दिखेंदु…” में ऐसे बिम्ब और उपमाओं का प्रयोग किया गया है, जो आधुनिक गायकी के दौर में नहीं मिलतीं।
प्रकृति के असंतुलन पर उन्होंने तीखा तंज कसते हुए लिखा है, “प्रकृति कु असंतुलन चिंता कि चितामा भड़ायेणु चा…”। यह गीत सरकारी फाइलों और विभाग की खोखली चिंताओं पर करारी चोट करता है।
हेमू भट्ट की दूरदर्शिता का प्रमाण उनका वह गीत है जो उन्होंने सन 2000 में लिखा था, “कोल्डड्रिंक बियर बार पाड़ डांडा वार पार में…”। आज उत्तराखंड जिस सामाजिक और व्यावहारिक बदलाव को भोग रहा है, उसे उन्होंने ढाई दशक पहले ही देख लिया था।
हेमू भट्ट ने 19 साल पहले ही गीत लिखकर बता दिए थे आज जैसे हालात
सांस्कृतिक यज्ञ में आहुति की अपील
रचनाकार हेमू का कहना है, “ईमानदारी ने पैसा तो नहीं दिया, पर समाज के प्रति जिम्मेदारी की सोच हमेशा रखी। अब मैं अपने इन गीतों को यूट्यूब के जरिए नई पीढ़ी तक पहुँचाना चाहता हूँ, ताकि हमारी भाषा अमर रहे।”
हेमू भट्ट ने समाज के प्रबुद्धजनों, प्रवासियों और कला प्रेमियों से भावुक अपील की है, कि जो भी सज्जन सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक व उसका प्रतिनिधित्व करने वाले इन गीतों को यूट्यूब प्लेटफार्म पर प्रस्तुत करने के लिए अपना आर्थिक योगदान देंगे, उनके सहयोग को न केवल गीतों में ‘प्रस्तुतकर्ता’ के रूप में (यूट्यूब प्लेटफार्म) पर प्रदर्शित किया जाएगा, बल्कि यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर उनके नाम का सार्वजनिक आभार ( उक्त गीतों के प्रस्तुतकर्ता के रूप में) व्यक्त किया जाएगा।
वो आग्रह करते हैं कि, मैंने तो अपनी माटी थाती और अपनी जल्मभूमि के प्रति अपना नैतिक कर्तव्य अपनी रचनाधर्मिता के रूप में चुका दिया है। अब आपकी बारी है अपनी संस्कृति बोली अपनी माटी और गढ़बोली भाषा के प्रति।













