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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

पानी की दौड़ में महिलाओं के पास अपने लिए समय कहां है

मैंने न तो मायके में और न ही ससुराल में, नल की टोंटी खोलकर पानी नहीं  पीया। मेरे लिए घर पर नल, सपना ही है बस। मुझे लगता है, कि…

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हकीकत ए उत्तराखंडः किसान भगवान भरोसे, सिस्टम से उठा विश्वास

गोवा और मुंबई के होटलों में बतौर शेफ नौकरी कर रहे वीरेंद्र को कोविड के दौर में घर वापस लौटना पड़ा था। पूरी मुस्तैदी से परिवार के साथ खेतीबाड़ी में…

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हकीकत ए उत्तराखंडः खेतू के खेतों में ही सड़ गई अदरक, सरकार को नहीं देता सुनाई

टिहरी गढ़वाल के खेतू गांव में इस बार अदरक की फसल खेतों में ही सड़ गई। पूरी फसल पीली पड़ गई। हर साल अदरक की फसल से उम्मीद बांधने वाले…

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चकराता के खनाड़ का दलदल वाला रास्ता, किसानों की मुश्किलें, वर्षों पुराने भवन

राजेश पांडेय करीब 25 वर्षीय राहुल भट्ट, चकराता के खनाड़ गांव में खेतीबाड़ी करते हैं। इस बार उनकी टमाटर की खेती को बहुत नुकसान पहुंचा। टमाटर की, जो क्रैट पिछली…

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लघु किसान नन्हे वर्मा से एक मुलाकात, दिल खुश कर दिया बंदे ने

सार्थक और मैंने, देहरादून से वाया दूधली डोईवाला जाने का मन बनाया। वो इसलिए, क्योंकि हम दोनों को ही यह रास्ता बहुत पसंद है। यहां सड़क के एक किनारे पर…

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आपको सलामः दीप्ति ने घर की रसोई से की एक पहल, अब आसमां छूने की तैयारी

राजेश पांडेय मार्केट में गए, तो हमने उनको अपने बनाए मसाले दिखाए तो उन्होंने कह दिया, यह नहीं चलेगा। उन्होंने यह नहीं बताया कि हमारे मसाले क्यों नहीं चलेंगे। वो…

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गारे व फूस से बनी रसोई, मिट्टी का चूल्हा, दूध का रेट और समझदार भैंसें

आपको मिलवाते हैं मीर हमजा से, जो खैरी गांव में जंगल के पास रहते हैं। वन गुर्जर मीर के पास 20 पशु हैं, जिनमें गाय-भैंस शामिल हैं। उनके दस पशु दूध…

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युवा बोले, कृषि प्रौद्योगिकी में महिला कृषकों की आवश्यकताएं जानना जरूरी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है, इसलिए कृषि प्रोद्यौगिकी  को उनके अनुकूल डिजाइन करने की जरूरत है। महिला कृषक यानी उपयोगकर्ताओं से यह जानना…

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Video: एक दिन की दिहाड़ी 65 रुपये के लिए रोजाना 20 किमी. पैदल चलते हैं 65 साल के बुजुर्ग

राजेश पांडेय “ हमारे पास एक समय में सौ पशु थे, जिनको चराने के लिए जंगल ले जाते थे। धीरे-धीरे संख्या कम होती गई और इस समय हमारे पास मात्र…

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किस्से मीडिया केः कुछ लोग अपने हित के लिए रिपोर्टर्स को बना देते हैं प्रतिद्वंद्वी

अखबारों के दफ्तरों में बहुत सारी सूचनाओं को गोपनीय रखना होता है। मैं कुछ एक्सक्लूसिव खबरों की बात कर रहा हूं। जिस दिन रिपोर्टर के पास कोई एक्सक्लूसिव खबर होती…

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किस्से मीडिया केः जब एक ट्रेनी ने एडिटिंग के नाम पर बायलाइन हटा दी

देर रात साइड स्टोरी को लिखने से हाथ खड़े कर दिए थे इस ट्रेनी ने अखबार पर डेस्क की नौकरी हो या रिपोर्टिंग की, आपको कुछ देर पहले तक नहीं पता…

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इन परिवारों को बहुत डराती हैं बारिश वाली रातें

राजेश पांडेय बरसात के साथ हमारी आफत शुरू हो जाती है। हमें नहीं पता, कब सुसुवा और बरसाती खाले का पानी बस्ती में घुस जाए। आज (28 जुलाई,2021) की सुबह,…

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दून के साइक्लिस्ट की कहानीः आप भी बन सकते हैं साइकिलिंग के सचिन तेंदुलकर

देहरादून के रहने वाले करीब 28 साल के विजय प्रताप सिंह ने 2015 में एमबीए कम्पलीट किया और बैंक में जॉब करने लगे। पर, उनको भागदौड़ वाली पेशेगत मजबूरी ज्यादा…

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उत्तराखंड का धारकोटः  बेहद सुंदर गांव, पानी के लिए जोखिम, आत्मनिर्भरता की पहल

धारकोट उत्तराखंड का बेहद सुंदर गांव है। देहरादून एयरपोर्ट से धारकोट की दूरी करीब 18 किमी. होगी। जब आप देहरादून से वाया रायपुर होते हुए एयरपोर्ट आते हैं, तो रास्ते में थानो गांव है। करीब 20…

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डुगडुगी के वीडियोः आपको पसंद आएंगे

कृपया सब्सक्राइब करें, साझा करें- डुगडुगी वीडियो के कुछ खास लिंक नीचे दिए गए हैं। कृपया वीडियो देखिए और सब्सक्राइब कीजिए। Keywords:- Dugdugi Rajesh, Dugdugi Uttarakhand, organic farming, Machchali palan,…

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इंटीग्रेटेड फार्मिंगः सिमलास ग्रांट में आकर देखिए स्वरोजगार की राह

राजेश पांडेय कुछ दिन पहले मछली पालन से स्वरोजगार की जानकारी आप तक पहुंचाई थी। श्यामपुर में सूरजमणि सिलस्वाल के करीब दो बीघा तालाब में लगभग दस हजार मछलियों का…

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उत्तराखंड में बिजली पर राजनीतिः बिजली नहीं होने से पलायन कर गया यह गांव

देहरादून। उत्तराखंड में फ्री की बिजली को लेकर खूब राजनीति हो रही है। कोई 100 यूनिट तक फ्री और किसी ने 300 यूनिट तक फ्री में वोटों की बोली लगा…

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किसान की कहानीः खेती में लागत का हिसाब लगाया तो बैल बेचने पड़ जाएंगे !

राजेश पांडेय जब भी आप खाना खाएं तो उन किसान को जरूर याद करें, जिन्होंने बड़ी मेहनत से आपके लिए अन्न पैदा किया है। मैं उन लघु, सीमांत किसान की…

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