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Indigenous Decaffeinated Black Tea India: अब स्वाद से समझौता किए बिना सेहत का ख्याल

Indigenous Decaffeinated Black Tea India: जोरहाट (असम), 10 फरवरी, 2026 : भारत के चाय प्रेमियों के लिए विज्ञान के क्षेत्र से एक बड़ी खुशखबरी आई है। असम स्थित CSIR-उत्तर पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-NEIST) ने देश की पहली स्वदेशी ‘डिकैफ़िनेटेड’ (कैफीन-मुक्त) ब्लैक टी विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। इस तकनीक के माध्यम से चाय में कैफीन की मात्रा को 90% से 95% तक कम कर दिया गया है, जबकि इसका समृद्ध स्वाद, सुगंध और रंग पूरी तरह से बरकरार है।

हालांकि, इस तकनीक की प्रारंभिक घोषणा सितंबर 2025 में की गई थी, लेकिन हाल ही में संस्थान द्वारा इसे सोशल मीडिया पर सक्रिय रूप से साझा करना इसके व्यावसायिक लॉन्च (Commercial Launch) के संकेतों को पुष्ट करता है।

जैसे-जैसे यह तकनीक लैब से निकलकर बाजारों तक पहुँचेगी, भारत वैश्विक डिकैफ़ चाय बाजार में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। यह पहल दिखाती है कि कैसे परंपरा, विज्ञान और उद्यमिता मिलकर स्थानीय उद्योगों को वैश्विक पहचान दिला सकते हैं।

Indigenous Decaffeinated Black Tea India: भारत में चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान और प्रमुख आर्थिक स्तंभ है। ब्रिटिश काल से शुरू हुए इस सफर में अब वैज्ञानिक नवाचार ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है। CSIR-NEIST की यह तकनीक पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ पर आधारित है।

अब तक भारत डिकैफ़िनेशन के लिए विदेशी रसायनों और आयातित तकनीकों पर निर्भर था, लेकिन इस स्वदेशी खोज ने भारत को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया है।

Indigenous Decaffeinated Black Tea India: भारत के चाय उत्पादन के केंद्र असम के लिए यह उपलब्धि गेम-चेंजर साबित हो सकती है। स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली पत्तियों में इस ‘वैल्यू एडिशन’ के माध्यम से बागान मालिक और किसान भारत के साथ-साथ विदेशों के प्रीमियम मार्केट्स को आकर्षित कर सकेंगे।

यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘सस्टेनेबल’ समाधान पेश करती है। इससे न केवल निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि स्वास्थ्य-उन्मुख (Functional Tea) के क्षेत्र में भी और अधिक शोध को बढ़ावा मिलेगा।

आज, सालाना 1.3 मिलियन टन से अधिक उत्पादन के साथ, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। असम की कड़क चाय से लेकर दार्जिलिंग की कोमल सुगंध तक, चाय भारत के लिए एक आर्थिक जीवन रेखा और दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बनी हुई है। चाय कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। चाय एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती है, पाचन में सुधार कर सकती है और इसमें मौजूद कैफीन के कारण सतर्कता (Alertness) को थोड़ा बढ़ा देती है।

चाय का अत्यधिक सेवन एसिडिटी, बेचैनी, चिंता, सिरदर्द और नींद में खलल पैदा कर सकता है, खासकर यदि इसे शाम के समय पिया जाए। नियमित रूप से भारी मात्रा में सेवन करने से कैफीन पर हल्की निर्भरता भी हो सकती है, जिससे इस पेय के बिना काम करना मुश्किल हो जाता है। इन चिंताओं ने उपभोक्ताओं और शोधकर्ताओं दोनों को ऐसे विकल्पों को खोजने के लिए प्रेरित किया है जो कैफीन से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करते हुए चाय के स्वाद और स्वास्थ्य लाभों को बनाए रखें।

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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