“Sir” शब्द की कोई फुल फॉर्म नहीं है, इसका मतलब यह होता है

Rajesh Pandey

न्यूज लाइव डेस्क

“sir” शब्द का इस्तेमाल हमारी दिनचर्या में कई बार होता है। अपने से सीनियर या उम्र में बड़े लोगों को अक्सर “sir” कहकर संबोधित करते हैं। ई-मेल लिखते समय भी शुरुआती शब्द “sir” ही होता है। या यूं कहें कि यह शब्द संबोधन के लिए हमारी जुबान पर है।

पर, देखा जा रहा है, सोशल मीडिया पर मनगढ़ंत तरीके से बताया जा रहा है कि “sir” की फुल फॉर्म ‘Slave I Remain’ होती है, जिसका मतलब होता है “मैं गुलाम बना हूं”।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि “sir” शब्द की कोई फुल फार्म नहीं है और “sir” का मतलब खुद को गुलाम बताने से नहीं है। इसलिए इस शब्द की मनगढ़ंत व्याख्या की तरफ ध्यान नहीं दिया जाए।

“sir” शब्द दूसरों के प्रति सम्मान प्रदान करने का संबोधन है। इस शब्द की उत्पत्ति Middle English और Old French
से हुई है। इसका संबंध Old French “Sire” से है, जो स्वयं Latin word “senior” से आया है, जिसका अर्थ है “Older” या “elder” है।

Medieval times में “sir” का उपयोग अधिकार की स्थितियों वाले किसी व्यक्ति, जैसे knight या lord को संबोधित करने के लिए सम्मानजनक रूप में किया जाता था।

समय के साथ,”sir” का उपयोग अधिक व्यापक हो गया और पुरुषों के लिए विनम्र संबोधन के लिए यह सामान्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। इसे आम तौर पर दूसरों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए उपयोग किया जाता है, अक्सर किसी व्यक्ति के नाम से पहले या सम्मान या विनम्रता दिखाने के लिए इसे उपयोग किया जाता है।

“sir” शब्द का उपयोग दिनचर्या में करते रहिए, यह दूसरों के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त करता है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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