
Eye Donation AIIMS Rishikesh: ऋषिकेश, 18 नवंबर, 2025: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के मार्गदर्शन और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयास से उत्तराखंड में नेत्रदान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की गई है। इस महान अभियान के तहत अब तक 1174 नेत्रदाता परिवारों द्वारा कॉर्निया दान किए गए हैं, जिनसे 880 जरूरतमंद व्यक्तियों को पुनः नेत्रज्योति प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि प्रदेश में ‘नेत्रदान महादान’ के प्रति बढ़ती जागरूकता का एक ऐतिहासिक प्रमाण है।
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Eye Donation AIIMS Rishikesh: एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने इस महत्वपूर्ण सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी सहयोगी संस्थाओं और स्वयंसेवकों की सराहना की। उन्होंने कहा, “जनजागरूकता बढ़ाने में समाज के विभिन्न वर्गों का योगदान अत्यंत सराहनीय है। हम सभी को मिलकर इस पुण्य अभियान से जुड़ना चाहिए, ताकि नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में और अधिक उजाला लाया जा सके।”
प्रमुख सहयोगी एवं योगदानकर्ता
Eye Donation AIIMS Rishikesh: डॉ. मीनू सिंह ने सुप्रयास कल्याण संस्थान के डॉ. सत्या नारायण एवं डॉ. शिवम शर्मा, लायंस क्लब ऋषिकेश के गोपाल नारंग, देह दान समिति हरिद्वार के सुभाष चंद्र, मुस्कान फाउंडेशन की नेहा मालिक तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन (ऋषिकेश) की नूतन अग्रवाल सहित अनेक संस्थाओं और समाजसेवियों के उल्लेखनीय योगदान की विशेष रूप से सराहना की। समाजसेवी अनिल कक्कड़, संगीता आनंद (ऋषिकेश), अनिल अरोड़ा, समीर चावला, अशोक कालरा (हरिद्वार), विवेक अग्रवाल, हरदीप सिंह (देहरादून) और सीमा जैन (रुड़की) के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया।
एम्स आई बैंक टीम का उत्कृष्ट कार्य
Eye Donation AIIMS Rishikesh: इस कार्य में एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) संजीव कुमार मित्तल, नेत्र बैंक की डायरेक्टर डॉ. नीति गुप्ता और आई बैंक टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके नेतृत्व में टीम ने नेत्रदान की प्रक्रिया को अत्यंत संवेदनशील, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संचालित किया।
प्रो. मित्तल ने बताया कि कुल नेत्रदान में से 32% नेत्रदान स्वैच्छिक रूप से उक्त सामाजिक संस्थानों द्वारा कराए गए, जो समाज में बढ़ती मानवीय संवेदना और जनसहभागिता का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा विज्ञान की बड़ी सफलता है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और सतत जनभागीदारी का एक प्रेरक उदाहरण भी है।













