Uttarakhand School Adoption CSR: उत्तराखंड के 550 सरकारी स्कूलों को गोद लेंगे उद्योगपति
30 जुलाई को राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होगा एमओयू
Uttarakhand School Adoption CSR
सीएसआर फंड से संसाधन सम्पन्न होंगे दूरस्थ क्षेत्र के राजकीय विद्यालय
Uttarakhand School Adoption CSR: देहरादून, 28 जुलाई 2025: उत्तराखंड के लगभग 550 राजकीय विद्यालयों को अब कॉर्पोरेट समूह गोद लेकर उन्हें साधन-संपन्न बनाएंगे। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए राज्य सरकार ने उत्तराखंड के विभिन्न उद्योग समूहों के साथ व्यापक चर्चा कर पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है।
आगामी 30 जुलाई को उत्तराखंड राजभवन में आयोजित होने वाले एक विशेष कार्यक्रम में 550 से अधिक उद्योगपतियों को आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में कॉरपोरेट समूहों तथा शिक्षा विभाग के मध्य राज्य के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों को गोद लेने संबंधी एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार शिक्षा के आधुनिकीकरण और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए उद्योग जगत के साथ मिलकर एक नई पहल शुरू कर रही है।
इसके तहत, राज्य के करीब 550 राजकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को कॉर्पोरेट समूहों से जोड़ा जा रहा है। इनमें से अधिकतर विद्यालय पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं, ताकि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच अवस्थित इन विद्यालयों को सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड के माध्यम से आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के साथ-साथ मॉडल क्लास रूम, कंप्यूटर लैब, साइंस लैब, पुस्तकालय, फर्नीचर, शौचालय, खेल सामग्री, खेल मैदान और चारदीवारी जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सके।
डॉ. रावत ने बताया कि राज्य सरकार ने लगभग 550 उद्योगपतियों से संपर्क कर इस संबंध में सैद्धांतिक सहमति प्राप्त कर ली है। इसी क्रम में, 30 जुलाई को उत्तराखंड राजभवन में आयोजित होने वाले इस वृहद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश भर के उद्योग समूहों के सीएसआर फंड के माध्यम से विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं के साथ एक नई पहचान दिलाना है।
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इस पहल के तहत, प्रत्येक उद्योग समूह एक प्राथमिक और एक माध्यमिक विद्यालय को गोद लेगा, और उनमें सभी आधारभूत एवं आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराएगा। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के दुर्गम विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को आज की आवश्यकताओं तथा नई शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
डॉ. रावत ने यह भी बताया कि राज्य में करीब 559 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे विद्यालयों को उद्योग समूहों से जोड़ने के बाद व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।













