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इलाज में गलती से हर साल 26 लाख मरीजों की मौत

मरीजों की सुरक्षा और सही तरह से देखभाल के लिए प्रतिबद्धता बढ़ाने तथा पूरी दुनिया का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर ले जाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस साल 17 सितंबर को पहले विश्व रोगी सुरक्षा दिवस की शुरुआत की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में असुरक्षित तरीके से स्वास्थ्य की देखभाल के कारण हर वर्ष लाखों रोगियों को नुकसान पहुंचता है, इसके परिणामस्वरूप निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सालाना 26 लाख मौतें होती हैं, इनमें से अधिकतर मरीजों को मौत से बचाया जा सकता था।

रोगी की मृत्यु से होने वाले व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव से दुनियाभर को भारी नुकसान होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस का कहना है कि इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि स्वास्थ्य की देखभाल के दौरान किसी भी रोगी को नुकसान नहीं पहुंचे, लेकिन इसके बाद भी असुरक्षित तरीके से देखभाल के कारण विश्व में हर मिनट कम से कम पांच रोगियों की मृत्यु हो जाती है।

हमें एक ऐसी प्रवृत्ति व संस्कृति को विकसित करने की आवश्यकता है, जो रोगियों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देती है। जहां जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। यह व्यवस्था त्रुटियों से सीखने, समझने के लिए प्रोत्साहित करती हो तथा एक ऐसे वातावरण का निर्माण करती हो, जहां कोई किसी पर दोषारोपण न करे, बल्कि अपनी गलतियों को स्वीकार करे। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गलतियां कम करने के लिए सशक्त और प्रशिक्षित बनाया जाता हो।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार दस में से चार मरीजों को प्राथमिक और एम्बुलेटरी हेल्थ केयर के दौरान नुकसान पहुंचता है। सबसे ज्यादा नुकसान रोग के गलत निदान, नुस्खे और दवा के अनुचित उपयोग तथा सर्जरी में गलती तथा सही तरह से स्वास्थ्य की देखभाल नहीं किए जाने से होता है। रिपोर्ट के अनुसार गलत दवा के उपयोग से अकेले अमेरिका में हर साल 42 बिलियन डॉलर के खर्च का आकलन है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वास्थ्य की देखभाल के दौरान मरीज की मृत्यु को स्वीकार नहीं करता। संगठन देखभाल के दौरान मरीजों की मृत्यु को कम करने के अभियान में शामिल होने के लिए पूरी दुनिया का आह्वान कर रहा है। रोगी की सुरक्षा में सुधार से महत्वपूर्ण वित्तीय बचत हो सकती है।

मरीजों की मृत्यु से आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से भारी नुकसान होता है, जिसको स्वास्थ्य सुरक्षा को इम्प्रूव करने से काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य की देखभाल और सही तरीके से उपचार की लागत मरीज की मृत्यु से होने वाले नुकसान से बहुत कम होती है। कुल मिलाकर मरीजों की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। साथ ही, निवेश से स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए जा सकते है।

इस मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका का उदाहरण सामने है, जिसने वर्ष 2010 से 2015 के बीच अस्पतालों में स्वास्थ्य सुरक्षा में बेहतर बदलाव करके एक वर्ष में लगभग 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत की थी। यह सब इलाज में मरीजों की भागीदारी से हो सका, क्योंकि मरीजों की भागीदारी से ही बेहतर इलाज संभव है और इससे स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़े सुधार किए जा सकते हैं। इससे हर साल स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को 15 फीसदी तक कम किया जा सकता है, वहीं इलाज पर होने वाली भारी भरकम रकम की बचत की जा सकती है। इससे अर्थव्यवस्था की मजबूती में मदद मिलेगी।

#Speakupforpatientsafety!

 

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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