
Heart disease in pregnant women AIIMS Rishikesh: गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग वाली महिलाओं के लिए AIIMS Rishikesh में जागरूकता कार्यक्रम
Heart disease in pregnant women AIIMS Rishikesh: ऋषिकेश: 29 नवम्बर 2025ः सशक्त परिवार के लिए नारी का स्वस्थ होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से, गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग से ग्रसित महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए एम्स ऋषिकेश में शनिवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
Heart disease in pregnant women AIIMS Rishikesh: एम्स ऋषिकेश के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग द्वारा ‘हार्ट डिसीज इन वुमेन ऑफ प्रोडक्टिव एज’ (प्रजनन आयु की महिलाओं में हृदय रोग) विषय पर आयोजित सेमिनार और सतत शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) में विशेष रूप से नियमित स्क्रीनिंग और चिकित्सीय सलाह के महत्व पर ज़ोर दिया गया।
जागरूक रहकर निपटा जा सकता है चुनौती से
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि हृदय रोग के साथ गर्भावस्था को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन जागरूक रहकर और चिकित्सीय सलाह का सख्ती से पालन करते हुए इससे सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है।
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मुख्य अतिथि, डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने कहा कि उम्र के साथ होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक रहकर महिलाएं खुद को स्वस्थ रख सकती हैं। उन्होंने सीटीवीएस विभाग के प्रयासों की सराहना की।
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प्रजनन आयु की महिलाओं के लिए विशेष सलाह
Heart disease in pregnant women AIIMS Rishikesh: सीटीवीएस विभाग की एडिशनल प्रोफेसर और कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. नम्रता गौड़ ने अपने व्याख्यान में बताया कि 14 से 45 वर्ष तक की हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं को गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के समय नियमित स्क्रीनिंग करवाना और डॉक्टरों की सलाह से ही दवाओं का सेवन करना बहुत आवश्यक है।
उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की:
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40 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिलाओं के गर्भ धारण करने पर होने वाली शारीरिक परेशानियां।
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दिल में छेद होने, हृदय की धमनी के सिकुड़ जाने, और सांस फूलने जैसी समस्याओं से होने वाली दिक्कतें।
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गर्भस्थ शिशु के दिल में छेद होने की जांच और एम्स में उपलब्ध इलाज।
डॉ. गौड़ ने ऐसी महिलाओं के सफल उदाहरण भी प्रस्तुत किए, जिन्होंने एम्स से इलाज करवाकर और जागरूक रहकर हार्ट रोगों से ग्रसित होने के बावजूद सुरक्षित प्रसव करवाया और अब स्वस्थ जीवन जी रही हैं। उन्होंने हृदय रोग से ग्रसित कुछ विख्यात महिला सेलेब्रिटीज के उदाहरण भी दिए जो जागरूक रहकर खुशहाल जीवन बिता रही हैं।
सीएमई में अन्य विभागों के विशेषज्ञों ने दी जानकारी
सीएमई सत्र में अन्य विभागों के विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:
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प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की डॉ. अनुपमा बहादुर, डॉ. लतिका चावला और डॉ. कविता खोइवाल ने गर्भावस्था के दौरान की परेशानियों, सावधानियों और इलाज के बारे में बताया।
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एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रो. डॉ. कल्याणी श्रीधरन ने थाइराइड व शुगर के नियंत्रण पर लाभदायक जानकारी दी।
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मेडिसिन विभाग के डॉ. पीके पंडा ने गर्भावस्था के समय एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल, दुष्प्रभाव और बचाव संबंधी जानकारी दी।
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सीटीवीएस विभाग के डॉ. राजा लहरी और डॉ. दानिश्वर मीणा ने युवावस्था वाली महिलाओं के हृदय की सर्जरी और प्रसव के दौरान रक्त में आने वाली परेशानियों के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभम रावत ने किया। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, सीटीवीएस विभाग के हेड प्रो. अंशुमान दरबारी सहित बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य, स्वस्थ हो चुकी महिलाएं और उनके तीमारदार मौजूद रहे।













